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Bihar News: वनप्लस की खराब सेवा पर जिला उपभोक्ता आयोग सख्त, महिला आरक्षी को बड़ी राहत

Mon, 15 Dec 2025 06:09 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान Published by: सारण ब्यूरो Updated Mon, 15 Dec 2025 06:09 PM IST
सार

महिला आरक्षी रंजना कुमारी ने 23 जुलाई 2021 को अमेज़न के माध्यम से खरीदा गया वनप्लस 9R 5G मोबाइल फोन खराब होने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

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siwan female constable oneplus 9r 5g mobile service issue consumer commission relief
जिला उपभोक्ता आयोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीवान जिले में तैनात महिला आरक्षी रंजना कुमारी को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से बड़ी राहत मिली है। वनप्लस कंपनी की त्रुटिपूर्ण सेवा से परेशान होकर उन्होंने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर सुनवाई के बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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मामले के अनुसार, रंजना कुमारी ने 23 जुलाई 2021 को अमेज़न के माध्यम से वनप्लस 9R 5G मोबाइल फोन करीब 45 हजार रुपये में खरीदा था। फोन पर एक वर्ष की वारंटी थी, लेकिन वारंटी अवधि के दौरान ही मोबाइल खराब हो गया। इसके बाद उन्होंने फोन को पटना स्थित कंपनी के सर्विस सेंटर में जमा किया, लेकिन कई बार आने-जाने के बावजूद कंपनी की ओर से फोन को ठीक कर वापस नहीं किया गया।
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कंपनी की लापरवाही और खराब सेवा से क्षुब्ध होकर रंजना कुमारी ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में वनप्लस कंपनी के निदेशक विकास कुमार के खिलाफ शिकायत दायर की। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष जय राम प्रसाद और सदस्य मनमोहन कुमार की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि वारंटी अवधि में फोन की मरम्मत नहीं करना सेवा में गंभीर कमी को दर्शाता है। इसके अलावा, आयोग की ओर से नोटिस दिए जाने के बावजूद कंपनी पक्ष का आयोग के समक्ष उपस्थित न होना उसके असभ्य और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।
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आयोग ने अपने आदेश में कंपनी को निर्देश दिया कि आदेश प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर मोबाइल फोन को ठीक कर सही हालत में शिकायतकर्ता को लौटाया जाए। इसके साथ ही मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के लिए 8 हजार रुपये, कुल 28 हजार रुपये का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।


आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कंपनी 15 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं करती है, तो उसे फोन की कीमत 45,999 रुपये में से 10 प्रतिशत की कटौती कर 39,599 रुपये पर वाद दायर होने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करना होगा। इसके अलावा 20 हजार रुपये का हर्जाना और 28 हजार रुपये की राशि जोड़कर कुल भुगतान 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में 45 दिनों के बाद शिकायतकर्ता आयोग में निष्पादन की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं।

यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए एक अहम उदाहरण है, जो यह संदेश देता है कि कंपनियों की लापरवाही और खराब सेवा के खिलाफ आयोग सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटता।
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