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Land Adventure: दिव्यांग उदय बने साहस और धैर्य की मिसाल, राष्ट्रपति मुर्मू ने इस पुरस्कार से नवाजा
Sat, 18 Jan 2025 09:19 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण/नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण/नई दिल्ली
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sat, 18 Jan 2025 09:19 PM IST
सार
Tenzing Norgay National Adventure Award: दिव्यांग उदय कुमार को उनके साहस और धैर्य की मिसाल पेश करने लिए राष्ट्रपति मुर्मू ने तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से सम्मानित किया है। पढ़ें उदय कुमार की प्रेरणादायी खबर...।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों पुरस्कार ग्रहण करते उदय कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सारण जिले के बारोंपुर गांव निवासी 36 वर्षीय उदय कुमार ने अपने साहसिक कार्यों से देश और राज्य का नाम रोशन किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2023 से सम्मानित किया। यह पुरस्कार साहसिक कार्यों में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। उदय की कहानी एक दिव्यांग व्यक्ति के संघर्ष, दृढ़ता और सफलता का प्रेरणादायक उदाहरण है।
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एक पैर पर खड़ा साहस
जानकारी के मुताबिक, उदय कुमार 2015 में एक रेल दुर्घटना में अपना एक पैर गंवा बैठे। बावजूद इसके उन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। बैसाखी के सहारे लैंड एडवेंचर यानी पर्वतारोहण और मैराथन में अपना जुनून बनाए रखा। उदय ने पश्चिम सिक्किम के कंचनजंघा राष्ट्रीय उद्यान में माउंट रेनॉक (16,500 फीट) पर चढ़ाई की और तंजानिया में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (19,341 फीट) को फतह कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। किलिमंजारो चढ़ाई के दौरान उन्होंने भारतीय ध्वज को 7,800 वर्ग फुट की ऊंचाई पर फहराया।
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पारिवारिक जिम्मेदारी और आर्थिक संघर्ष
उदय कुमार एक निजी कंपनी में मामूली मानदेय पर काम करते हैं। ‘नो वर्क नो पे’ के आधार पर वह पर्वतारोहण और मैराथन के लिए छुट्टियां लेते हैं। उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है। आर्थिक समस्याओं के बावजूद वह अपने जुनून को जीवित रखते हुए समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
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राज्य सरकार से उपेक्षा
राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता उदय कुमार को अब तक बिहार सरकार से कोई सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कई बार राज्य सरकार से मदद की अपील की, लेकिन ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ का नारा सिर्फ कागजों तक सीमित रहा। अगर उन्हें सरकार से मदद मिले तो वह माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने का अपना सपना पूरा कर सकते हैं।
तेनजिंग नोर्गे पुरस्कार: गौरव का क्षण
उदय कुमार की हिम्मत और साहस को सराहते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें तेनजिंग नोर्गे पुरस्कार से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर भी उनकी उपलब्धियों की सराहना की। यह पुरस्कार साहसिक कार्यों के लिए भारत सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा दिया जाता है। गौरतलब है कि उदय अब तक सैकड़ों मैराथन में भाग ले चुके हैं, जिनमें 21 किलोमीटर की दौड़ भी शामिल है। उनका आत्मविश्वास और जज्बा अन्य दिव्यांगों और युवाओं के लिए एक प्रेरणा है।
माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने का सपना
उदय का अगला लक्ष्य माउंट एवरेस्ट की चोटी पर बैसाखी और अपने जुनून के सहारे तिरंगा फहराना है। हालांकि, आर्थिक तंगी उनके इस सपने को पूरा करने में बाधा बन रही है। उदय को उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी उपलब्धियों को पहचान कर सहयोग करेगी।