बिहार: सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को विदाई, 105 साल पुरानी बंगाली परंपरा में अगले साल फिर आने की प्रार्थना
छपरा के कालीबाड़ी में विजयादशमी के अवसर पर मां दुर्गा की विदाई बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार की गई। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाई और मां को सिंदूर अर्पित कर खोइछा दिया। उलू ध्वनि और ढाक की थाप के बीच महिलाओं ने अगले वर्ष फिर आगमन की प्रार्थना की।
विस्तार
विजयादशमी के अवसर पर छपरा के कालीबाड़ी में मां दुर्गा की विदाई बंगाली परंपरा और धार्मिक उल्लास के बीच की गई। पूजन, हवन और पुष्पांजलि के बाद बंगाली समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला का आयोजन किया। इस दौरान महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया और खोइछा देकर अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना के साथ विदाई दी। कालीबाड़ी में मां की विदाई की रस्म बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न हुई।
समुदाय की सबसे बुजुर्ग महिला ने मां दुर्गा को सिंदूर लगाया और खोइछा देकर विदाई की रस्म निभाई। इसके बाद उन्होंने अन्य महिलाओं को सिंदूर लगाया। फिर महिलाओं ने एक-दूसरे के माथे और चेहरे पर सिंदूर लगाकर सिंदूर खेला की परंपरा निभाई। इस दौरान पूरा परिसर भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा।
उलू ध्वनि और ढाक की थाप से गूंजा परिसर
सिंदूर खेला के दौरान बंगाली समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक उलू ध्वनि निकाली। बंगाली समाज में शुभ अवसरों पर निकाली जाने वाली इस विशिष्ट ध्वनि के बीच महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और मां दुर्गा से सुख-समृद्धि की कामना की। माता की विदाई के समय पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। महिलाओं ने मां को भावभीनी विदाई देते हुए अगले वर्ष फिर आगमन का आग्रह किया।
सिंदूर खेला बंगाली समुदाय की प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। इसमें महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद एक-दूसरे के साथ सिंदूर साझा करती हैं। यह रस्म आस्था, सौहार्द और सामुदायिक जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है।
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105 वर्षों से कालीबाड़ी में स्थापित हो रहीं मां दुर्गा
बंगाली समुदाय की सुजाता चक्रवर्ती ने बताया कि छपरा की कालीबाड़ी बिहार के प्राचीन कालीबाड़ी पूजा स्थलों में से एक है। यहां पिछले 105 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। पूजा के दौरान हर शाम ढाक और ढोल की थाप पर विशेष आरती का आयोजन होता है, जिसमें शामिल होने के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।
इस वर्ष भी मां दुर्गा की पूजा और विदाई के अवसर पर श्रद्धालुओं में उत्साह रहा। पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद सिंदूर खेला के साथ विदाई की रस्म पूरी हुई। महिलाओं ने मां दुर्गा से परिवार और समाज की सुख-शांति, समृद्धि तथा कल्याण की कामना की। मां की विदाई के साथ ही श्रद्धालुओं के बीच अगले वर्ष उनके आगमन की प्रतीक्षा का भाव भी दिखाई दिया।

बंगाली समुदाय की महिलाओं ने सिंदूर की होली कर माता को दी विदाई

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