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Bihar News: भोरे में चल रहे अस्पतालों की शुरू हुई जांच, मचा हड़कंप, जानें पूरा मामला
Fri, 03 Jan 2025 06:30 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 03 Jan 2025 06:30 PM IST
सार
आरटीआई कार्यकर्ता देवरिया (यूपी) जिले के रहने वाले ओमहरि ने सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखकर भोरे में अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों पर लगाम कसने की मांग की थी। अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन को जांच कर कार्रवाई का आदेश दिए थे।
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अस्पताल की जांच करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव के आदेश के बाद गोपालगंज जिले के भोरे मुख्यालय में संचालित अस्पतालों की रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा जांच की गई। इनसे कागजातों की मांग की गई है। यह जांच कई चरणों में चलने वाली है, जिसकी तैयारी स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कर ली गई है।
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बता दें कि आरटीआई कार्यकर्ता यूपी के देवरिया जिले के रहने वाले ओमहरि ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर भोरे में अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों पर लगाम कसने की मांग की थी। इसे लेकर अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन को जांच कर कार्रवाई का आदेश दिए थे। इधर, भोरे रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा डॉ. रिशु कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने जांच शुरू की। पहले दिन आधा दर्जन से अधिक क्लीनिकों की जांच की गई। इसमें दो क्लीनिकों के कागजात सही पाए गए। जबकि अन्य क्लीनिकों से कागजात की मांग की गई है, जिन क्लीनिकों के कागजात सही पाए गए, उसमें श्याम क्लीनिक के डॉ. मिथिलेश कुमार और गणपति लाइफ केयर के डॉ. सुमित कुमार सिन्हा शामिल हैं।
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जबकि संजीवनी क्लीनिक के डॉ. ए कुमार, मां सरस्वती क्लीनिक के डॉ. एसके राय दोनों ही अपने क्लीनिक में नहीं मिले, जिससे उनके कागजातों की जांच नहीं हो सकी। दोनों से ही क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन और डिग्री की मांग की गई है। इसके अलावे दो और अस्पतालों की जांच की गई और कागजातों की मांग की गई। जांच का दायरा बढ़ाया जाता, इससे पहले ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते क्लीनिकों में ताला लटक गया।
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इस संबंध में रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. रिशु कुमार ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में यह जानकारी मिली है कि कई ऐसे लोग हैं, जो अवैध रूप से क्लीनिक खोलकर बैठे हैं। जहां ऑपरेशन तक किए जा रहे हैं। ऐसे लोगों को 72 घंटे का समय दिया गया है। अगर वे क्लीनिक को बंद नहीं करते हैं, तो जांच का उचित कार्रवाई की जाएगी।