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Bihar: बिहार में पहली बार भोजपुरी के प्रोफेसर बने BRABU के सीनेटर, भोजपुरी भाषा को मिल सकती है नई दिशा

Fri, 27 Sep 2024 08:20 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Fri, 27 Sep 2024 08:20 PM IST
सार

Chhapra News: भोजपुरी शिक्षाविद शिवानुग्रह नारायण सिंह ने बताया कि डॉ. जयकांत सिंह की इस जीत से भोजपुरी भाषा और संस्कृति को नई पहचान मिल सकती है। उनकी विशेषज्ञता और विश्वविद्यालय में उनकी भूमिका से भोजपुरी को अकादमिक क्षेत्र में और मजबूत किया जा सकेगा।

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Bihar News: For first time, Bhojpuri professor Dr. Jaikant Singh Jai became senator of BRABU
BRABU के सीनेटर चुने गए भोजपुरी प्रोफेसर डॉ. जयकांत सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लगभग बारह वर्षों बाद बाबा साहब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर में आयोजित सीनेट चुनाव में पहली बार भोजपुरी के प्रोफेसर डॉ. जयकांत सिंह 'जय' को सीनेटर पद के लिए चुना गया है। यह उपलब्धि सारण जिले के मशरख प्रखंड निवासी डॉ. जयकांत सिंह के लिए और भोजपुरी भाषा के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में डॉ. सिंह अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री भी हैं। उनके प्रयासों से मुजफ्फरपुर विश्वविद्यालय में भोजपुरी भाषा और साहित्य के स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन की शुरुआत हुई है।

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भोजपुरी भाषा और संस्कृति के लिए मील का पत्थर
डॉ. जयकांत सिंह के सीनेटर चुने जाने से भोजपुरी साहित्यकारों, कवियों और कलाकारों में खुशी की लहर है। भोजपुरी से जुड़े साहित्यकारों और कलाकारों का मानना है कि अब सीनेटर के रूप में डॉ. सिंह का योगदान भोजपुरी अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश चंद राय सहित कई अन्य भोजपुरी भाषी प्रोफेसरों के साथ मिलकर डॉ. सिंह इस दिशा में और अधिक प्रगति कर सकते हैं। यह चुनाव भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो इसके भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक होगा।
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भोजपुरी को नई पहचान और विकास की दिशा
वरीय पत्रकार और भोजपुरी शिक्षाविद शिवानुग्रह नारायण सिंह के अनुसार, डॉ. जयकांत सिंह की इस जीत से भोजपुरी भाषा और संस्कृति को नई पहचान मिल सकती है। उनकी विशेषज्ञता और विश्वविद्यालय में उनकी भूमिका से भोजपुरी भाषा को अकादमिक क्षेत्र में और मजबूत किया जा सकेगा। इसके अलावा, विश्वविद्यालय में भोजपुरी भाषा के अध्ययन, शोध और शैक्षणिक गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं को नई दिशा मिलेगी। डॉ. सिंह के सीनेटर बनने से शिक्षा नीति में भोजपुरी के स्थान को भी सुदृढ़ करने का अवसर मिलेगा।
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भोजपुरी के हित में संभावित योगदान
डॉ. जयकांत सिंह के सीनेटर बनने के बाद उम्मीद की जा रही है कि वह भोजपुरी भाषा और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही, विश्वविद्यालय में भोजपुरी भाषाई कार्यक्रमों और शोध को बढ़ावा देकर स्थानीय संस्कृति को और मजबूत कर सकते हैं। उनके निर्वाचित होने के बाद सारण जिले से जुड़े कई भोजपुरी आंदोलन के नेताओं, साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने उन्हें बधाई दी। प्रमुख बधाई देने वालों में डॉ. महामाया प्रसाद विनोद, डॉ. पृथ्वी राज सिंह, शिवानुग्रह नारायण सिंह, डॉ. ओमप्रकाश राजापुरी और अन्य प्रमुख व्यक्ति शामिल रहे।

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