Bihar Election : 124 साल की वोटर मिंता देवी तक पहुंचा 'अमर उजाला', प्रियंका गांधी ने क्या उठाया था सवाल
124 Year Old Voter in Bihar : बिहार की एक वोटर का नाम वोटर लिस्ट में देखकर कांग्रेस दिल्ली में आंदोलन कर रही। 124 साल उम्र देखकर इन्हें फर्जी बताया गया। 'अमर उजाला' ने देखा कि यह महिला जिंदा है। पुराना ईपिक भी पास में है।
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124 साल की महिला वोटर! बिहार में मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण की ड्राफ्ट कॉपी में आए इस नाम को देखकर कांग्रेस ने हंगामा खड़ा कर दिया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी खुद कमान संभालकर मिंता देवी की तस्वीर लगी टीशर्ट पहनकर दिल्ली में प्रदर्शन करती नजर आईं। कांग्रेस नेताओं ने मिंता देवी को फर्जी वोटर करार देते हुए चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को फिर सवालों में घेरा। ऐसे में 'अमर उजाला' ने सीवान के दरौंदा में मिंता देवी को ढूंढ़ा। वह जीवित हैं। फर्जी नहीं हैं। बस, विशेष गहन पुनरीक्षण में बीएलओ ने इनका विवरण गलत कर दिया है। मिंता देवी शादीशुदा हैं। 35 साल की हैं। पहले से वोटर रही हैं छपरा में, यानी मायके में। ससुराल में पहली बार वोटर बनीं तो उम्र गलत चढ़ गया।
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में सीवान जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र निवासी मिंता देवी की उम्र 124 साल दिखाई गई। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया के लिए अगस्त का पूरा महीना देते हुए राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं से दावा-आपत्ति की मांग की गई है। अबतक किसी राजनीतिक दल ने कहीं एक भी लिखित आपत्ति दर्ज नहीं कराई है। मौखिक आपत्तियों का सिलसिला प्रदर्शन के रूप में चल रहा है। इसी सिलसिले में सीवान के सिसवा कला अर्जनिया गांव निवासी मिंता देवी अचानक सुर्खियों में आ गईं। कांग्रेस नेताओं के साथ प्रियंका गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में सभी ने मिंता देवी की तस्वीर वाली टीशर्ट पहन रखी है। कांग्रेस सांसदों ने मिंता देवी को फर्जी वोटर करार दिया। इसे वोट चोरी और हेरफेरी का मामला बताते हुए चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण को साजिश करार दिया।
मायके में सही जन्मतिथि से वोटर थी, ससुराल में गलत बना
मामला बिहार के सीवान का था। 'अमर उजाला' की टीम ने मौके पर जाकर पड़ता की कि 124 वर्ष की महिला जीवित है या नहीं? वोटर लिस्ट फर्जी है या नहीं? मतदाता सूची के हिसाब से बूथ का पता लगाकर उस वोटर तक पहुंचने का प्रयास किया गया। सबसे पहले उनके ससुर से मुलाकात हुई। वह खुद ही अधेड़ हैं। जाहिर तौर पर उनकी बहू तो कम उम्र होंगी ही। वोटर कार्ड निकाला। मिंता देवी से मुलाकात कराई। पुराने वोटर कार्ड में 1990 की जन्मतिथि थी। वह मायके, छपरा का था। आधार कार्ड में 1990 ही है। ऐसे में 'अमर उजाला' ने समझने का प्रयास किया कि गलती हुई कहां है? क्या विशेष गहन पुनरीक्षण में? तो जवाब मिला ससुराल में जब मतदाता का ट्रांसफर कराया गया तो जब वोटर कार्ड बना, उसमें मिंता देवी की जन्मतिथि 1900 है। इस हिसाब से वह 2024 में 124 साल की दिखाई जा रही होंगी और निश्चित तौर पर लोकसभा चुनाव के समय भी यही उम्र मतदाता सूची में थी।
पुनरीक्षण से पहले का वोटर कार्ड, बीएलओ ने जांच ही नहीं की
अब पुनरीक्षण में सुधार क्यों नहीं हुआ? इस सवाल का जवाब भी मिला। दरअसल, 'अमर उजाला' ने विशेष गहन पुनरीक्षण के समय सबसे पहले यह खुलासा किया था कि बीएलओ बगैर निरीक्षण किए ही फॉर्म खुद साइन कर रहे हैं। इस केस में भी यही हुआ था। ससुर से बातचीत में बताया कि हमारे यहां कोई फॉर्म भरने नहीं आया था। एक जगह गांव में बीएलओ कहीं बैठ गया था और पुराने कागज पर ही जो मर्जी, भरता चला गया।
(इनपुट- इमरोज अहमद, सीवान)