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Bihar: पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह तक पहुंची गुहार, भारतीय दूतावास ने कंबोडिया में फंसे 14 युवकों को रिहा कराया
Sat, 20 Jul 2024 07:05 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sat, 20 Jul 2024 07:05 PM IST
सार
UP-Bihar Youth Held Hostage In Cambodia: पीड़ित युवकों का कहना है कि उन्हें कई-कई दिनों तक भूखा रखा जाता था। उन्होंने कंपनी का विरोध किया तो कंपनी द्वारा उन्हें स्थानीय पुलिस से मिलकर जेल में भेज दिया गया। सभी ने पीएम मोदी और गृह मंत्री से वतन वापसी की गुहार लगाई थी।
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वीडियो मैसेज भेजकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांगी मदद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कंबोडिया की एक कंपनी में भारतीय युवकों को बंधक बनाने के मामले में भारतीय दूतावास नोम पेन्ह, कंबोडिया ने कंबोडियाई अधिकारियों की मदद से साइबर अपराध घोटाले में फंसे 14 भारतीय नागरिकों को रिहा करा लिया है। अब कंबोडियाई पक्ष उनकी देखभाल कर रहा है। उनकी भारत वापसी के लिए दूतावास प्रयास कर रहा है।
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गोपालगंज जिले के थावे निवासी युवक भोला चौहान सहित दस से ज्यादा युवकों को कंबोडिया में एक कंपनी ने बंधक बना लिया था। भोला चौहान के अलावा यूपी, बिहार के करीब 10 से 12 युवक वहां पर बंधक बनाए गए थे। एजेंट द्वारा इन युवकों को कंबोडिया में कॉल सेंटर में काम करने और डाटा एंट्री के ऑपरेटर के पद पर नौकरी दिलाने का बहाना बनाकर भेजा गया था। बंधक बने इन युवकों ने अपना वीडियो मैसेज भेज कर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से वतन वापसी की गुहार लगाई थी।
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गोपालगंज जिले के थावे प्रखंड के चनावे के रहने वाले भोला चौहान के रिश्तेदार झूलन प्रसाद ने बताया कि डेढ़ महीने पहले उनके रिश्तेदार भोला चौहान को कंबोडिया भेजा गया था। उन्होंने बताया कि सीवान के तरवारा के रहने वाले एजेंट रोहित चौहान ने उनके रिश्तेदार को लाखों रुपये लेकर डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद और कॉल सेंटर में काम करने के बहाने कंबोडिया भेजा था। लेकिन वहां पर कंपनी ने उन्हें बंधक बना लिया।
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भोला चौहान के अलावा बिहार यूपी के दस से ज्यादा युवकों को यहां बंधक बनाया गया। इन युवकों को एक कमरे में बंद कर दिया गया। पीड़ित युवकों ने वीडियो मैसेज भेजकर वतन वापसी की गुहार लगाई। वीडियो मैसेस में पीड़ित युवकों ने बताया कि उन्हें कंबोडिया में डाटा एंट्री ऑपरेटर और कॉल सेंटर में काम करने के लिए बुलाया गया था। एक डेढ़ महीने के लिए उनको ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के बाद जब उन्होंने काम करने का दबाव बनाया तो कंपनी ने सभी युवकों को एक छोटे से कमरे में बंद कर दिया। इन युवकों को खाने के नाम पर सिर्फ ब्रेड के दो टुकड़े दिए जाते रहे।
पीड़ित युवकों का कहना है कि उन्हें कई-कई दिनों तक भूखा रखा जाता था। उन्होंने कंपनी का विरोध किया तो कंपनी द्वारा उन्हें स्थानीय पुलिस से मिलकर जेल में भेज दिया गया। इन लोगों ने पीएम मोदी और गृह मंत्री से वतन वापसी की गुहार लगाई है। बंधक युवकों में एक युवक गोपालगंज के थावे प्रखंड के चानावे गांव के रहने वाला है, जबकि कुछ युवक सीवान और कुछ युवक यूपी के कठकुइया के रहने वाले हैं।