Bihar: स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में गार्ड दे रहे मरीज को इंजेक्शन व स्लाइन, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
Bihar: सिविल सर्जन श्रीनिवास प्रसाद से सवाल किया गया तो उन्होंने स्टाफ की भारी कमी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण गार्ड को ही प्रशिक्षित कर किसी तरह से काम चलाया जा रहा है।
विस्तार
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के गृह जिले का स्वास्थ्य तंत्र भगवान भरोसे चलता नजर आ रहा है। ताजा मामला मैरवा रेफरल अस्पताल का है, जहां सुरक्षा में तैनात गार्ड मरीजों को इंजेक्शन और स्लाइन चढ़ा रहे हैं। घटना के अनुसार, घायल अवस्था में इलाज कराने पहुंचे एक मरीज को डॉक्टर ने इंजेक्शन और ड्रिप लिखी। लापरवाही का आलम यह रहा कि इंजेक्शन लगाने का जिम्मा अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात एएनएम ने गार्ड को सौंप दिया। एएनएम ने सिरिंज में इंजेक्शन भरकर गार्ड के हाथ थमा दिया और गार्ड ने बिना हिचक मरीज के हाथ में इंजेक्शन लगा दिया। घायल मरीज ने समझा कि शायद यह कोई कंपाउंडर है जो नई ड्रेस में आया है। बाद में जब परिजनों ने देखा तो हंगामा मच गया और मामला सामने आ गया।
एक हफ्ते पहले भी हुई थी बड़ी गलती
गौरतलब है कि यही अस्पताल पहले भी अपनी लापरवाही के लिए सुर्खियों में रहा है। करीब एक हफ्ते पहले यहां खांसी से पीड़ित एक मरीज को कुत्ते के काटने का इंजेक्शन लगा दिया गया था। मामला उजागर होने पर डॉक्टर ने सार्वजनिक तौर पर अपनी गलती मानी थी। लेकिन अभी उस घटना की स्याही सूखी भी नहीं थी कि अस्पताल में गार्ड द्वारा मरीजों को इंजेक्शन और स्लाइन चढ़ाने का मामला सामने आ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब मरीजों की जान यहां सस्ती हो गई है। सवाल उठ रहा है कि आखिर गार्ड कब से मरीजों का इलाज करने लगे और स्वास्थ्य विभाग इस पर कब तक चुप्पी साधे रहेगा।
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क्या कहते हैं अधिकारी
इस पूरे मामले पर जब सिविल सर्जन श्रीनिवास प्रसाद से सवाल किया गया तो उन्होंने स्टाफ की भारी कमी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण गार्ड को ही प्रशिक्षित कर किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। अधिकारियों का यह बयान सुनकर आम लोग और भी हतप्रभ हैं। लोगों का कहना है कि जब स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले का हाल यह है तो प्रदेश के अन्य जिलों की हालत का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।