नीतीश सरकार ने की विशेष ट्रेन चलाने की मांग, तेजस्वी ने नीतीश को घेरा
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बिहार सरकार ने लॉकडाउन के चलते देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे बिहार के मजदूरों और छात्रों को वापस लाने के लिए विशेष ट्रेन चलाने की मांग की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को प्रवासियों को लाने की तैयारियों और स्थिति को लेकर अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। सरकार द्वारा राज्य के लोगों को वापस लाने की अनुमति संबंधी दिशा-निर्देश जारी होने के बाद बिहार सरकार ने साफ कह दिया है कि बसों से लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से वापस ला पाना संभव नहीं है।
मंत्री संजय झा ने कहा है कि बड़ी संख्या में राज्य के प्रवासी कामगार और छात्र दूसरे प्रदेशों में फंसे हुए हैं। हमने केंद्र सरकार से विशेष ट्रेन चलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि बसों से इन लोगों को लाया जाएगा तो केवल एक तिहाई ही राज्य तक पहुंच पाएंगे। राज्य के लोग महाराष्ट्र, तमिलनाडु और अन्य जगहों पर फंसे हुए हैं। उन्हें सकुशल वापस लाना जरूरी है।
दूसरी तरफ, प्रवासी कामगारों के मुद्दे पर बिहार में राजनीति जारी है। नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि अगर बिहार सरकार के पास प्रवासी मजदूरों और छात्रों को लाने के लिए संसाधन कम पड़ रहे हैं तो वह उनसे संपर्क करें। उन्होंने कहा कि वे बिहारियों को वापस लाने के लिए राज्य सरकार को दो हजार बसें देने को तैयार हैं।
तेजस्वी के साथ-साथ उनके पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी इस मुद्दे पर सीएम नीतीश को घेरा। लालू ने नीतीश का नाम लिए बिना ही इशारों-इशारों में कहा है कि आज उनका वक्त है, कल जनता जरूर जवाब देगी।
बसें ले लीजिए, भले इसका श्रेय भी आप ले लीजिए: तेजस्वी
तेजस्वी ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, 'बिहार सरकार ने असमर्थता जताते हुए कहा है कि बाहर फंसे मजदूरों को वापस लाने के लिए सरकार के पास बसें नहीं है। हम सरकार को 2000 बसें सुपुर्द करने के लिए तैयार है। वो नोडल और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में इन बसों का प्रयोग कर सकते है। बसें पटना में कब भेजनी है। बताया जाए।'
उन्होंने कहा, 'विगत 15 सालों से सत्ता से चिपके असमर्थ-असहाय लोग कहते है कि बिहार सरकार के पास मात्र 500-600 बसें है। हम आपको गरीब मजदूरों की मदद के लिए उससे तीन गुना अधिक बस सौंप रहे है। आप इन बसों का अपनी निगरानी में गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए प्रयोग कीजिए।'
आरजेडी नेता ने कहा, 'माननीय मुख्यमंत्री जी, विपक्ष सरकार को 2000 बस दे रहा है। बसें ले लीजिए और हमारे गरीब बिहारी भाइयों को ले आइए। भले इसका श्रेय भी आप ले लीजिए। हमें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन कृपया कर के तत्काल प्रभाव से कुछ कीजिए। कितना सोचेंगे। ये सोचने का समय नहीं कर्तव्य करने का समय है।'
बिहार में मात्र 600 बसें, लेकिन विज्ञापन पर 500 करोड़ का खर्च
तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा, '15 सालों की नीतीश-भाजपा सरकार के पास बिहार में मात्र 600 बसें है। मगर सरकार का विज्ञापन खर्च 500 करोड़ है। हमने मजदूरों को वापस लाने के लिए सरकार को शुरू में 2000 बसों की सहायता प्रदान की है। लेकिन अहंकारी सरकार को बस मीडिया मैनेजमेंट के दम पर ही सारी जंग जीतनी है।'
उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'नीतीश सरकार सृजन और शौचालय समेत 55 घोटाले कर प्रदेश का लाखों-करोड़ रुपये अब तक हजम कर चुकी है। हर वर्ष मानव शृंखला की नौटंकी और ऊपर से उसकी दर्जनों हेलिकॉप्टरों द्वारा फोटोग्राफी पर करोड़ों खर्च करती है। बिहार जैसे गरीब प्रदेश का विज्ञापन पर 500 करोड़ का खर्च है।'
आरजेडी नेता ने कहा, 'यह सरकार कथित जल-जीवन हरियाली के नाम 24500 करोड़ खर्च करती है लेकिन लगभग 40 लाख अप्रवासी बिहारियों के जीवन की कोई चिंता नहीं। सरकार के 15 साल के कथित विकास का भांडा फूट चुका है। इनका सुशासनी दोहरापन उजागर हो चुका है।'