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नीतीश अपनी नहीं बल्कि भाजपा को मलाई की तरह बिहार की सत्ता सौंपने की भड़ास निकाल रहे थे: शिवानंद तिवारी

Sat, 28 Nov 2020 01:39 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 28 Nov 2020 01:39 PM IST
सार

  • कोई भी अपने दोस्त के साथ नीतीश जैसा व्यवहार करता है?
  • लालू के स्तर वाले नेता कभी नहीं रहे नीतीश कुमार
  • नीतीश के 1977 में चुनाव हारने के बाद मैंने युवा जनता दल का अध्यक्ष बनवाया था

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RJD leader Shivanand Tiwari said, frustration of Chief Minister Nitish Kumar was speaking in the assembly
शिवानंद तिवारी - फोटो : ANI (File)

विस्तार

राष्ट्रीय जनता दल के शिवानंद तिवारी, शरद यादव, लालू और नीतीश के दौर के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। शिवानंद इस समय बिहार के उन नेताओं में हैं, जिन्हें इन तिकड़ी का इतिहास भूगोल पता है। एक समय छात्र राजनीति में शिवानंद तिवारी बाबा के संबोधन से जाने जाते थे और लालू, नीतीश, सुशील मोदी जैसे छात्र नेताओं के गुरु की भूमिका में हुआ करते थे।

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अमर उजाला से विशेष बातचीत में शिवानंद तिवारी ने कहा कि विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं बोल रहे थे, बल्कि उनकी कुंठा  बोल रही थी। नीतीश कुमार इतनी जल्दी आपा खो देने वाले नेताओं में नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से भाजपा ने उनका इस्तेमाल करके बिहार में अपनी महत्वाकांक्षा को साकार रूप दिया है, नीतीश उसी की भड़ास निकाल रहे थे।

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कोई अपने दोस्त के साथ नीतीश जैसा व्यवहार करता है?

शिवानंद तिवारी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस लाइन (तेजस्वी यादव दोस्त का बेटा है, इसलिए चुप रहता हूं) पर भी तंज कसा। शिवानंद ने कहा कि क्या कोई अपने दोस्त के साथ नीतीश कुमार जैसा व्यवहार करता है? वह बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए जो भाषा बोल रहे थे, वह कोई दोस्त बोलता है क्या? वह तो कल विधानसभा में गलत दावे कर रहे थे। कह रहे थे लालू प्रसाद को सदन का नेता उन्होंने बनवाया। तेजस्वी यादव को डिप्टी सीएम उन्होंने (नीतीश) बनवाया। मैं पूछता हूं कि क्या कभी भी नीतीश कुमार लालू यादव से बड़े नेता रहे हैं? उस समय उनकी हैसियत ही क्या थी? वह केवल एक अच्छे मैनेजर रहे हैं, नेता नहीं।

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लालू प्रसाद यादव छात्र जीवन से ही नेतागिरी में उनसे बहुत आगे रहे हैं। वह छात्र संघ अध्यक्ष और जेपी आंदोलन के नेता रहे हैं। बाद में लालू प्रसाद यादव ने बिहार की राजनीति में अपनी जगह अपने दम पर बनाई। शिवानंद का कहना है कि लालू यादव को विधायक दल का नेता बनवाने में शरद यादव की भूमिका को माना जा सकता है। यह दावा शरद यादव कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा ओछापन नहीं दिखाया। नीतीश को 1977 का चुनाव हारने के बाद युवा जनता दल का अध्यक्ष मैंने बनवाया था और तब अखबारों में छपता था कि शिवानंद गुट के नीतीश कुमार युवा जनता दल के अध्यक्ष बने। नीतीश इसी परिचय से जाने गए।

जब सत्ता की जरूरत थी तो चले आए...महत्वाकांक्षा जागी तो बगावत कर ली

राष्ट्रीय जनता दल के एक अन्य नेता ने कहा कि विधानसभा की बातों पर वह टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन नीतीश का दावा तो उनके व्यक्तित्व का बहुत खराब चित्रण कर रहा है। सूत्र का कहना है कि 90 के दशक में नीतीश लालू की नाक के बाल थे। महत्वाकांक्षा जागी तो धोखा देकर बगावत कर गए। वह कहते हैं कि नीतीश धोखा दे रहे थे और लालू को आखिरी समय तक ऐसा किए जाने का भरोसा नहीं हो रहा था। बाद में 2012 में नीतीश ने यही धोखा भाजपा को दिया, जब अलग हुए। 2015 के चुनाव में उसी लालू के गले मिल गए, महागठबंधन में आ गए। उससे पहले जीतन राम मांझी को सीएम बनवाया, इस्तेमाल किया, धोखा दिया और उतारा, खुद सीएम बन गए।

महागठबंधन चुनाव जीत गया, उन्हें लालू प्रसाद ने मुख्यमंत्री स्वीकार किया, बदले में तेजस्वी यादव राजद कोटे से डिप्टी सीएम बने थे। राजद सबसे बड़ा दल था। नीतीश कुमार सत्ता और अपना सम्मान बचाने के लिए आए थे और फिर धोखा देकर 2017 में भाजपा में चले गए। उनकी विश्वसनीयता कहां रह गई। यही धोखा शरद यादव के साथ किया। अब उनको उन्हीं की भाषा में भाजपा ने छला है। उनका (नीतीश) यह दर्द उन्ही से सहन नहीं हो पा रहा है। 

भड़ास निकाल रहे हैं नीतीश कुमार

शिवानंद तिवारी ने कहा कि मैं भड़ास क्यों कह रहा हूं, समझिए। नीतीश कुमार की पार्टी के विधायक भाजपा से संख्या में काफी कम और तीसरे नंबर पर हैं। चुनाव के दौरान लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने जमकर नीतीश कुमार की मुखालफत की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत पार्टी ने इस पर कोई बड़ा बयान नहीं दिया। चुनाव के बाद भाजपा नीतीश कुमार को अपने रिमोट से चलाएगी। यह उन्हें दिखने लगा है। जिस तरीके से भाजपा ने दो डिप्टी सीएम बनवाए, विधानसभा अध्यक्ष का पद लिया, वह आगे की राजनीति को लेकर बहुत कुछ कह रहा है। शिवानंद का कहना है कि वह नीतीश कुमार को जानते हैं। नीतीश कुमार को लग रहा है कि वह बड़ा अपराध कर रहे हैं। अपने हाथों से बिहार की राजनीतिक सत्ता को वह सांप्रदायिकता की राजनीति करने वाली भाजपा को मलाई की तरह सौंप रहे हैं। शिवानंद का कहना है कि बिहार की राजनीतिक जमीन और सत्ता पाना भाजपा का सपना है। बिहार आंदोलन की भूमि है। चाहे 1857 का स्वतंत्रता संग्राम हो या गांधी जी का चंपारण से शुरू हुआ तप। जेपी आंदोलन हो या अन्य। यह राम मनोहर लोहिया की कर्म भूमि भी रही है। अब इस विचारधारा से निकले नीतीश को आखिर कैसे यह हजम होगा?

विधानसभा में भड़ास तो एक बहाना था

राजद के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि आप देखिए, चुनाव के बाद दिल्ली में भाजपा ने कितना बड़ा जश्न मनाया। पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी छवि को चला गया? अब इसे नीतीश के लिए तो सहन करना मुश्किल है। विधानसभा में नीतीश के भड़कने से भी भाजपा के अंदरखाने में उत्साह बढ़ा ही होगा। इसलिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सवाल उठाते ही राजनीति की मैनजरी में परिपक्व नीतीश कुमार आग बबूला हो गए। आम तौर पर उनका यह स्वभाव नहीं है, लेकिन इसलिए उनके भीतर चिराग पासवान से लेकर भाजपा तक से मिला दर्द दूसरा बहाना ढूंढकर सामने आ गया। उनका यह अपराध बोध भी कि भाजपा अब बिहार में उनका उपयोग करके राज करने की रणनीति में सफल हो सकती है।

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