Rajya Sabha Election: कांग्रेस के यह विधायक पहुंच से बाहर! बिहार के राज्यसभा चुनाव में हो गया खेला?
महागठबंधन पांचवीं सीट पर अपनी जीत का दावा ठोक रहा है। तेजस्वी यादव आज विधानसभा वोटिंग करने पहुंचे तो उन्होंने दावा किया कि हमारे उम्मीदवार की जीत तय है। 41 विधायकों का समर्थन हमारे पास है। नेता प्रतिपक्ष के दावे के बीच कांग्रेस के तीन विधायक ट्रेसलेस हो गए। इससे सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है।
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आज राज्यसभा चुनाव है। पांच सीटों के लिए विधानसभा में वोटिंग होगी। महागठबंधन और एनडीए के विधायक पांचवीं सीट पर अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। इन सब के बीच कांग्रेस के तीन विधायक पहुंच से बाहर हो गए हैं। इतना ही नहीं राजद के भी एक विधायक मतदान के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे। चारों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। एनडीए के कुछ नेता पहले से दावा कर रहे थे कि विपक्ष के कुछ विधायक हमारे संपर्क में हैं। ऐसे में अचानक चारों विधायकों के गायब होने से राजनीतिक गलियारे में तरह-तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। फारबिसगंज, मनिहारी और वाल्मीकिनगर और ढाका के विधायक के मोबाइल स्विच होने पर चर्चाओं का बाजार गर्म होने लगा है। विधानसभा में वोटिंग के लिए वोटिंग के लिए अब तक नहीं पहुंचे है।
वहीं फारबिसगंज के विधायक मनोज बिश्वास से संपर्क करने की भी कोशिश की गई तो उनका भी फोन भी स्विच ऑफ बताया जा रहा है। वहीं वाल्मीकिनगर के सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा और मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह फोन भी स्विच ऑफ बता रहा है। तीनों विधायक सुबह तक होटल नहीं पहुंचे थे। यहीं पर महागठबंधन के सभी विधायकों को ठहराया गया था। इतना ही नहीं यह तीनों सोमवार दोपहर खबर अपडेट होने तक तक विधानसभा भी वोट डालने नहीं पहुंचे। इधर, राजद विधायक फैसल रहमान भी गायब होने से महागठबंधन की टेंशन बढ़ गई है। इस मामले में कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। चर्चा तो यह भी हो रही है कि यह विधायक कांग्रेस का हाथ छोड़ देंगे।
मनोज बिश्वास ने दो पार्टियाें के बाद कांग्रेस को कब किया ज्वाइन?
सीमांचल के जिले अररिया की फारबिसगंज सीट से विधायक चुने गए मनोज बिश्वास 2009 से राजनीति में हैं। आधार नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड का रहा है, हालांकि वह राजद में भी रहे हैं। वह पहली बार 2010 में जदयू के प्रखंड युवा अध्यक्ष बने। 2012 में जदयू में सक्रिय हुए। 2017-18 में जदयू के प्रदेश अति पिछड़ा सचिव बन कर रहे। फिर, 2019 में राजद से जुड़ गए और वहां अतिपिछड़ा प्रदेश महासचिव बने। वर्ष 2023 से 2025 के चुनाव से कुछ दिन पहले तक वह राजद के जिला प्रधान महासचिव रहे। चुनाव से कुछ दिन पहले कांग्रेस की सदस्यता ली और फारबिसगंज विधानसभा से 221 मतों से जीत हासिल कर विधायक बने।
सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा 2024 में कांग्रेस में शामिल हुए थे
नेपाल से सटे पश्चिम चंपारण जिले की वाल्मीकिनगर सीट से विधायक चुने गए सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने 2024 में कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके पहले वह उपेंद्र कुशवाहा की तत्कालीन पार्टी- राष्ट्रीय लोक समता पार्टी से जुड़े थे। 2015 में कुशवाहा की पार्टी से चुनाव में उतरे तो तीसरे नंबर पर रहे थे। 2025 के चुनाव में वह 1675 मतों से जीत दर्ज कर सके।
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मनोहर प्रसाद सिंह पुलिस सेवा से इस दल के रास्ते राजनीति में आए थे
कटिहार जिले की मनिहारी विधानसभा सीट से मनोहर प्रसाद सिंह कांग्रेस 15168 मतों के अंतर से जीते हैं। राजनीति में इनका भी आधार नीतीश कुमार पार्टी जनता दल यूनाईटेड का रहा है। भागलपुर जिले के मूल निवासी मनोहर प्रसाद सिंह वर्ष 2009 में डीआईजी पद से सेवानिवृति के बाद आवासीय जमीन खरीदकर मनिहारी नगर क्षेत्र में बस गए। मनिहारी विधानसभा क्षेत्र को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाने के लिए वर्ष 2010 में जदयू का दामन थामा। जदयू से मनिहारी विधानसभा चुनाव का टिकट मिला तो एनसीपी प्रत्याशी गीता किस्कू को हराया। वर्ष 2015 में जदयू महागठबंधन में था, तब यह सीट कांग्रेस को चली गई। तब वह कांग्रेस से प्रत्याशी बने। उस बार लोजपा का हराया। 2020 के चुनाव के पहले ही जदयू महागठबंधन से बाहर हो चुका था, लेकिन मनोहर सिंह कांग्रेस में ही रहे और 2020 में इन्होंने नीतीश कुमार की पार्टी के प्रत्याशी को हराया। इस बार, 2025 में भी मनोहर सिंह ने जदयू प्रत्याशी को ही हराया है।