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Satta Ka Sangram: किशनगंज के युवा बोले- जाति-बिरादरी और मंदिर-मस्जिद के नाम पर मतदान करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण

Fri, 19 Apr 2024 01:03 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंज Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Fri, 19 Apr 2024 01:03 PM IST
सार

Kishanganj Lok Sabha Seat: अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ शुक्रवार को किशनगंज लोकसभा क्षेत्र में युवाओं के बीच पहुंचा। जहां वे इस लोकसभा सीट का सियासी मूड अपनी-अपनी तरह से बता रहे हैं। साथ युवाओं ने बताया कि वे किन मुद्दों पर मतदान करेंगे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...।
 

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Lok Sabha Chunav 2024: Satta Ka Sangram in Kishanganj, Discussion with youth, Kishanganj Lok Sabha Seat
युवाओं से चर्चा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' शुक्रवार को बिहार के किशनगंज पहुंचा। यहां हमने सुबह चाय पर चर्चा की। वहीं अब दोपहर में युवाओं के बीच पहुंचे हैं। अमर उजाला से बातचीत के दौरान किशनगंज लोकसभा क्षेत्र के युवा मतदान को लेकर अपनी समस्याएं, अपने मुद्दे और अपनी महत्वाकांक्षाएं साझा कर रहे हैं।

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'युवा तो बिल्कुल पस्त हैं'
इंजीनियर मो. मसूद आलम ने बताया कि यहां पर युवाओं के लिए अब तक कुछ हुआ नहीं है। बिल्कुल भी न कहीं रोजगार-इंडस्ट्री लगी है। यहां तक कि युवाओं के लिए न कोई ढंग का कॉलेज है, न यूनिवर्सिटी है और न मेडिकल कॉलेज है। इस तरह की व्यवस्था अब तक हुई नहीं है। यहां के युवा तो बिल्कुल पस्त हैं। यह कह लीजिए कि यहां युवा पलायन करके दूसरे राज्य में जा रहा है। यहां के माननीय सांसद ने युवाओं के लिए कुछ किया नहीं है। हम लोग चाहते हैं कि बदलाव हो।
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'यहां के नेता नहीं चाहते कि युवा पढ़े'
एक अन्य युवा एंजेल कुमार ने बताया कि यहां का युवा सबसे पहले चाहता है कि अच्छी शिक्षा हो। इस जिले में कुल चार कॉलेज हैं, जिनमें से दो सरकारी हैं और दो अर्ध सरकारी हैं। हमारे सामने ही है मारवाड़ी कॉलेज, जिसका हाल बेहाल है। लगभग 1960 में इसकी स्थापना की गई थी। आज तक सुचारु रूप से कोई भी सेशन, कोई भी क्लास नहीं करवाई जाती है, क्योंकि यहां पर अभी तक अच्छे शिक्षकों की बहाली नहीं हुई है। इसकी वजह से कुछ लोग बाहर जा रहे हैं पढ़ने के लिए। कुछ लोग जिनकी पढ़ाई नहीं हो रही है तो वे बाहर काम करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा न मिलने से यहां का युवा ध्वस्त है। एंजेल कुमार ने आरोप लगाया कि यहां का कोई नेता नहीं चाहता है कि युवा पढ़े। अगर यहां का युवा पढ़ लेगा, शिक्षित हो जाएगा तो वह समझ जाएगा कि किनको वोट देना है।

'एक अच्छा नेता चुनना भी हमारा अधिकार है'
वहीं, इंजीनियर सुभाष सिंह ने बताया कि पलायन करना मजदूरों के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है, क्योंकि फैक्टरी नहीं हैं। इसी कारण पलायन हो रहा है और भी कई वजहें हैं। युवाओं को चाहिए एक अच्छा नेता, जो नेतृत्व करने का तरीका सही हो। यहां के युवाओं का एक डायवर्ट मोबिलाइजेशन इसलिए है, क्योंकि यहां का नेता सीधा केंद्र की बात करता है। हम कहते हैं कि सिर्फ युवा होने के नाते हमारा वोट देने का अधिकार नहीं हैं। हमें संविधान में हर तरह के अधिकर दिए गए हैं। इसलिए एक अच्छा नेता चुनने का भी हमारा अधिकार है। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव का वक्त आता है तो ये लोग (युवा) चाहे वह किसी भी दल और जाति-बिरादरी और धर्म से हों, उस समय वह जाति-बिरादरी के हिसाब से वोट करता है, मंदिर-मस्जिद के नाम से वोट करता है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम पढ़े-लिखे युवा होने के बाद भी सही लीडर नहीं चुन पाते हैं, इसका कारण क्या है।


'चुनाव के वक्त विकास के मुद्दे से भटका दिया जाता है'
सुभाष ने आगे कहा कि यहां के सांसद, विधायक या मंत्री हों, उनके बेटे तो बाहर जाकर पढ़ाई कर लेंगे। लेकिन हम मिडिल क्लास जो हैं, उन्हें अच्छी शिक्षा और अच्छी फैसिलिटीज नहीं मिल पाती, जिसकी वजह से हम लोग अपने घर परिवार का जो सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर बने और एक अच्छा नेता भी बने। ऐसा नहीं कि सिर्फ पैसे वाले और पूंजीपति लोग ही समाज का नेतृत्व करें। हमारा भी अधिकार है एक नेता बनने का, डॉक्टर बनने का और इंजीनियर बनने का। लेकिन चुनाव के वक्त एक ऐसा माहौल उत्पन्न किया जाता है, जिससे विकास का मुद्दा बिल्कुल खत्म हो जाता है और उस समय जाति, मंदिर-मस्जिद के नाम पर वोट डाला जाता है। हम किसी राजनीतिक पार्टी का स्टैंड नहीं ले रहे। हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि सामान्य तौर पर हम युवा होने के नाते हमारे क्या अधिकार हैं, हमें किसको वोट देना है। ताकि कल को हमारी आवाज केंद्र में पहुंचे।

'कॉलेज में हॉस्टल और प्रोफेसर नहीं हैं'
वहीं, सोनाली ने कहा कि हमारे कॉलेज में लड़कियों के लिए कुछ ज्यादा सुविधा तो है नहीं। जैसे कि यहां गर्ल हॉस्टल होना चाहिए था। जो लड़कियां दूर से आती हैं, वे यहां रहकर पढ़ाई कर सकती थीं। जिसका घर दूर है वह कॉलेज आ नहीं पाती है तो उसकी हाजिरी पूरी नहीं हो पाती है। कॉलेज में 75 प्रतिशत हाजिरी न होने पर रजिस्ट्रेशन रोक दिया जाता है। इसके अलावा यहां एक ही विषय एमजीसी की पढ़ाई होती है, जबकि अन्य विषयों की पढ़ाई प्रोफेसर के अभाव में नहीं हो रही है। हम यही चाहते हैं कि सारे विषयों के शिक्षक यहां पर हों ताकि लड़कियों की और आगे की पढ़ाई हो सके। इनके साथ ही रिमझिम कुमारी और पलक कुमारी ने भी पढ़ाई और कॉलेज में सुविधाएं दिए जाने की बात कही।
 

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