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Prashant Kishore: 'गांधी-गोडसे साथ नहीं चल सकते', नीतीश पर प्रशांत किशोर ने चुन-चुनकर चलाए तीर

Tue, 18 Feb 2020 01:31 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: देव कश्यप Updated Tue, 18 Feb 2020 01:31 PM IST
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Prashant Kishore News: Prashant Kishore Launch Campaign 'Baat Bihar Ki' Against CM Nitish Kumar
प्रशांत किशोर - फोटो : ANI

दिल्ली में केजरीवाल सरकार को प्रचंड बहुमत से सत्ता में वापसी कराकर अपनी रणनीति का लोहा मनवा चुके प्रशांत किशोर मंगलवार को पटना में प्रेस कांफ्रेंस किया। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने एक तरफ जहां नीतीश कुमार के कई कामों की सराहना की वहीं बिहार के विकास को लेकर विजन की कमी होने पर भड़के भी। प्रशांत ने नीतीश से साथ अपने संबंधों का खुलासा करते हुए उन्हें पितातुल्य बताया। कहा कि उनसे मेरा राजनीतिक संबंध नहीं है। उन्होंने मुझे बेटे की तरह रखा। उनसे मेरा सिर्फ वैचारिक मतभेद है।

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उन्होंने कहा कि वह नीतीश के हर फैसले को स्वीकार करते हैं। उस पर कोई टीका-टिप्पणी नहीं करेंगे। लेकिन उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि गांधी और गोडसे साथ नहीं चल सकते हैं। पत्रकारों से बातचीत में प्रशांत किशोर ने बड़ा एलान करते हुए 20 फरवरी से 'बात बिहार की' नाम से कार्यक्रम शुरू करने का एलान किया।
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नीतीश से सिर्फ वैचारिक मतभेद
प्रशांत ने कहा कि नीतीश जी कहते रहे हैं कि वे गांधी, जेपी और लोहिया की बातें नहीं छोड़ सकते तो ऐसे में भाजपा के साथ खड़े होना ठीक है। गांधी और गोडसे की विचारधारा एक साथ नहीं चल सकती। बिहार में जदयू की स्थिति को लेकर मतभेद हुए। भाजपा और जदयू का 15 साल से संबंध है। हम ऐसा नेता चाहते हैं जो सशक्त हो किसी का पिछलग्गू न हो। कुछ लोग कहते हैं कि बिहार के विकास के लिए मूल बातों पर समझौता करना पड़े, तो कोई गुरेज नहीं होना चाहिए। आपको देखना चाहिए कि क्या इस गठबंधन से बिहार का विकास हो रहा है।
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गांधी और गोडसे एक साथ नहीं चल सकते
प्रशांत किशोर ने जेडीयू और बीजेपी के गठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कि गांधी और गोडसे एक साथ नहीं चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 15 सालों में बिहार में बहुत विकास हुआ है लेकिन ऐसा विकास नहीं हुआ है जिससे बिहार की स्थिति में अमूल-चूल बदलाव आया है।

नीतीश 70 साल की उम्र में झूठ बोल रहे हैं
प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश ने जो भी फैसला लिया, उनके सारे फैसले को स्वीकार करता हूं। कोई विवाद टीका-टिप्पणी न ही अभी करूंगा, न ही आगे कभी करूंगा। यह उनका एकाधिकार था, आगे भी रहेगा। इस बात के लिए सम्मान है उनके प्रति सम्मान जो है वह आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार 70 साल की उम्र में झूठ बोल रहे हैं कि मुझे अमित शाह के कहने पर पार्टी में शामिल किया गया था, लेकिन मैं विरोध नहीं करूंगा अगर नीतीश जी बोल रहे हैं तो ठीक है।

हम एक  सशक्त नेता चाहते हैं पिछलग्गू नहीं
प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं भाजपा के साथ चुनाव लड़ने को लेकर सहमत नहीं हूं। आपके झुकने से भी बिहार का विकास हो रहा है, तो मुझे आपत्ति नहीं है। क्या इस गठबंधन के साथ रहने से बिहार का विकास हो रहा है, सवाल यह है। हम एक सशक्त नेता चाहते हैं, ऐसा नेता नहीं जो पिछलग्गू हो। जो बिहार के लिए खड़ा होगा, बिहार की जनता उसके साथ खड़ी होगी। प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश का विचार है कि हम पुरानी पार्टी है, ट्विटर का क्या करेंगे? मेरी सोच इससे अलग है। ट्विटर अकेले गुजरात वालों का नहीं है। गुजरात को ट्विटर हमने ही सिखाया है।

प्रशांत किशोर अब करेंगे  'बात बिहार की'
प्रशांत किशोर ने आगे की रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि मैं यहां किसी राजनीतिक पार्टी का एलान करने या किसी गठबंधन के साथ काम करने नहीं जा रहा हूं। मैं 20 फरवरी से एक नया कार्यक्रम  शुरू करने जा रहा हूं। इसका कार्यक्रम का नाम 'बात बिहार की' है। मेरा लक्ष्य सिर्फ बिहार की तस्वीर बदलना है। इस यात्रा के दौरान अगले 100 दिन तक एक करोड़ से अधिक ऐसे युवाओं से मिलेंगे जो बिहार को अग्रणी राज्यों की दौर में शामिल करना चाहते हैं। जो बिहार को अगले दस सालों में टॉप 10 राज्यों में देखना चाहते हैं।


नीतीश को विकास के लिए धन्यवाद लेकिन यह काफी नहीं
किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार कहते हैं कि उन्होंने पिछले 15 सालों में बहुत विकास किया, लेकिन फिर भी आज बिहार की स्थिति वैसी ही क्यों है। 2005 में बिहार के लोगों की प्रति व्यक्ति आय 22वें स्थान पर था आज भी वहीं है। हमें 10वें स्थान पर पहुंचना है। मैं मानता हूं कि नीतीश ने बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया, साइकिल और पोशाक बांटी, लेकिन एक अच्छी शिक्षा नहीं दे सके। मैं हर घर बिजली पहुंचाने के लिए नीतीश कुमार को धन्यवाद देता हूं। लेकिन बिजली खपत के मामलों में बिहार अब भी पिछड़ा हुआ है क्योंकि यहां के लोगों के पास एक पंखा और टीवी खरीदने के लिए पैसे नहीं है।

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