फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   prashant kishor planned nitish's won in bihar

नीतीश की जीत में ये हैं असली हीरो, मोदी भी थे इनके मुरीद

Sun, 08 Nov 2015 06:32 PM IST
Updated Sun, 08 Nov 2015 06:32 PM IST
विज्ञापन
prashant kishor planned nitish's won in bihar

लोकसभा चुनावों के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने किस कार्यक्रम से आम जनता के बीच तेजी से जगह बनाई अगर यह सवाल राजनीति की समझ रखने वाले किसी भी व्यक्ति से किया जाए तो उसका सीधा सा जवाब होगा चाय पे चर्चा।

विज्ञापन


चाय पे चर्चा ही ऐसा कार्यक्रम था जिससे मोदी ने अपनी चाय वाले की छवि को भुनाते हुए आम आदमी के दिल तक पहुंचाया। हालांकि बिहार चुनावों में महागठबंधन की जीत के शोर के बीच अगर अब इस बात का जिक्र दोबारा आए तो सुनने में पहली बार में ये बेशक अटपटा लग सकता है लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि बिहार में नीतीश कुमार की इस जीत के पीछे भी मोदी कनेक्शन ही है।
विज्ञापन


बिहार में नीतीश की जीत की राह तय करने में उसी प्रशांत किशोर का दिमाग लगा है, जिसके दिमाग से चाय पे चर्चा का आइडिया निकला था। बिहार के इसी आईटी प्रोफेशनल ने लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी के उसी प्रचार अभियान की कमान संभाली थी जिसके बारे में कहा जाता है कि देश में पहली बार चुनावों के दौरान इतने हाइटेक प्रचार का प्रयोग किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रशांत की सलाह पर नीतीश ने लपका डीएनए का मुद्दा

prashant kishor planned nitish's won in bihar

लोक स्वास्‍थ्य मामलों के विशेषज्ञ के तौर पर संयुक्त राष्ट्र में काम कर चुके प्रशांत किशोर की प्रतिभा को नीतीश कुमार अच्छी तरह पहचान चुके थे। इसलिए विधानसभा चुनावों से पूर्व ही उन्होंने बिहारी अस्मिता के नाम पर प्रशांत किशोर को अपने पाले में करने में देर नहीं की।

मोदी के लिए चाय पे चर्चा और थ्रीडी होलोग्राम जैसे हाइटेक प्रचार अभियान की शुरूआत करने वाले प्रशांत ने बिहार चुनावों के दौरान भी नीतीश के लिए उसी हाइटेक अंदाज में प्रचार की शुरूआत की। ये प्रशांत का ही तेज दिमाग था कि प्रधानमंत्री मोदी ने जब गया की रैली में नीतीश के पॉलीटिकल डीएनए पर सवाल उठाया तो उसे लपकने में प्रशांत ने जरा भी देरी नहीं की और उसे बिहारी अस्मिता से जोड़ दिया।

नीतीश ने भी उसे हाथों-हाथ मुद्दा बनाते हुए 50 लाख बिहारियों के डीएनए सैंपल प्रधानमंत्री मोदी को भेजने जैसे ‌थोडे अटपटे लगने वाले कदम का ऐलान कर दिया। लोगों को बेशक ये कदम गैरजरूरी लगा हो लेकिन इसके पीछे सीधे सीधे मंशा आम बिहारी से खुद को जोड़ने और भाजपा के सबसे बड़े सितारे प्रधामनंत्री मोदी के खिलाफ माहौल तैयार करने की थी। जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रहे।

प्रचार के मास्टर माने जाते हैं प्रशांत किशोर

prashant kishor planned nitish's won in bihar

37 साल के प्रशांत ने मोदी के प्रचार अभियान के दौरान 60 अन्य पेशेवरों के साथ मिलकर सिटिजन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG) बनाया था। जिसका मकसद मोदी के लिए वोट जुटाना और सामाजिक मुद्दों का समाधान करना था।

बिहार विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार के प्रचार के हर मोर्चे पर प्रशांत के विजन की झलक दिखाई दी। जैसे विभिन्न नारे और स्लोगन ‌लिखे बैनरों और पोस्टर। यहां तक की उनके रंग और डिजाइन पर भी इतनी बारीकी से ध्यान दिया गया कि वो उससे भी एक संदेश छोड़ते दिखें।

बताते हैं कि लोकसभा चुनावों के बाद अमित शाह की ताजपोशी के बाद से ही प्रशांत किशोर की उनसे अनबन होनी शुरू हो गई थी।‌ जिसके बाद वह भी सही मौके की तलाश में थे, जो उन्होंने नीतीश ने दिया। सोशल मीडिया के मास्टर कहे जाने वाले प्रशांत लोकसभा चुनावों में इसकी ताकत अच्छी तरह पहचान चुके थे।

यही कारण था कि आमतौर पर ट्विटर और फेशबुक से दूर रहने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा चुनावों के दौरान आम आदमी तक अपनी अवाज पहुंचाने के लिए इसे एक बेहतर माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया।

चुटकियों में निपटा दिया था सीट बंटवारे का मामला

prashant kishor planned nitish's won in bihar

प्रशांत पर नीतीश कुमार के भरोसे का आलम ये है‌ कि चुनावों में जीत से पहले ही सीएम आवाज में उनके लिए अलग से दफ्तर बनाने की कवायद शुरू कर दी गई ‌थी। चुनावों के दौरान भी उन्होंने सीएम आवास से सारा काम संभाले रखा था।

बताया जाता है कि किशोर ने इस बात जोर डाला कि जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहिए और नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री बनना चाहिए। इसके बाद किशोर ने अगले छह महीने में नीतीश कुमार को न केवल पार्टी के चेहरे के तौर पर प्रचारित किया बल्कि सरकार, सुशासन, विकास और बिहार की ऐसी ब्रैंडिंग की कि लोकसभा चुनावों में निराशाजनक हार के बाद सीएम की गद्दी छोड़ने वाला नेता लोकप्रियता के मामले में सीधे प्रधानमंत्री को टक्कर देता दिखा।

चुनावों के दौरान प्रशांत ने नीतीश के लिए घर घर दस्तक जैसा महीन कार्यक्रम शुरू किया जिससे लोगों के दिमाग में नीतीश की सुशासन वाली छवि दोबारा बैठी और लोगों का सरकार के प्रति फीडबैक और उनकी जरूरतों का पता भी सरकार को लग सका।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed