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Bihar : अब पटना हाईकोर्ट पहुंचा मामला, वकील ने कहा- रिवॉल्वर फेंक कर सरेंडर करने के बाद भी दाग दीं 5 गोलियां
Mon, 22 Jun 2026 10:31 PM IST
Krishan Ballabh Narayan
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Krishan Ballabh Narayan
Updated Mon, 22 Jun 2026 10:31 PM IST
सार
Bihar : भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर किया गया है। इस याचिका में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि सरकार ने जाँच के लिए केवल घोषणा की है, मगर अब तक इस आयोग से संबंधित कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
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पटना हाई कोर्ट और एनकाउंटर का घटनास्थल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में बीते 17 जून को हुए बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला अब पटना हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश कुमार ने भी इस कथित पुलिस मुठभेड़ के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर कर दी है। इस याचिका में पूरे मामले की किसी स्वतंत्र व निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने, आरोपी पुलिसकर्मियों पर हत्या की एफआईआर दर्ज करने, पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा देने और उचित मुआवजा दिलाने की पुरजोर मांग की गई है। इस कानूनी कदम के बाद बिहार के प्रशासनिक और सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
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सरेंडर के बाद मारी गोली, यह एनकाउंटर नहीं सीधे हत्या
हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में पुलिसिया थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि प्रथम दृष्टया यह पूरा मामला एक सोची-समझी साजिश और हत्या का प्रतीत होता है। आरोप के मुताबिक, 32 वर्षीय भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के सामने अपनी रिवॉल्वर नीचे फेंक दी थी और वह पूरी तरह आत्मसमर्पण कर चुका था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उस पर ताबड़तोड़ पांच गोलियां दाग दीं। याचिका में कहा गया है कि जब कोई आरोपी आत्मसमर्पण कर दे और फिर भी उसे गोली मार दी जाए, तो वह मुठभेड़ नहीं बल्कि सीधे तौर पर कस्टोडियल मर्डर की श्रेणी में आता है।
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न्यायिक जांच की घोषणा सिर्फ दिखावा
मामले को तूल पकड़ता देख राज्य सरकार ने पिछले शनिवार को हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित कर न्यायिक जांच कराने का आदेश तो दे दिया है। लेकिन याचिकाकर्ता अधिवक्ता मुकेश कुमार ने इस पर संशय व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने केवल घोषणा की है, मगर अब तक इस आयोग से संबंधित कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। उनका कहना है कि जब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक इस घोषणा का कोई कानूनी आधार नहीं है।
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वायरल वीडियो ने खोली पोल, पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
याचिका में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। अधिवक्ता मुकेश कुमार का दावा है कि कथित एनकाउंटर से ठीक पहले स्थानीय पुलिस ने ही भरत तिवारी के हाथ में पिस्तौल होने का एक वीडियो बनाया था। वीडियो सामने आने के बाद भी पुलिस ने उसे मौके पर गिरफ्तार करने या उसका हथियार जब्त करने का कोई प्रयास नहीं किया। इसके ठीक अगले ही दिन शाहपुर थाना पुलिस द्वारा उसे मुठभेड़ में मार गिराने का दावा कर दिया गया, जो पुलिस की कार्यशैली और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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