Pragati Yatra: सीएम नीतीश कुमार की बैठक से उठकर निकल गए विधायक; बाहर आकर राजद MLA ने लगाया आरोप
MLA Rajesh Gupta News: राजद विधायक ने बैठक को ‘समय की बर्बादी’ बताते हुए कहा कि वह सासाराम के विकास से जुड़े ठोस विषयों पर बात करना चाहते थे, लेकिन जब उन्हें अनदेखा किया गया तो वे बैठक से बाहर आ गए। पढ़ें पूरी खबर...।
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान रोहतास समाहरणालय में आयोजित समीक्षा बैठक में उस वक्त अप्रत्याशित माहौल बन गया, जब सासाराम के राजद विधायक राजेश गुप्ता बैठक छोड़कर गुस्से में बाहर निकल गए। विधायक ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया और विकास से जुड़े मुद्दों को उठाने से रोका गया।
‘सासाराम के विकास पर बोलने से रोका गया’
विधायक राजेश गुप्ता ने बैठक से बाहर निकलने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि वह सासाराम के विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें बार-बार नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि मैंने कई बार कोशिश की कि सासाराम की समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखूं, लेकिन मुझे मौका ही नहीं मिला।
‘2005 के पहले और बाद के बिहार की चर्चा में व्यस्त अधिकारी’
विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बैठक में केवल 2005 से पहले और बाद के बिहार की तुलना की जा रही थी। लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हो रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि समीक्षा बैठक में विकास से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने के बजाय केवल औपचारिक बातचीत की जा रही थी।
‘सिर्फ टाइम पास हो रहा है’
विधायक ने बैठक को ‘समय की बर्बादी’ बताते हुए कहा कि वह सासाराम के विकास से जुड़े ठोस विषयों पर बात करना चाहते थे, लेकिन जब उन्हें अनदेखा किया गया तो वे बैठक से बाहर आ गए। उन्होंने कहा कि अगर हमें अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिलेगा, तो ऐसी बैठक का क्या फायदा?
प्रगति यात्रा के तहत हो रही थी समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों बिहार के अलग-अलग जिलों में प्रगति यात्रा के तहत विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। इसी दौरान बुधवार को रोहतास समाहरणालय में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी, जिसमें जिला प्रशासन के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। लेकिन बैठक में राजद विधायक राजेश गुप्ता की नाराजगी और उनका बैठक से बाहर आ जाना प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है।