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Patna University Alumni meet : यादों के पिटारे से निकला पिछली शताब्दी का नाम- बिन नारी कॉलेज और गूंजे ठहाके
Sun, 12 Mar 2023 05:03 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Sun, 12 Mar 2023 05:03 PM IST
सार
Bihar: पटना विश्वविद्यालय के इतिहास में इस तरह सभी बैच के पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं का एक साथ सम्मेलन हुआ तो कैंपस में मानो नटखट पिटारे से पुरानी यादों की गांठें खुलने लगीं।
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पटना विवि की पूर्ववर्ती छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
"अरे यार! ढेर मोटे हो गए, पहचाने में नहीं आ रहे थे।" टोकें या नहीं...यह सोचते हुए जब दो दोस्त मिले तो तीसरे ने भी तत्काल पहचानते हुए दखल दी। "देख दोस्त, हम वाले लड़के-लड़की कैसे साथ बैठकर बात कर लेते थे और हम तो बिन नारी कॉलेज में पढ़े।" … यह सुनते ही जोरदार ठहाके गूंज उठे। बीएन कॉलेज के तीन पूर्ववर्ती छात्र फोन पर कई साल के अंतराल पर बात करते थे, लेकिन इस शताब्दी में जब पहली बार मिले तो ऐसी कहानियां हर दस कदम दूर पर सुनाई दे रही थीं। पटना विश्वविद्यालय के इतिहास में इस तरह सभी बैच के पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं का एक साथ सम्मेलन हुआ तो कैंपस में मानो नटखट पिटारे से पुरानी यादों की गांठें खुलने लगीं।
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पूर्ववर्ती छात्र श्रीकांत शर्मा।
- फोटो : अमर उजाला
अधिकतर लड़के गांव से आते थे
साइंस कॉलेज में 1967-69 बैच पासआउट श्रीकांत शर्मा ने कहा कि हमारे समय में अधिकतर लड़के गांव से आते थे। इसलिए उनका ध्यान पढ़ाई में ज्यादा रहता था। शहर को समझने में ही उन्हें देर लग जाती थी। वह पढ़ने में ही काफी समय देते थे। सम्मेलन में आकर काफी अच्छा लग रहा है। काफी खुश हूं।
साइंस कॉलेज में 1967-69 बैच पासआउट श्रीकांत शर्मा ने कहा कि हमारे समय में अधिकतर लड़के गांव से आते थे। इसलिए उनका ध्यान पढ़ाई में ज्यादा रहता था। शहर को समझने में ही उन्हें देर लग जाती थी। वह पढ़ने में ही काफी समय देते थे। सम्मेलन में आकर काफी अच्छा लग रहा है। काफी खुश हूं।
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अधिवक्ता अमिताभ रंजन मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
कोई जाति-पाति और भेदभाव का भी माहौल नहीं था
डॉ. शैवाल गुप्ता और सुशील मोदी के बैचमेट अमिताभ रंजन मिश्रा ने कहा कि बीएन कॉलेज से इंटर पास किया। वहां से अच्छा अंक लाकर पटना कॉलेज में एडमिशन लिया। उस समय काफी फ्रेंडली माहौल था। हमलोग एक साथ कॉलेज आते थे। साथ खाते थे और साथ ही निकलते थे। उस समय कोई जाति-पाति और भेदभाव का भी माहौल नहीं था। एक परिवार के तरह लगता था। मेरे बैच से करीब 12 लड़के IAS और IPS बने थे। यहां आकर पुरानी यादें ताजा होंगी।
डॉ. शैवाल गुप्ता और सुशील मोदी के बैचमेट अमिताभ रंजन मिश्रा ने कहा कि बीएन कॉलेज से इंटर पास किया। वहां से अच्छा अंक लाकर पटना कॉलेज में एडमिशन लिया। उस समय काफी फ्रेंडली माहौल था। हमलोग एक साथ कॉलेज आते थे। साथ खाते थे और साथ ही निकलते थे। उस समय कोई जाति-पाति और भेदभाव का भी माहौल नहीं था। एक परिवार के तरह लगता था। मेरे बैच से करीब 12 लड़के IAS और IPS बने थे। यहां आकर पुरानी यादें ताजा होंगी।
पटना विवि के पूर्ववर्ती छात्र सिद्धार्थ
- फोटो : अमर उजाला
ऐसा आयोजन हमेशा होता रहे
दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति ने कहा यहां आकर काफी अच्छा लग रहा है अमर उजाला के माध्यम से मैं सबका अभिनंदन करता हूं यहां आकर हमेशा प्रतीत होता है कि मैं आज भी यहां का ही छात्र हूं। पटना विवि में पढ़कर जो सीख मिली उससे ही आज यहां पहुंच पाया हूं। पूर्ववर्ती छात्रों के सम्मेलन में आकर गर्व का पल की अनुभूति हो रही है। यहां आकर सुखद अनुभूति हो रही है। हमलोग चाहेंगे कि ऐसा आयोजन हमेशा होता रहे।
दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति ने कहा यहां आकर काफी अच्छा लग रहा है अमर उजाला के माध्यम से मैं सबका अभिनंदन करता हूं यहां आकर हमेशा प्रतीत होता है कि मैं आज भी यहां का ही छात्र हूं। पटना विवि में पढ़कर जो सीख मिली उससे ही आज यहां पहुंच पाया हूं। पूर्ववर्ती छात्रों के सम्मेलन में आकर गर्व का पल की अनुभूति हो रही है। यहां आकर सुखद अनुभूति हो रही है। हमलोग चाहेंगे कि ऐसा आयोजन हमेशा होता रहे।
पटना विवि के पूर्ववर्ती छात्र श्याम नंदन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
आज चीजें बदल गई हैं
मनेर से आए श्याम नंदन सिंह ने कहा कि उस समय हम लोग गांव से आते थे और हमारा यहां पर कोई नहीं होता था। ऐसे में लगता था कि यहां के जो शिक्षक हैं। वहीं हमारे अभिभावक हैं। आज चीजें बदल गई हैं। अब ऐसा नहीं है। अब पढ़ाई के नाम पर क्लास नहीं चलता। जिस समय मैंने यहां एडमिशन लिया उस समय मेरे पास ₹50 घट गए थे। इसके बाद मैं एक प्रोफेसर के पास गया और उनसे अपनी व्यथा सुनाई। इसके बाद उन्होंने मुझे फौरन ₹50 दे दिए। इसके बाद जब छुट्टी हुई और मैं घर से वापस आया तो मैं उनके पास पैसे लौटाने के लिए गया। उन्होंने मुझसे पैसे नहीं लिए बल्कि मुझे वीसी और प्रिंसिपल से पांच-पांच ₹100 ग्रैंड करवा दिए मैं चौंक गया कि कोई इतना अच्छा कैसे हो सकता है आज ऐसी चीजें कम देखने को मिलती है।
मनेर से आए श्याम नंदन सिंह ने कहा कि उस समय हम लोग गांव से आते थे और हमारा यहां पर कोई नहीं होता था। ऐसे में लगता था कि यहां के जो शिक्षक हैं। वहीं हमारे अभिभावक हैं। आज चीजें बदल गई हैं। अब ऐसा नहीं है। अब पढ़ाई के नाम पर क्लास नहीं चलता। जिस समय मैंने यहां एडमिशन लिया उस समय मेरे पास ₹50 घट गए थे। इसके बाद मैं एक प्रोफेसर के पास गया और उनसे अपनी व्यथा सुनाई। इसके बाद उन्होंने मुझे फौरन ₹50 दे दिए। इसके बाद जब छुट्टी हुई और मैं घर से वापस आया तो मैं उनके पास पैसे लौटाने के लिए गया। उन्होंने मुझसे पैसे नहीं लिए बल्कि मुझे वीसी और प्रिंसिपल से पांच-पांच ₹100 ग्रैंड करवा दिए मैं चौंक गया कि कोई इतना अच्छा कैसे हो सकता है आज ऐसी चीजें कम देखने को मिलती है।
पटना विवि की पूर्ववर्ती छात्रा सत्या सिंह
- फोटो : अमर उजाला
यहां काफी सुखद अनुभूति हो रही है
सत्या सिंह ने कहा कि मैं नीति आयोग के डेवलपमेंट पार्टनर के साथ प्रोग्रामर के तौर पर काम कर रही हूं। कॉलेज से जब से पासआउट हुई हूं उसके बाद पहली बार यह एलुमनाई मीट हुआ है। आज यहां आकर काफी सुखद अनुभूति हो रही है। यहां से काफी नामचीन लोग पढ़कर पास आउट हुए।
सत्या सिंह ने कहा कि मैं नीति आयोग के डेवलपमेंट पार्टनर के साथ प्रोग्रामर के तौर पर काम कर रही हूं। कॉलेज से जब से पासआउट हुई हूं उसके बाद पहली बार यह एलुमनाई मीट हुआ है। आज यहां आकर काफी सुखद अनुभूति हो रही है। यहां से काफी नामचीन लोग पढ़कर पास आउट हुए।
पटना विवि की पूर्ववर्ती छात्रा सिमरन अंशु
- फोटो : अमर उजाला
यहां आकर काफी अच्छा लग रहा
सिमरन अंशु ने कहा कि मैं मगध कॉलेज और दरभंगा हाउस से पास आउट हूं। 5 साल की यादें हैं। बहुत प्यारी यादें हैं। हम लोगों ने पटना विश्वविद्यालय कैंपस में काफी मस्ती की। सभी फैकेल्टी अच्छे थे इसके अलावा अलग-अलग कार्यक्रम जो यहां पर आयोजित करवाए जाते तो वह काफी अच्छे थे। जब मैं फर्स्ट ईयर में आई थी तो गरबा कंपटीशन हुआ था। मैं फर्स्ट आई थी। आज यहां आकर काफी अच्छा लग रहा।
सिमरन अंशु ने कहा कि मैं मगध कॉलेज और दरभंगा हाउस से पास आउट हूं। 5 साल की यादें हैं। बहुत प्यारी यादें हैं। हम लोगों ने पटना विश्वविद्यालय कैंपस में काफी मस्ती की। सभी फैकेल्टी अच्छे थे इसके अलावा अलग-अलग कार्यक्रम जो यहां पर आयोजित करवाए जाते तो वह काफी अच्छे थे। जब मैं फर्स्ट ईयर में आई थी तो गरबा कंपटीशन हुआ था। मैं फर्स्ट आई थी। आज यहां आकर काफी अच्छा लग रहा।
पटना विवि की पूर्ववर्ती छात्राएं सुवर्णा और ज्योति
- फोटो : अमर उजाला
जीवन के हर मोड़ पर काफी उपयोगी यहां से मिली सीख
सुवर्णा और ज्योति ने कहा कि एडवोकेट ने कहा कि पूर्ववर्ती छात्र हूं आज इस कार्यक्रम में आकर काफी अच्छा लग रहा है। विमेंस कॉलेज की मैम से मिलके काफी अच्छा लगा। मैं पटना लॉ कॉलेज की छात्रा रही हूं। लॉ से ग्रेजुएट करने के बाद मैं कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हूं। पटना विवि में सीख मिली वह जीवन के हर मोड़ पर काफी उपयोगी हैं।
सुवर्णा और ज्योति ने कहा कि एडवोकेट ने कहा कि पूर्ववर्ती छात्र हूं आज इस कार्यक्रम में आकर काफी अच्छा लग रहा है। विमेंस कॉलेज की मैम से मिलके काफी अच्छा लगा। मैं पटना लॉ कॉलेज की छात्रा रही हूं। लॉ से ग्रेजुएट करने के बाद मैं कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हूं। पटना विवि में सीख मिली वह जीवन के हर मोड़ पर काफी उपयोगी हैं।
पटना विवि की पूर्ववर्ती छात्रा डॉ फरयास कौसर अंसारी
- फोटो : अमर उजाला
डॉ फरयास कौसर अंसारी का कहना है कि 2006 में मैं यहां मैनेजमेंट से स्नातक करने आई थी और 2009 में यहाँ से पास आउट हो गई। फिर यहीं से मैंने एम.बी.ए किया। फिर 2019 में मैं मैं पीएचडी कर के अपनी पढाई यहीं से खत्म की। अब मैं यहीं पढ़ा रही हूं। यहां की सबसे अच्छी खासियत यह है कि यहाँ का सत्र कभी लेट नहीं होता। पूरे बिहार के बच्चे सत्र के विलम्ब से चलने की जिस परेशानी से जूझते हैं उन परेशानियों से पटना विश्वविद्यालय के बच्चे नहीं जूझते, यह सबसे अच्छी बात है।