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Bihar News: नवरात्रि की तैयारियां हुईं शुरू, मूर्ति कलाकार देवी मां की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे
Sun, 21 Sep 2025 08:49 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कैमूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कैमूर
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Sun, 21 Sep 2025 08:49 AM IST
सार
नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होने जा रहा है और मूर्ति कलाकार देवी मां की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। गांव और शहर के पंडालों में विराजमान होने वाली प्रतिमाओं को सुंदर आकार और नौ रूपों में ढाला जा रहा है।
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मूर्ति को अंतिम रूप देते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नवरात्रि का पर्व 22 सितंबर, सोमवार से शुरू होने जा रहा है। इस अवसर पर मूर्ति कलाकार देवी मां की प्रतिमाओं को अंतिम स्वरूप देने में पूरी तरह लगे हैं। बाजार में नवरात्रि के उत्साह और रंग-रूप की झलक अब साफ दिखाई देने लगी है। गांव से लेकर शहर तक के पंडालों में विराजमान होने वाली मां दुर्गा की प्रतिमाओं को कलाकार सुंदर आकार और नौ रूपों में ढाल रहे हैं। मूर्ति बनाने वाले कलाकार रामबचन राम ने बताया कि हर साल की तरह इस वर्ष भी वे मां की प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि महंगाई और GST बढ़ने के कारण कपड़े और श्रृंगार के सामान महंगे दामों में खरीदने पड़ते हैं। रोजी-रोटी के लिए मेहनत करनी पड़ती है और सरकार से हमें कोई मदद नहीं मिलती। यदि सरकार हमलोगों पर ध्यान देती तो हम और बेहतर काम कर सकते। इस बार उनके पास 28 से 30 प्रतिमाओं का आर्डर है। कलाकार दो माह पहले से ही मूर्ति बनाने में जुट जाते हैं। रामबचन राम ने बताया कि कल्याणपुर नुआंव, दुर्गावती से लेकर उत्तर प्रदेश के सैयदराजा और जमानियां के लोग प्रतिमाएं लेने आते हैं। मां की प्रतिमाओं पर की गई बारीकियों से लोग खासा प्रभावित होते हैं।
पढ़ें: मिट्टी लाने गईं तीन किशोरियां तालाब में डूबीं, गांव में एक साथ उठी तीन चिताएं; पसरा मातम
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वहीं अपने पिता के साथ हाथ बंटा रही नौवीं की छात्रा शोभा कुमारी ने बताया कि उनके पिता पिछले 16 वर्षों से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पिता और भैया के साथ प्रतिमा बनाने में मदद करती हैं। प्रतिमा बुक कराने के लिए स्थानीय लोग ही नहीं, उत्तर प्रदेश के लोग भी आते हैं। शोभा कुमारी ने कहा कि उनकी कलाकारी को लोग काफी पसंद करते हैं।
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उन्होंने कहा कि महंगाई और GST बढ़ने के कारण कपड़े और श्रृंगार के सामान महंगे दामों में खरीदने पड़ते हैं। रोजी-रोटी के लिए मेहनत करनी पड़ती है और सरकार से हमें कोई मदद नहीं मिलती। यदि सरकार हमलोगों पर ध्यान देती तो हम और बेहतर काम कर सकते। इस बार उनके पास 28 से 30 प्रतिमाओं का आर्डर है। कलाकार दो माह पहले से ही मूर्ति बनाने में जुट जाते हैं। रामबचन राम ने बताया कि कल्याणपुर नुआंव, दुर्गावती से लेकर उत्तर प्रदेश के सैयदराजा और जमानियां के लोग प्रतिमाएं लेने आते हैं। मां की प्रतिमाओं पर की गई बारीकियों से लोग खासा प्रभावित होते हैं।
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वहीं अपने पिता के साथ हाथ बंटा रही नौवीं की छात्रा शोभा कुमारी ने बताया कि उनके पिता पिछले 16 वर्षों से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पिता और भैया के साथ प्रतिमा बनाने में मदद करती हैं। प्रतिमा बुक कराने के लिए स्थानीय लोग ही नहीं, उत्तर प्रदेश के लोग भी आते हैं। शोभा कुमारी ने कहा कि उनकी कलाकारी को लोग काफी पसंद करते हैं।