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बिहार: अब 155 फीट से अधिक ऊंचा होगा मां आरण्य देवी का मंदिर; द्वापरकालीन मान्यताओं से जुड़ा है इतिहास

Sun, 18 Oct 2026 09:44 PM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर Published by: पटना ब्यूरो Updated Sun, 18 Oct 2026 09:44 PM IST
सार

बिहार के आरा स्थित मां आरण्य देवी मंदिर का भव्य नवनिर्माण कराया जा रहा है। पांच मंजिला मंदिर की ऊंचाई 155 फीट से अधिक होगी और इस पर करीब आठ से दस करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

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Maa Aranya Devi is the presiding deity of Ara; her history is linked to beliefs dating back to
मां आरण्य देवी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

विस्तार

भोजपुर जिले के आरा शहर की अधिष्ठात्री देवी मां आरण्य देवी का मंदिर धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र है। द्वापरकालीन मान्यताओं से जुड़ा यह मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक बना हुआ है। चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पशु बलि की परंपरा नहीं है, बल्कि श्रद्धालु मां को नारियल अर्पित कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। मंदिर में स्थापित बड़ी प्रतिमा को मां सरस्वती और छोटी प्रतिमा को मां महालक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है।

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घने जंगलों के कारण पड़ा आरण्य क्षेत्र नाम
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में वर्तमान आरा शहर का क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था। संस्कृत में 'आरण्य' का अर्थ वन होता है। इसी वजह से इस क्षेत्र को आरण्य क्षेत्र कहा जाता था। मान्यता है कि यहां प्राचीन काल में आदिशक्ति की प्रतिमा स्थापित थी और समय के साथ मां आरण्य देवी के नाम से इस स्थान की प्रसिद्धि बढ़ती गई।

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मंदिर से जुड़ी एक प्रमुख किंवदंती के अनुसार, वनवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में ठहरे थे और उन्होंने यहां आदिशक्ति की पूजा-अर्चना की थी। मान्यता है कि मां ने धर्मराज युधिष्ठिर को स्वप्न में प्रतिमा स्थापित करने का संकेत दिया था। इसके बाद युधिष्ठिर ने मां आरण्य देवी की प्रतिमा स्थापित की। हालांकि, यह प्रसंग धार्मिक मान्यता और लोकपरंपरा के रूप में प्रचलित है।

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मंदिर का संबंध भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय मान्यता है कि बक्सर से जनकपुर जाते समय उन्होंने यहां मां की पूजा-अर्चना की थी। इसके बाद उन्होंने सोनभद्र नदी को पार किया था।

राजा मयूरध्वज की कथा भी है प्रचलित
मां आरण्य देवी और आरा के नामकरण को लेकर राजा मयूरध्वज की कथा भी प्रचलित है। लोककथा के अनुसार, राजा मयूरध्वज की दानशीलता और धर्म के प्रति समर्पण की परीक्षा लेने के लिए भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन साधु के वेश में उनके दरबार पहुंचे थे। कथा में राजा और रानी द्वारा अपने पुत्र का बलिदान देने की तैयारी तथा उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान के आशीर्वाद देने का वर्णन मिलता है। इस कथा को भी आरा के नाम और क्षेत्र की धार्मिक महत्ता से जोड़कर देखा जाता है।

मंदिर परिसर में वर्ष 1953 में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। इसके बाद से मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को मां आरण्य देवी के साथ अन्य देवी-देवताओं के दर्शन का अवसर मिलता रहा है।

155 फीट से अधिक ऊंचा बनेगा भव्य मंदिर

मां आरण्य देवी मंदिर विकास ट्रस्ट की ओर से मंदिर का जीर्णोद्धार एवं नवनिर्माण कराया जा रहा है। प्रस्तावित नए मंदिर की ऊंचाई 155 फीट से अधिक होगी। इसके निर्माण पर करीब आठ से दस करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पांच मंजिला मंदिर को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, प्रथम तल पर मां आरण्य देवी और भैरव बाबा की प्रतिमाएं रहेंगी, जबकि दूसरे तल पर अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। तीसरे तल पर शादी-विवाह और पूजा-पाठ जैसे धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था होगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सीढ़ियों के साथ लिफ्ट की व्यवस्था भी की जा रही है।

मंदिर के पांचों तलों की ढलाई का कार्य पूरा हो चुका है। दशहरा पूजा के बाद भूतल और प्रथम तल पर मार्बल लगाने का काम शुरू करने की तैयारी है।

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आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र है मंदिर
मां आरण्य देवी का मंदिर केवल आरा ही नहीं, बल्कि भोजपुर और आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के दोनों अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। श्रद्धालु मां के दरबार में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। पौराणिक मान्यताओं, लोककथाओं, धार्मिक परंपराओं और भव्य मंदिर निर्माण के कारण मां आरण्य देवी का धाम आरा की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

 

मां आरण्य देवी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

मां आरण्य देवी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

 

मां आरण्य देवी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

मां आरण्य देवी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

 

मां आरण्य देवी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

मां आरण्य देवी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

 

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