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India Win Hockey: मैदान के बाहर से जीत गढ़ने वाले गुमनाम हीरो, कोच से लेकर फिजियो तक की अनसुनी कहानी; जानें

Mon, 08 Sep 2025 05:36 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 08 Sep 2025 05:36 PM IST
सार

Asia Cup Hockey Final 2025: भारत की चौथी एशिया कप हॉकी जीत केवल खिलाड़ियों की प्रतिभा और संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि उन गुमनाम नायकों की मेहनत का नतीजा है, जो मैदान के बाहर रहकर जीत की नींव रखते हैं। मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने टीम को आक्रामक रणनीति और मानसिक दृढ़ता दी, जबकि पूर्व ओलंपियन शिवेंद्र सिंह ने खिलाड़ियों का मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ाया।

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India vs Korea Hockey Asia Cup 2025 Final support staff Off the Field heroes Who Shaped India Victory
भारत की जीत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीत के बाद मैदान पर गूंजती तालियों की गड़गड़ाहट, रंगीन आतिशबाजी और तिरंगे के साथ झूमते दर्शकों का उत्साह हर किसी को रोमांचित कर देता है। लेकिन हर सफलता की असली कहानी सिर्फ खिलाड़ियों की मेहनत और संघर्ष तक सीमित नहीं होती। इसके पीछे वे लोग भी होते हैं, जो दिखाई तो नहीं देते, लेकिन हर जीत की नींव चुपचाप गढ़ते रहते हैं। भारत की एशिया कप हॉकी जीत भी ऐसे ही गुमनाम नायकों के योगदान का नतीजा है।

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क्रेग फुल्टन, मुख्य कोच
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व डिफेंडर और रणनीतिकार क्रेग फुल्टन ने टीम को नई आक्रामक सोच दी। उनका सिद्धांत है कि गेंद छीनी जाती है, दी नहीं जाती।” बेल्जियम के सहायक कोच रहते हुए वे 2018 विश्व कप और टोक्यो ओलंपिक स्वर्ण पदक जीत में अहम रहे। भारतीय टीम उनके नेतृत्व में तेज़ ट्रांज़िशन, हाई-प्रेसिंग और मानसिक दृढ़ता का संतुलन साधने लगी, जिसने एशिया कप विजय की नींव रखी।

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शिवेंद्र सिंह, कोच/मैनेजर
पूर्व ओलंपियन शिवेंद्र सिंह को टीम की आत्मा कहा जाता है। स्ट्राइकरों को तकनीकी प्रशिक्षण देने के साथ-साथ वे खिलाड़ियों में आत्मविश्वास और संयम भरते हैं। हार के बाद उनका मनोबल बढ़ाना, टीम को भावनात्मक रूप से जोड़े रखना और लॉजिस्टिक चुनौतियों से निपटना उनकी खासियत है। खिलाड़ी उन्हें मार्गदर्शक और मित्र—दोनों मानते हैं।

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माइकल कोस्मा, सहायक कोच
रणनीतिक समझ के लिए मशहूर माइकल कोस्मा मुख्य कोच फुल्टन के दाहिने हाथ हैं। विपक्षी टीम की रणनीति पढ़ना, पैटर्न पहचानना और उसके अनुरूप अभ्यास सत्र तैयार करना उनकी भूमिका है। उनके ट्रेनिंग ड्रिल खिलाड़ियों को मैच से पहले ही वास्तविक दबाव का अनुभव करा देते हैं।

आर्टुर लुकास, अंतरराष्ट्रीय मैनेजर
ब्राज़ील के आर्टुर लुकास टीम के अंतरराष्ट्रीय संचालन संभालते हैं। वीज़ा, यात्रा, आहार और प्रैक्टिस शेड्यूल उनकी देखरेख में व्यवस्थित रहते हैं। उनकी योजना ने खिलाड़ियों को मैदान से बाहर की चिंताओं से मुक्त कर दिया।

पढ़ें: फुल्टन की पलटन ने पलट दी एशिया की बादशाहत, कोरिया को हराकर भारत बना विजेता

ऐलन टैन, फिटनेस विशेषज्ञ
सिंगापुर के ऐलन टैन ने GPS ट्रैकर, हाइड्रेशन एनालिटिक्स और माइक्रो-मसल एनालिसिस जैसी आधुनिक तकनीकों को योग और ध्यान के साथ जोड़ा। थकान प्रबंधन और रिकवरी साइकल पर उनकी पकड़ ने खिलाड़ियों को शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से मजबूत बनाया।

हर्षित मलसंद्र लक्ष्मण, वीडियो एनालिस्ट
आधुनिक हॉकी में वीडियो एनालिसिस अनिवार्य हो चुका है। विपक्षी रणनीति और खिलाड़ियों की मूवमेंट का अध्ययन कर हर्षित ने कोचिंग स्टाफ को सटीक रणनीति बनाने में मदद दी। उनका मौन योगदान भारतीय टीम को निर्णायक बढ़त दिलाता है।

मुरुगेसन रंगनाथन, फिजियोथेरेपिस्ट
अनुभवी फिजियोथेरेपिस्ट मुरुगेसन खिलाड़ियों को चोटों से बचाने और फिटनेस बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। वार्म-अप, आइस-बाथ और कंप्रेशन थेरेपी से उन्होंने खिलाड़ियों को हमेशा मैच के लिए तैयार रखा।

अरुप नस्कर, स्ट्रेंथ एवं फ्लेक्सिबिलिटी ट्रेनर
अरुप नस्कर ने पारंपरिक मालिश तकनीकों को आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस से जोड़कर खिलाड़ियों की ताकत और लचीलापन बढ़ाया। उनकी तकनीकों ने डिफेंडर्स और मिडफील्डर्स को लंबे समय तक उच्च तीव्रता पर खेलने में मदद दी।

बोधिसत्व दास – फ़िज़ियोथेरेपिस्ट
पोस्ट-मैच रिकवरी विशेषज्ञ बोधिसत्व दास मांसपेशी रिलीज़ थेरेपी, लक्षित स्ट्रेचिंग और योग-आधारित लचीलापन अभ्यास से खिलाड़ियों को हर कठिन मुकाबले के बाद भी तरोताज़ा बनाए रखते हैं।

प्रदीप कुमार, स्टेमिना एवं एजिलिटी ट्रेनर
प्रदीप कुमार ने खिलाड़ियों की सहनशक्ति और फुर्ती में जबरदस्त सुधार किया। हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग और न्यूरो-मस्कुलर कोऑर्डिनेशन ने खिलाड़ियों की गति, संतुलन और प्रतिक्रिया समय को धार दी भारत की चौथी एशिया कप विजय यह साबित करती है कि आधुनिक खेल केवल मैदान पर 60 मिनट की जंग नहीं, बल्कि वैज्ञानिक योजना, तकनीकी विश्लेषण और सूक्ष्म प्रबंधन का भी संगम है। मैदान के बाहर से जीत गढ़ने वाले यही अदृश्य नायक भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का रास्ता तैयार कर रहे हैं।

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