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Hindi News ›   Bihar ›   Patna News ›   Dipankar Bhattacharya Interview with Amar Ujala Bihar Assembly Elections 2025 BJP, Congress, RJD, JDU CPI M

Bihar Election : महागठबंधन सरकार में यह दल देगा शिक्षा मंत्री; दीपांकर भट्टाचार्य ने क्या बताया? जानिए

Sun, 09 Nov 2025 09:44 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी Updated Sun, 09 Nov 2025 09:44 PM IST
सार

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म है। कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (लिबरेशन) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य से इस बीच खास बातचीत की गई है। आइए इस दौरान हुए सवाल-जवाब को समझते हैं। पढ़ें पूरा साक्षात्कार।

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Dipankar Bhattacharya Interview with Amar Ujala Bihar Assembly Elections 2025 BJP, Congress, RJD, JDU CPI M
दीपांकर भट्टाचार्य साक्षात्कार के दौरान अपनी बात रखते हुए। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के मतदान को लेकर काउंटडाउन जारी है। रविवार शाम पांच बजते ही चुनाव प्रचार में पूर्ण विराम लग गया। अब प्रदेश में 122 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होगा। इस दौरान कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (लिबरेशन) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने अमर उजाला के कुमार जितेंद्र ज्योति से खास बात-चीत की है। यहां प्रस्तुत हैं साक्षात्कार में किए-गए सवाल-जवाब के अंश। चलिए जानते हैं बिहार के चुनावी मुद्दों में वो क्या बोल रहे हैं? 
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सवाल: पहले चरण के चुनाव को लेकर क्या सोचते हैं? दूसरे चरण में कैसी संभावनाएं देखते हैं?
जवाब: दीपांकर भट्टाचार्य कहते हैं, पहले चरण में बिहार में अच्छी वोटिंग हुई। बंपर वोटिंग का मतलब होता है कि लोग सरकार से नाराज हैं और बदलाव चाहते हैं। मेरे हिसाब से महिलाओं की भागीदारी कुछ कम हुई है, क्योंकि वोटर लिस्ट से महिलाओं के नाम काफी कटे हैं। महिलाओं में नाराजगी थी। गलत संदेश फैलाया गया और उन्हें पैसे देकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की गई। इससे नए सवाल खड़े हुए हैं। महिलाएं पूछ रही हैं कि अब ऐसा क्यों? बड़ा मुद्दा कर्ज का है। इसलिए महिलाओं ने नारा दिया कि 10 हजार में दम नहीं, कर्ज माफी कम नहीं। एक परिवार में कुछ लोगों को लाभ मिला, तो कुछ को नहीं इसमें विषमता है।
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सवाल: तेजस्वी यादव बार-बार कहते हैं कि घूस दी गई, इसका क्या मतलब माना जाए?
जवाब: महिलाओं ने जो 10 हजार रुपये पाए, वह उनके हक का पैसा है, रिश्वत नहीं। जनता अब समझ चुकी है कि यह चुनावी रिश्वत है। दस हजार कोई गेम चेंजर नहीं है।

सवाल: 121 सीटों पर जो मतदान हुआ, उसको लेकर आपकी क्या राय है? तीसरे मोर्चे को कैसे देखते हैं?
जवाब: आमतौर पर एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है। तीसरा मोर्चा जनसुराज है, लेकिन उनकी उपस्थिति कमजोर है। चुनाव दो ध्रुवों के बीच है और इस बार महागठबंधन की जीत तय है। उत्तर बिहार में इस बार बड़ा बदलाव दिख रहा है। वीवीआई और आईपी जैसी पार्टियों का आना सकारात्मक है। दूसरा चरण निर्णायक होगा और इससे महागठबंधन को मजबूती मिलेगी।

सवाल: पिछली बार एनडीए 125 सीटों पर अटक गया था, इस बार क्या स्थिति दिख रही है?
जवाब: एनडीए अटका नहीं था, बल्कि बच गया था। हम लोग अटक गए थे। लेकिन इस बार यह पेंडिंग एजेंडा पूरा होगा। युवाओं और महिलाओं में गुस्सा है, हर वर्ग नाराज है। बीस साल बहुत होते हैं।

सवाल: राहुल गांधी की सक्रियता पर क्या कहेंगे? अभियान में देरी को लेकर आपकी राय?
जवाब: एसआईआर लागू होने के बाद राहुल गांधी का आना अच्छा रहा। बिहार ने जमकर लड़ाई लड़ी। नहीं तो लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट जाते। एसआईआर ने काफी नुकसान किया है। हर दस में एक मतदाता बाहर हुआ है। अब जो नौ मतदाता बचे हैं, वे ज्यादा जागरूक हुए हैं। बिहार ने नारा दिया है कि वोट चोर, गद्दी चोर। जनता अब जान चुकी है कि वोट चोरी करने वालों को गद्दी से हटाना होगा। लोग बदलाव चाहते हैं और इस बार उन्होंने जमकर वोट किया है।

सवाल: अगर सरकार बनती है, तो माले की भूमिका क्या होगी?
जवाब: हमने फैसला लिया है कि सिर्फ सरकार में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि काम करने के लिए सत्ता में रहेंगे। पिछली बार हमने दबाव डाला था, तो सरकार को अमल करना पड़ा। इस बार भी संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने के लिए माले के साथी संघर्ष करेंगे। शिक्षा व्यवस्था को सुधारना हमारी प्राथमिकता होगी।

सवाल: जाति आधारित आरक्षण का क्या कॉन्सेप्ट होना चाहिए?
जवाब: आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण पहले ही लागू हो चुका है, जो लगभग 100% प्रभावी है। लेकिन सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर जो आरक्षण संविधान में दिया गया है, उसका लाभ अब भी नहीं मिल रहा। बिहार में आरक्षण चोरी हो रही है। हाल ही में दलित युवाओं ने आरक्षण चोरी के खिलाफ जुलूस निकाला, जिस पर लाठीचार्ज हुआ। दरोगा भर्ती में 1800 पदों पर 16% आरक्षण के हिसाब से 288 सीटें होनी चाहिए थीं, लेकिन दी गईं सिर्फ 208। यानी 78 सीटों की ‘चोरी’। मौजूदा फॉर्मूले के हिसाब से भी पूरा हक नहीं दिया जा रहा है।


सवाल: आरक्षण को लेकर आपकी राय क्या है?
जवाब: हम फॉरवर्ड-बैकवर्ड की नहीं, बल्कि न्याय (जस्टिस) की बात कर रहे हैं। अभी 50% आरक्षण है, उसमें भी कटौती हो रही है। इसके खिलाफ आवाज उठेगी। हमने कहा कि बिहार की आबादी के हिसाब से जो जनरल कैटेगरी है, वह लगभग 16% है। उसमें जब आर्थिक आधार लागू किया गया, तो लगभग 10% आबादी को आरक्षण मिल गया। यानी लगभग 100%। इसलिए हमें लगता है कि अब सामाजिक आधार पर आरक्षण का पूरा हक दिया जाए।

सवाल: हर घर नौकरी और आरक्षण को लेकर आपकी क्या राय है?
जवाब: हर घर सरकारी नौकरी की बात में आरक्षण स्वाभाविक रूप से शामिल है। सरकारी नौकरी में पूरा आरक्षण लागू होगा। लेकिन हम किसी तरह की लालच की राजनीति नहीं कर रहे हैं। न बिजली फ्री का वादा, न राशन बंद करने की धमकी। हम अधिकार की बात करते हैं, सबके लिए समान अवसर की बात करते हैं।

ये भी पढ़ें- Bihar Election: चुनावी प्रचार पर लगा विराम, अब दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को 122 सीटों पर होगी वोटिंग

सवाल: क्या बिहार के लोग मान लें कि हर घर को नौकरी मिलेगी?

जवाब: हम पक्की नौकरी की बात कर रहे हैं। आज रोजगार शब्द का डीवैल्यूएशन हो गया है। मोदी जी पहले कहते थे कि पकौड़ा तलना भी रोजगार है, अब कहते हैं मोबाइल से रील बनाओ और पैसा कमाओ। यह नौजवानों के साथ मजाक है। हमें सुरक्षित और सम्मानजनक रोजगार चाहिए। बिहार से पलायन रोकने के लिए राज्य में स्थायी नौकरी और जीवन-योग्य वेतन जरूरी है। सरकारी नौकरियों में यही स्थायित्व है, प्राइवेट सेक्टर में नहीं।
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