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बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की गेंद अब जदयू के पाले में, बजट बना नीतीश सरकार के लिए चुनौती
Wed, 03 Feb 2021 04:51 AM IST
देव कश्यप
कुमार निशांत, पटना
कुमार निशांत, पटना
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 03 Feb 2021 04:51 AM IST
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नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार
- फोटो : ANI
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बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी पर अब तक भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहराते रहे जदयू को अब मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी पर जवाब देना पड़ सकता है। भारतीय जनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि अब उसकी तरफ से कोई देरी नहीं है और पार्टी जल्दी ही अपने कोटे से मंत्री बनने वाले नेताओं की लिस्ट मुख्यमंत्री को सौंपने वाली है।
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सोमवार को बिहार भाजपा के नेताओं के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की हुई मीटिंग में मंत्री बनने वालों के नाम तय कर लिए गए हैं। इस बैठक में भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद और रेणु देवी, पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी और प्रदेश संगठन महामंत्री नागेंद्र शामिल थे।
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बताया जा रहा है कि बैठक में कई नामों पर चर्चा हुई और फिर फाइनल सूची तैयार की गई। पार्टी ने यह तय किया है कि सभी वर्गों को मंत्रिमंडल में जगह मिले और क्षेत्रीय समानता का भी ध्यान रखा जाए। इस बैठक से जो सबसे बड़ी खबर निकल कर आ रही है वह यह है की पार्टी इस बार कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल करने का मन बना चुकी है।
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हालांकि पार्टी के पुराने और वरिष्ठ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह देने पर फैसला हुआ है। इधर, जनता दल यूनाइटेड के नेता कहते आ रहे हैं कि कैबिनेट में उन्हें बराबरी का हिस्सा चाहिए। विधानसभा में अंकगणित को देखते हुए इसकी संभावना बहुत ही कम है कि कैबिनेट में जदयू को बराबरी की हिस्सेदारी मिल सके।
गठबंधन में शामिल वीआईपी और हम को पहले ही एक-एक मंत्री पद दिया जा चुका है। इधर हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर मंत्रिमंडल में एक और सीट और राज्यपाल कोटे से विधान परिषद में एक सीट की मांग कर जदयू के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी है।
बिहार में बजट सत्र सिर पर है और ऐसे में अब तक मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो पाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। एक-एक मंत्री पर कई विभागों का बोझ है और कई विभाग बिना मंत्री के हैं। ऐसे में विभागों का बजट बनाना आसान नहीं है। बिहार में विपक्ष इसे लगातार मुद्दा बना रहा है। विपक्ष का मानना है कि मंत्रिमंडल गठन में हो रही देरी का नुकसान पूरे बिहार को भुगतना पड़ रहा है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने तो कटाक्ष करते हुए कहा कि जो नीतीश कुमार ढाई महीने में कैबिनेट विस्तार नहीं कर पाए वह भला बिहार की आकांक्षाओं पर कैसे खरा उतरेंगे।