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Bihar News: बढ़ते वाहन प्रदूषण पर लगेगी लगाम, किए जाएंगे 46 प्रखंडों में नए प्रदूषण जांच केंद्र स्थापित
Thu, 14 Aug 2025 10:27 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Thu, 14 Aug 2025 10:27 PM IST
सार
राज्य में वाहन जनित प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए परिवहन विभाग ने “प्रदूषण जांच केंद्र प्रोत्साहन योजना” शुरू की है। योजना के तहत 132 प्रखंडों में केंद्र स्थापित किए जाएंगे, और 46 प्रखंडों को 1.05 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है।
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(प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राज्य में बढ़ती वाहनों की संख्या वायु गुणवत्ता पर गंभीर असर डाल रही है और यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गया है। इस स्थिति को देखते हुए परिवहन विभाग ने प्रदेश के सभी प्रखंडों में “प्रदूषण जांच केंद्र प्रोत्साहन योजना” के तहत प्रदूषण जांच केंद्र (पीयूसी) स्थापित करने के लिए कदम उठाया है। विभाग के अनुसार, प्रदेश के 132 प्रखंडों में अब तक कोई पीयूसी केंद्र नहीं था। इन्हें स्थापित करने के लिए 46 प्रखंडों को कुल 1 करोड़ 5 लाख 72 हजार 576 रुपये की अनुदान राशि दी जा चुकी है।
केंद्रों की स्थापना का विवरण
योजना के तहत सबसे अधिक पांच पीयूसी केंद्र भभुआ में, चार-चार केंद्र बांका और मधुबनी में, तीन-तीन केंद्र दरभंगा, गया, जहानाबाद और कटिहार में, दो-दो केंद्र मधेपुरा, नालंदा, नवादा, रोहतास, सहरसा, शेखपुरा, सिवान में तथा एक-एक केंद्र समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, छपरा और अरवल जिले में स्थापित किए जाएंगे। राज्य में वर्तमान में कुल 1553 पीयूसी संचालित हो रहे हैं। इनमें सबसे अधिक 264 केंद्र पटना, 81 मुजफ्फरपुर, 76 गया, 74 वैशाली, 66 छपरा और 62 समस्तीपुर जिले में हैं। इन केंद्रों पर अधिक से अधिक वाहनों की प्रदूषण जांच की जाती है।
सरकार दे रही प्रोत्साहन राशि
योजना के तहत प्रदूषण जांच उपकरणों की खरीद पर 50 प्रतिशत या अधिकतम तीन लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। यह अनुदान प्रखंड स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा। ध्यान रहे कि पीयूसी पेट्रोल पंप और वाहन सर्विस सेंटर पर नहीं खोले जा सकते।
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लाभुकता और आवेदन की शर्तें:
केंद्र संचालन की शर्तें
प्रदूषण जांच केंद्र को कम से कम तीन वर्ष तक संचालित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल वाहनों को पीयूसी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए स्मोक मीटर और गैस एनालाइजर दोनों उपकरणों की खरीद आवश्यक है।
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केंद्रों की स्थापना का विवरण
योजना के तहत सबसे अधिक पांच पीयूसी केंद्र भभुआ में, चार-चार केंद्र बांका और मधुबनी में, तीन-तीन केंद्र दरभंगा, गया, जहानाबाद और कटिहार में, दो-दो केंद्र मधेपुरा, नालंदा, नवादा, रोहतास, सहरसा, शेखपुरा, सिवान में तथा एक-एक केंद्र समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, छपरा और अरवल जिले में स्थापित किए जाएंगे। राज्य में वर्तमान में कुल 1553 पीयूसी संचालित हो रहे हैं। इनमें सबसे अधिक 264 केंद्र पटना, 81 मुजफ्फरपुर, 76 गया, 74 वैशाली, 66 छपरा और 62 समस्तीपुर जिले में हैं। इन केंद्रों पर अधिक से अधिक वाहनों की प्रदूषण जांच की जाती है।
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सरकार दे रही प्रोत्साहन राशि
योजना के तहत प्रदूषण जांच उपकरणों की खरीद पर 50 प्रतिशत या अधिकतम तीन लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। यह अनुदान प्रखंड स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा। ध्यान रहे कि पीयूसी पेट्रोल पंप और वाहन सर्विस सेंटर पर नहीं खोले जा सकते।
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लाभुकता और आवेदन की शर्तें:
- योजना का लाभ केवल उस प्रखंड के स्थायी निवासियों को मिलेगा, जहां केंद्र स्थापित किया जाएगा।
- आवेदक को वाहन रखरखाव या सर्विसिंग का व्यवसाय करना चाहिए।
- आवेदक या उनके स्टाफ के पास मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल या ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में डिग्री/डिप्लोमा, इंटरमीडिएट या मोटर वाहन संबंधित आईटीआई की योग्यता होनी चाहिए।
- आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज:
- आवेदनकर्ता को जिला परिवहन कार्यालय में निम्न दस्तावेज जमा करने होंगे:
- मोटरयान निरीक्षक का जांच प्रतिवेदन
- प्रदूषण जांच केंद्र का फोटो
- केंद्र के लिए जारी अनुज्ञप्ति की छायाप्रति
- उपकरण का कैलिब्रेशन प्रमाण पत्र
- अनुदान के लिए अनुरोध पत्र
- केंद्र के कार्यरत रहने का प्रमाण पत्र
- जिला परिवहन पदाधिकारी का अनुदान आवंटन अनुरोध पत्र
केंद्र संचालन की शर्तें
प्रदूषण जांच केंद्र को कम से कम तीन वर्ष तक संचालित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल वाहनों को पीयूसी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए स्मोक मीटर और गैस एनालाइजर दोनों उपकरणों की खरीद आवश्यक है।