टेंडर घोटाला: आईएएस संतोष मल्ल से ईडी ने आठ घंटे की पूछताछ, दो अन्य अधिकारी भी जांच के दायरे में
बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले और धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईएएस अधिकारी संतोष कुमार मल्ल से करीब आठ घंटे पूछताछ की। उनसे ठेकेदार रिशु श्री से संबंधों, आम की डिलीवरी, दिल्ली में मुलाकात और सात प्रतिशत कमीशन के आरोपों पर सवाल किए गए।
विस्तार
बिहार में सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितता और धन शोधन से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच तेज हो गई है। ठेकेदार रिशु श्री से जुड़े टेंडर घोटाले में एजेंसी ने गुरुवार को आईएएस अधिकारी संतोष कुमार मल्ल से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान उनसे ठेकेदार से संबंधों, आम की डिलीवरी, दिल्ली में रहने वाले एक युवक से मुलाकात और सात प्रतिशत कमीशन के आरोपों को लेकर सवाल किए गए। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आईएएस अधिकारी कई महत्वपूर्ण सवालों पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। वहीं, मामले में दो अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
आम की डिलीवरी और सात प्रतिशत कमीशन पर पूछे सवाल
ईडी की जांच टीम ने संतोष कुमार मल्ल से पूछा कि वह रिशु श्री से आम क्यों मांग रहे थे और उसकी डिलीवरी दिल्ली में ही क्यों करानी थी? इसके अलावा, दिल्ली में उनसे मिलने आए युवक की पहचान और दोनों के बीच सात प्रतिशत कमीशन को लेकर भी सवाल किए गए। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि ठेकेदार और अधिकारियों के बीच किस तरह का लेनदेन और संपर्क था।
आईएएस अधिकारियों से पूछताछ का सिलसिला जारी
सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितता और अधिकारियों व ठेकेदार के बीच गठजोड़ की जांच के तहत ईडी लगातार आईएएस अधिकारियों से पूछताछ कर रही है। इससे पहले बुधवार को बीएमएसआईसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक आईएएस धर्मेंद्र कुमार पटना स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे थे। उनसे करीब छह घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। अधिकारियों ने धर्मेंद्र कुमार से रिशु श्री के साथ उनकी नजदीकी और ठेकेदार की ओर से कराई गई विदेश यात्राओं के बारे में जानकारी मांगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
इससे पहले सोमवार को आईएएस अभिलाषा कुमारी शर्मा और मंगलवार को आईएएस सुनील यादव से करीब साढ़े सात घंटे तक पूछताछ हुई थी। एजेंसी ने इस मामले में छह आईएएस अधिकारियों आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, धर्मेंद्र कुमार, योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव को समन भेजा था।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद जांच ने पकड़ी रफ्तार
निगरानी अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी रिशु श्री ने हाईकोर्ट का रुख किया था। 15 अक्तूबर को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बड़े अधिकारियों की भूमिका और उनके खिलाफ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। अदालत ने टिप्पणी की थी कि रिशु श्री तो एक छोटा मोहरा है और असली कार्रवाई बड़े अधिकारियों के खिलाफ होनी चाहिए। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद ईडी ने जांच तेज कर दी। मूल रूप से बिहार के सारण जिले का रहने वाला रिशु श्री वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस और अन्य से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में मुख्य आरोपी है। उसके खिलाफ विशेष निगरानी इकाई ने भी प्राथमिकी दर्ज की थी।
टेंडर की शर्तों में बदलाव कर पसंदीदा ठेकेदारों को दिलाता था काम
जांच रिपोर्ट के अनुसार, रिशु श्री अधिकारियों को फायदा पहुंचाकर सरकारी टेंडर की शर्तें समय से पहले हासिल कर लेता था। आरोप है कि वह अधिकारियों से सांठगांठ कर टेंडर की शर्तों में बदलाव करवाता था और अपने पसंदीदा ठेकेदारों को काम दिलाता था। इसके बदले मिलने वाले कमीशन का बड़ा हिस्सा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था। वह अपनी पसंद के अधिकारियों की तैनाती कराने की कोशिश भी करता था।
मुमुक्षु चौधरी के बयान के अनुसार, सीतामढ़ी में नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलाने के लिए रिशु श्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को 25 लाख रुपये दिए थे। इसके अलावा, बीयूडीसीओ के तत्कालीन प्रबंध निदेशक आईएएस योगेश कुमार सागर के परिवार के छह सदस्यों को जून 2024 में ऑस्ट्रिया की यात्रा कराने का आरोप है। वहीं, आईएएस अभिलाषा कुमारी शर्मा और उनके परिवार की विदेश यात्रा पर 19 लाख रुपये खर्च किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इन दोनों मामलों से जुड़े व्हाट्सएप चैट का ब्योरा भी जांच में शामिल है।
265 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का जिक्र
ईडी की जांच में 265.73 करोड़ रुपये की संपत्ति का उल्लेख मिला है। छापेमारी के दौरान रिशु श्री के घर से भारी मात्रा में नकदी और जेवरात बरामद किए गए थे। एजेंसी इस मामले में संपत्ति के स्रोत और कथित लेनदेन की भी जांच कर रही है।
अधिकारियों को धमकी देने का भी आरोप
इस मामले में धमकी देने का पहलू भी सामने आया है। 10 सितंबर 2025 को ईडी ने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि आरोपी फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों का सहारा ले रहा है। साथ ही, टेलीग्राम और फेसटाइम के माध्यम से अधिकारियों को खुदकुशी करने की धमकी भी दे रहा है। एजेंसी ने इस संबंध में पुलिस को जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया था।