बिहार अलकतरा घोटाला: अपराध स्वीकार करने वाले ट्रांसपोर्टर को 16 महीने से अधिक की सजा, 29 लाख रुपये का जुर्माना
बिहार के बहुचर्चित अलकतरा घोटाले से जुड़े मामले में पटना की सीबीआई विशेष अदालत ने ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह उर्फ डीएन सिंह को एक वर्ष, चार माह और 18 दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 29 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसे उसने जमा करा दिया।
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पटना में बिहार के बहुचर्चित अलकतरा घोटाले से जुड़े एक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने अपराध स्वीकार करने वाले ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह उर्फ डीएन सिंह को एक वर्ष, चार माह और 18 दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 29 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोषी ट्रांसपोर्टर ने जुर्माने की पूरी राशि अदालत में जमा करा दी, जिसके बाद उसके खिलाफ चल रहे मुकदमे का निष्पादन कर दिया गया। इस मामले में तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन और तत्कालीन निदेशक केदार पासवान के खिलाफ अदालत में अंतिम बहस जारी है।
अपराध स्वीकार करने पर अदालत ने सुनाई सजा
पटना स्थित सीबीआई की विशेष अदालत संख्या-दो के न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह की ओर से दाखिल दोष स्वीकारोक्ति आवेदन पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी का बयान दर्ज करने के बाद उसे भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने ट्रांसपोर्टर की ओर से पहले जेल में बिताई गई अवधि को उसकी कारावास की सजा में समायोजित करने का आदेश दिया। इसके अलावा दोषी दूधेश्वर नाथ सिंह ने 29 लाख रुपये की जुर्माना राशि अदालत में जमा करा दी। इसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ चल रहे मुकदमे को विधिवत निष्पादित कर दिया।
पूर्व मंत्री और तत्कालीन निदेशक के खिलाफ अंतिम बहस
इसी मामले में नामजद अन्य प्रमुख आरोपियों में तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन और तत्कालीन निदेशक (परचेज एंड ट्रांसपोर्ट) केदार पासवान शामिल हैं। इन दोनों के खिलाफ अदालत में अंतिम बहस की प्रक्रिया जारी है। मामले के विशेष लोक अभियोजक राकेश दुबे ने बताया कि वर्ष 1994 में एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत बरौनी रिफाइनरी से 494.68 मीट्रिक टन अलकतरा जमुई पथ निर्माण प्रमंडल भेजने के लिए उठाया गया था। इस अलकतरे की कीमत करीब 28.43 लाख रुपये थी, लेकिन इसे बीच रास्ते से ही गायब कर दिया गया।
1996 में दर्ज हुआ था मामला, हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने शुरू की जांच
इस मामले में मूल रूप से वर्ष 1996 में बरौनी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में पटना हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 1997 में सीबीआई ने इसकी जांच अपने हाथ में ले ली। गहन जांच के बाद सीबीआई ने छह आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।
तीन आरोपियों की हो चुकी है मौत
मामले की सुनवाई के दौरान छह आरोपियों में से तीन का निधन हो चुका है। वहीं, ट्रांसपोर्टर दूधेश्वर नाथ सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद अदालत ने उसे सजा सुनाते हुए 29 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इस मामले में पूर्व मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन और तत्कालीन निदेशक केदार पासवान के खिलाफ सुनवाई अभी जारी है। दोनों के मामले में अदालत का फैसला आना बाकी है।