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Bihar News: स्मार्ट मीटर से बदली बिहार की बिजली तस्वीर, 92 लाख मीटर के साथ देश में बनाया बड़ा रिकॉर्ड

Fri, 07 Aug 2026 08:46 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Fri, 07 Aug 2026 08:46 PM IST
सार

बिहार ने बिजली वितरण व्यवस्था में डिजिटल तकनीकों और स्मार्ट मीटरिंग के इस्तेमाल के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य में अब तक 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो देश में स्थापित कुल प्रीपेड स्मार्ट मीटरों का करीब 70 प्रतिशत है।

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CII इंटरनेशनल एनर्जी कॉन्फ्रेंस एंड एग्जिबिशन के दौरान जानकारी देते हुए अजय यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार बिजली सुधार और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। राज्य में अब तक 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो देश में स्थापित कुल प्रीपेड स्मार्ट मीटरों का करीब 70 प्रतिशत है। वहीं, देश में लगाए गए कुल स्मार्ट मीटरों (प्रीपेड और पोस्टपेड) में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल से राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था में दक्षता बढ़ने के साथ उपभोक्ता सेवाओं में भी सुधार हुआ है।

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यह जानकारी बिहार के ऊर्जा सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव (भा.प्र.से.) ने नई दिल्ली में आयोजित 7वें CII इंटरनेशनल एनर्जी कॉन्फ्रेंस एंड एग्जिबिशन (IECE 2026) के दौरान दी।

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स्मार्ट मीटरिंग से बिजली वितरण व्यवस्था में आया बदलाव

तकनीकी सत्र ‘डिमांड रिस्पॉन्स 2.0: स्मार्ट मीटर, डीटी मीटर और IoT आधारित फ्लेक्सिबल पावर सिस्टम’ में अजय यादव ने कहा कि बिहार ने स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। स्मार्ट मीटर लगने से बिजली चोरी में कमी आई है, बकाया राशि लगभग समाप्त हुई है और बिलिंग व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच बिहार के बिजली क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। वित्तीय वर्ष 2019-20 में बिलिंग दक्षता 75.14 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में बढ़कर 88.46 प्रतिशत हो गई। वहीं, संग्रहण दक्षता 86 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसी अवधि में एटीएंडसी (AT&C) हानियां 35.12 प्रतिशत से घटकर 11.54 प्रतिशत रह गईं। उन्होंने बताया कि एसीएस-एआरआर (ACS-ARR) अंतर भी अब सकारात्मक हो गया है।

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10 अरब डेटा पॉइंट्स से समझी जा रही बिजली की खपत

ऊर्जा सचिव ने कहा कि बिहार ने स्मार्ट मीटरिंग के जरिए करीब 10 अरब डेटा पॉइंट्स तैयार किए हैं। इनका इस्तेमाल बिजली खपत के पैटर्न को समझने, मांग का अनुमान लगाने और बेहतर निर्णय लेने में किया जा रहा है। राज्य में टाइम-ऑफ-डे (ToD) टैरिफ व्यवस्था भी लागू की गई है, जिससे बिजली के उपयोग को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिल रही है। इसके अलावा करीब 2 लाख डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (DT) मीटर लगाए गए हैं। इससे ट्रांसफॉर्मरों की रियल-टाइम निगरानी, समय पर रखरखाव और बिजली वितरण नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

9,475 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड पूरी

अजय यादव ने कहा कि बिहार औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रहा है। राज्य में 13 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है। उन्होंने बताया कि बिहार ने इस वर्ष 9,475 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड पूरी की है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में 23 से 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 23 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ऊर्जा सचिव ने कहा कि अब सरकार का ध्यान केवल पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक के इस्तेमाल से उद्योगों और उपभोक्ताओं को निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली उपलब्ध कराने पर भी है।

IoT और GIS तकनीक से होगी रियल-टाइम निगरानी

ऊर्जा सचिव ने बताया कि बिहार अपने बिजली वितरण नेटवर्क में उन्नत डिजिटल तकनीकों को तेजी से शामिल कर रहा है। इसके तहत IoT आधारित निगरानी, GIS आधारित परिसंपत्ति मैपिंग, डिजिटल एसेट रजिस्टर और एकीकृत ग्राहक संबंध प्रबंधन (CRM) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन तकनीकों से रियल-टाइम मॉनिटरिंग और तेजी से निर्णय लेने में मदद मिल रही है। उन्होंने ‘सुविधा बिहार पोर्टल’ का भी उल्लेख किया, जिसके जरिए उपभोक्ताओं को 21 ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे बिजली सेवाओं को अधिक पारदर्शी, आसान और उपभोक्ता केंद्रित बनाने में मदद मिली है।

रूफटॉप सोलर और पीएम-कुसुम पर भी जोर

बिहार सरकार रूफटॉप सोलर, कृषि फीडरों के सोलराइजेशन और पीएम-कुसुम योजना के विस्तार पर भी काम कर रही है। साथ ही स्मार्ट ग्रिड तकनीक और उन्नत डेटा एनालिटिक्स के जरिए वितरण नेटवर्क को अधिक नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए तैयार किया जा रहा है।
अजय यादव ने सरकारों, बिजली वितरण कंपनियों, तकनीकी प्रदाताओं, शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साझेदारी और तकनीकी नवाचार भविष्य की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

विशेषज्ञों ने डिजिटल तकनीक को बताया अहम

तकनीकी सत्र में डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी (भा.प्र.से.), अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा), असम सरकार, डॉ. अनूप सिंह, प्रोफेसर, आईआईटी कानपुर, गोपाल पारिख, वरिष्ठ निदेशक, किम्बल और अभिषेक रंजन, सीईओ, बीआरपीएल ने भी हिस्सा लिया। सत्र का संचालन ग्रिडक्रेस्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक मदन मोहन चक्रवर्ती ने किया।



विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन तेजी से ऐसे अत्याधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भर करेगा, जो बढ़ती बिजली मांग और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते एकीकरण के बीच बेहतर संतुलन कायम कर सके। उन्होंने स्मार्ट मीटरिंग, एआई आधारित एनालिटिक्स, IoT आधारित निगरानी और डिमांड रिस्पॉन्स तंत्र को ग्रिड की क्षमता बढ़ाने, बिजली व्यवस्था को मजबूत करने और उपभोक्ताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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