Bihar News: 23 जनवरी को कांग्रेस किसे चुनेगी विधायक दल का नेता? रेस में यह दो नाम, बाकी में यह पेंच फंस रहा
Congress News: 11 दिन बाद बिहार बजट सत्र शुरू हो रहा है। अब तक कांग्रेस में विधायक दल के नेता को लेकर संशय बना हुआ है। गेंद अब दिल्ली के पाले में है। आलाकमान ने सभी विधायकों को दिल्ली तलब किया है। दिल्ली में ही विधायक दल के नेता के नाम पर फैसला लिया जाएगा।
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दो फरवरी से बिहार विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत हो रही है। शीतकालीन सत्र बीत भी गया। लेकिन, अब तक कांग्रेस अपने विधायक दल का नेत नहीं चुन पाई है। पिछली बार विधायक दल के नेता रहे शकील अहमद खान इस बार चुनाव हार चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम चुनाव हार चुके हैं। इनके खिलाफ पहले से ही पार्टी के नेताओं ने मोर्चा खोल रखा है। महज छह विधायक बचे हैं। इनमें से किसी एक को नेता चुना जाना है। रेस में दो नाम हैं। इनमें से किसी एक को नेता चुना जाना है। दिसंबर में ही आलाकमान को चिट्ठी भेज दी गई लेकिन अब तक बात नहीं बन पाई है। हालांकि, बिहार प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो दो से तीन दिन के अंदर सबकुछ फाइनल हो जाएगा। पार्टी के सभी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को 23 जनवरी को दिल्ली बुलाया गया है। वहीं पर आलाकमान इस पर फैसला लेगी।
जानिए किस विधायक के साथ क्या दिक्कत
इधर, छह में तीन विधायक (वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र प्रसाद, चनपटिया से अभिषेक रंजन और फारबिसगंज से मनोज विश्वास) पहली बार चुनाव जीते बने हैं। इनके पास विधायी प्रक्रिया के अनुभव की कमी है। बाकी बचे किशनगंज के विधायक कमरुल होदा अनुभवी नेता तो हैं लेकिन, यह एआईएमआईएम से आए हैं। इस कारण इन्हें विधायक दल नेता बनाने में कांग्रेस को काफी विचार करना पड़ रहा है। वहीं अबिदुर्र रहमान तीसरी बार विधायक बने हैं। इनके पास भी काफी अनुभव है लेकिन स्वास्थ्य कारणों से विधायी प्रक्रिया में सक्रिय होने में उनके साथ समस्या है। सबसे अनुभवी और पूर्व आईपीएस मनोहर प्रसाद सिंह चौथी बार विधानसभा पहुंचे हैं। लेकिन यह आदिवासी समुदाय से आते हैं, समीकरण में पूरी तरह फिट नहीं बैठ पा रहे हैं। इसलिए पार्टी के कुछ अधिकारी इन्हें विधायक दल का नेता बनाने के पक्ष में नहीं है।
रेस में यह दो नाम, अलग-अलग धरा इन्हें दे रहा समर्थन
कांग्रेस सूत्रों की मानें तो विधायक दल का नेता चुने जाने के रेस में पार्टी के वरिष्ठ नेता और तीन बार के विधायक रहे आबिदुर्र रहमान और पहली बार विधायक बने अभिषेक रंजन का नाम शामिल है। आबिदुर्र रहमान काफी अनुभवी हैं। मुस्मिल वोट बैंक पर अच्छी पकड़ है। इसलिए उन्हें नेता बनाया जा सकता है। लेकिन, कांग्रेस का दूसरा धरा युवाओं को आगे लाने की बात कह रहा है। अभिषेक रंजन सबसे युवा नेता हैं। दूसरे धरा का मानना है कि सदन में मुद्दों को अभिषेक रंजन अधिक मजबूती से रख पाएंगे। हालांकि, पहले धरा का मानना है कि अभिषेक रंजन के बाद विधायी कार्य का अनुभव नहीं है। ऐसे में वह सदन में उतने प्रभावी नहीं हो पाएंगे जितने अबिदुर्र रहमान होंगे।
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विधायकों के दूसरे दल में जाने की अफवाह गलत
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह की अफवाहों में कोई दम नही है। हमारे दल के सभी छः विधायक पूरे समर्पण के साथ अपनी पार्टी कांग्रेस के साथ है। खेला-खेला की बात करना एक राजनीतिक शगल बन चुका है। ऐसा कह कर विरोधी अफवाह उड़ाते रहते हैं। खेला के नाम पर तो वें अपने क्षेत्र में क्रिकेट और फुटबॉल का खेल होते देख रहे है। लगन मुहुर्त शुरू हो जाता है। क्रिकेट-फुटबॉल के खेल शुरु हो जाते है। रात में सर्दी रहती हैं। दिन में धूप खिली रहती है। खेल खेलने का यही सही मौसम है। उन्होंने कहा कि असली खेला वह है, जिसे खेलकर खिलाड़ी देश का नाम रोशन करते हैं। बाकी दूसरा वाला खेला तो मदारी वाला खेला है। यही वाला खेल खेलने वालो को पलटी सलटी वाला खेला दिखाई देता है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अब खरमास खत्म हो गया है। कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार और धारदार विपक्ष की भूमिका में है।