Bihar News: नालंदा विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति बोलीं- ज्ञान का कभी अंत नहीं होता, विदेश मंत्री ने क्या कहा?
President Draupadi Murmu: नालंदा आज भी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं। उनके अलावा विदेश मंत्री भी इस शामिल में शामिल हुए थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के नवनिर्मित परिसर में 2000 सीटों वाले अत्याधुनिक ‘विश्वामित्रालय’ सभागार का विधिवत उद्घाटन किया और मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सबसे पहले नालंदा के शीतला माता मंदिर में हुई घटना पर शोक संवेदना व्यक्त की। इस समारोह को एक शाश्वत सभ्यतागत संकल्प की पुनरावृत्ति बताते हुए कहा कि ज्ञान का कभी अंत नहीं होता और शिक्षा सदैव मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहनी चाहिए। उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि वर्तमान बैच में 30 से अधिक देशों के छात्र शामिल हैं, जो नालंदा के एक प्रतिष्ठित वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में पुनः उभरने का संकेत है।
'शिक्षण संस्थान की प्रगति का लाभ समाज तक पहुंचना चाहिए'
समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय की ‘सहभागिता’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की प्रगति का लाभ उसके स्थानीय समाज तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से जुड़ाव विश्वविद्यालय को अपनी जड़ों से जोड़े रखता है। इस क्रम में उन्होंने ‘सहभागिता प्रदर्शनी’ का अवलोकन किया और स्थानीय समुदाय के सदस्यों से संवाद कर उनके अनुभवों को जाना।
Bihar Temple Stampede: नालंदा के शीतला मंदिर में भगदड़, नौ की मौत; पीएम मोदी और सीएम की तरफ से मुआवजों का एलान
विदेश मंत्री बोले- वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति संवेदनशील बने नई पीढ़ी
इस अवसर पर केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने नालंदा के अद्वितीय अंतरराष्ट्रीय स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ते हुए यह आवश्यक है कि नई पीढ़ी वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति संवेदनशील बने। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां से स्नातक होकर निकलने वाले छात्र विश्व भर में भारत के सांस्कृतिक दूत बनेंगे। उन्होंने ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र को दोहराते हुए कहा कि तकनीक और परंपरा का समन्वय ही भविष्य को सशक्त बनाएगा।
West Asia War: विदेशी जहाजों में फंसा मिथिलांचल का मखाना, घरेलू बाजार के व्यापारी संकट में क्यों?
जानिए बिहार के राज्यपाल ने क्या कहा ?
बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने विश्वविद्यालय को निरंतरता और नवीनीकरण का प्रतीक बताया, जो अतीत के वैभव को वर्तमान की आकांक्षाओं से जोड़ता है। वहीं, बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने नालंदा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे चरित्र निर्माण का केंद्र बताया। इधर, कार्यक्रम की शुरुआत में कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने अतिथियों का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने LEAP (लर्न, अर्न और पायनियर) कार्यक्रम सहित विभिन्न शैक्षणिक पहलों की जानकारी दी। समारोह के अंत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सहयोग से तैयार बोधिसत्व अवलोकितेश्वर की एक भव्य प्रतिकृति राष्ट्रपति को स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की गई।