{"_id":"690a067911082668360f335b","slug":"bihar-news-a-strange-order-from-the-civil-surgeon-in-bihar-ordering-only-contract-chos-to-send-photos-daily-2025-11-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bihar News: सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को फोटो भेजकर बनानी होगी हाजिरी, CHO बोले- हमारे साथ भेदभाव हो रहा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bihar News: सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को फोटो भेजकर बनानी होगी हाजिरी, CHO बोले- हमारे साथ भेदभाव हो रहा
Tue, 04 Nov 2025 07:28 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Tue, 04 Nov 2025 07:28 PM IST
सार
Patna News: सिविल सर्जन के इस नए आदेश से नाराज स्वास्थ्यकर्मी अब इसकी लिखित शिकायत वरीय अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी में जुट गए हैं। वह वरीय अधिकारियों से न्याय की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन
डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दो महीने बाद सेवानिवृत्त हो रहे पटना सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह इन दिनों विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भले ही सक्रिय दिख रहे हों, लेकिन उनके एक हालिया आदेश ने स्वास्थ्य विभाग की खूब किरकिरी करा दी है। 30 अक्टूबर को जारी पत्र में उन्होंने सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को निर्देश दिया है कि वह प्रतिदिन सुबह 10 बजे तक अपने कार्यस्थल से जियोटैग फोटो निर्धारित व्हाट्सएप ग्रुप में भेजें। अगर यदि कोई सीएचओ ऐसा नहीं करता है, तो उसकी उपस्थिति शून्य मानी जाएगी और कार्रवाई की जिम्मेदारी उसी की होगी।
विज्ञापन
इधर, इस मामले में सीएचओ ने बताया कि सिविल सर्जन के आदेश की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह नियम केवल संविदा पर कार्यरत सीएचओ पर लागू होगा। हेल्थ मैनेजर, एकाउंटेंट और एएनएम जैसे अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को इससे पूरी तरह छूट दी गई है। वहीं दानापुर समेत कई क्षेत्रों के आयुष्मान केंद्रों में एएनएम की अनुपस्थिति की शिकायतें आम हैं। इसके बावजूद इन कर्मचारियों की उपस्थिति या जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है।
विज्ञापन
स्वास्थ्यकर्मियों के संगठनों ने सीएस के इस आदेश को भेदभावपूर्ण और असंतुलित बताया है। उनका कहना है कि विभागीय अनुशासन के नाम पर केवल संविदा कर्मियों पर सख्ती की जा रही है, जबकि नियमित कर्मचारियों को पूरी तरह छूट दी गई है। वहीं यदि उपस्थिति की निगरानी आवश्यक है, तो यह नियम सभी कर्मियों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। केवल सीएचओ को निशाना बनाना न तो न्यायसंगत है, न ही प्रशासनिक रूप से उचित।
विज्ञापन
इस संबंध में अमर उजाला की टीम ने सिविल सर्जन से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि नियम के तहत ही ऐसा किया गया। सभी सीएचओ (करीब 230) संविदा पर ही तैनात है। उन्हें केवल हाजिरी बनाने के लिए कहा गया है। बायोमैट्रिक से ज्यादा आसान यह प्रक्रिया है। केवल मोबाइल से सेल्फी लेकर भेजना है। उनका यह आरोप लगाना कि हमारे साथ भेदभाव हो रहा है, यह गलत है। विभाग किसी के साथ पक्षपात नहीं करता है। हाजिरी बनाने के लिए सभी को कहा गया है। सभी लोग हाजिरी बना रहे हैं। इसमें दिक्कत क्या है? अगर आप रोज ड्यूटी पर आएंगे तो क्या हाजिरी नहीं बनाएंगे। सभी कार्यालयों में ऐसा होता है। इसलिए कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आती है। किसी अन्य स्वास्थ्यकर्मी को छूट नहीं दिया गया। एएनएम को भी हाजिरी बनाने के लिए कहा गया है। सभी लोग हर दिन भेजते हैं। इसमें विरोध होने जैसी कोई बात नहीं होनी चाहिए।