Bihar: आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी, एक लाख से अधिक को मिलेगा लाभ; मंगल पांडेय
Bihar: स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आशा और ममता कार्यकर्ताओं ने राज्य के दूर-दराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। इनकी मेहनत के कारण ही आज राज्य के स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार देखने को मिल रहा है।
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बिहार सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की रीढ़ मानी जाने वाली आशा और ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में तीन गुना तक की ऐतिहासिक बढ़ोतरका फैसला लिया है। यह निर्णय एक जुलाई 2025 से लागू होगा और इससे राज्यभर की एक लाख से अधिक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बुधवार को विकास भवन स्थित स्वास्थ्य विभाग के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इस निर्णय से जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक मजबूत होंगी।
प्रेस वार्ता में श्री पांडेय ने बताया कि वर्ष 2019 में जहां आशा कार्यकर्ताओं को 1000 रुपये प्रतिमाह की प्रोत्साहन राशि दी जाती थी, अब उसे तीन गुना बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इसी तरह ममता कार्यकर्ताओं को प्रत्येक प्रसव के लिए मिलने वाली राशि को 300 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया गया है। उन्होंने इसे "ऐतिहासिक निर्णय" करार देते हुए कहा कि यह महिला कार्यकर्ताओं के मनोबल को ऊंचा करेगा और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को ऊर्ध्वगामी बनाएगा।
इस फैसले से 91,094 आशा कार्यकर्ता, 4,364 आशा फैसिलिटेटर और लगभग 4,600 ममता कार्यकर्ता लाभान्वित होंगी। इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन के लिए 13,180 रुपये, मोबाइल रिचार्ज के लिए 200 रुपये प्रतिमाह और दो साड़ियों के लिए 2,500 रुपये सालाना की अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी।
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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आशा और ममता कार्यकर्ताओं ने राज्य के दूर-दराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। इनकी मेहनत के कारण ही आज राज्य के स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में बिहार में मातृ मृत्यु दर 365 थी, जो अब घटकर 91 हो गई है। इसी तरह शिशु मृत्यु दर अब 27 है, जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 29 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। नवजात शिशु मृत्यु दर (0 से 28 दिन) अब 19 है, जो देश के औसत के लगभग बराबर है। एचएमआईएस के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में टीकाकरण का आच्छादन अब 95 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
उन्होंने यह भी बताया कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती महिलाओं को एएनसी जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तक लाना, समय पर टीकाकरण कराना, पोषण संबंधी सलाह देना और ओआरएस जैसे जीवन रक्षक साधनों का वितरण जैसे कार्य पूरे समर्पण के साथ किए जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा 29 हजार नई आशा कार्यकर्ताओं की बहाली की प्रक्रिया जारी है, जिसे शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही बीटीएस और बीपीएससी के माध्यम से भी स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य है कि राज्य की प्रत्येक नागरिक तक समय पर और सुलभ स्वास्थ्य सेवा पहुंचे। आशा और ममता कार्यकर्ताओं को मिली यह नई सौगात न केवल उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम है, बल्कि यह राज्य के समग्र स्वास्थ्य विकास को भी मजबूती देगी।