बिहार: सिजेरियन के बाद बिगड़ी प्रसूता की हालत, पति का दावा- दूसरे ऑपरेशन के दौरान पेट से मिला गॉज; जांच शुरू
बिहार के बेगूसराय जिले के बखरी स्थित उमा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 19 वर्षीय प्रसूता की हालत बिगड़ने का मामला सामने आया है। महिला के पति अजय कुमार का आरोप है कि 8 जुलाई 2026 को हुए ऑपरेशन के बाद पत्नी को पेट में तेज दर्द और बुखार की शिकायत होने लगी।
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बिहार के बखरी स्थित उमा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 19 वर्षीय प्रसूता की हालत बिगड़ने का मामला सामने आया है। महिला के पति अजय कुमार का आरोप है कि पटना के एक अस्पताल में 17 जुलाई को दोबारा ऑपरेशन के दौरान उनकी पत्नी के पेट से सर्जिकल गॉज या ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मिली। उन्होंने अस्पताल संचालक, संबंधित चिकित्सकों और कर्मचारियों पर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। इस मामले ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पेट से सर्जिकल गॉज मिलने के दावे की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि और संबंधित अस्पताल का पक्ष सामने आना बाकी है।
8 जुलाई को हुआ था सिजेरियन, इसके बाद बिगड़ती गई हालत
शिकायत के अनुसार, महिला का 8 जुलाई 2026 को बखरी स्थित उमा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था। पति अजय कुमार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उनकी पत्नी को पेट में तेज दर्द, बुखार और अन्य परेशानियां होने लगीं। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित उपचार नहीं मिला और महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई।
पटना में आपातकालीन ऑपरेशन, पेट में सर्जिकल गॉज मिलने का दावा
मामले ने 17 जुलाई को गंभीर मोड़ ले लिया। शिकायत के मुताबिक, महिला की बिगड़ती हालत को देखते हुए उसे पटना के एक अस्पताल में आपातकालीन सर्जरी के लिए ले जाना पड़ा। पति का दावा है कि दूसरे ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट से सर्जिकल गॉज अथवा ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मिली।
यदि जांच में यह आरोप प्रमाणित होता है, तो यह ऑपरेशन के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रियाओं और मरीज की देखभाल में संभावित चूक का गंभीर मामला होगा।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 12 जुलाई को हुई जांच में कुछ चिकित्सकीय मानक असामान्य पाए गए थे और 15 जुलाई तक महिला की हालत गंभीर हो गई थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि होना जरूरी है। साथ ही, संबंधित अस्पताल और चिकित्सकों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
निजी अस्पतालों की निगरानी पर उठे सवाल
इस घटना ने बखरी में संचालित निजी अस्पतालों और क्लीनिकों के पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता तथा उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि निजी चिकित्सा संस्थानों में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित जांच और निरीक्षण किस तरह किए जा रहे हैं। यदि किसी अस्पताल के पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता, ऑपरेशन की व्यवस्था या मरीजों की सुरक्षा से संबंधित नियमों में गड़बड़ी पाई जाती है, तो स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करे।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल, मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की मांग
एक युवा महिला की जिंदगी से जुड़े इस मामले में जांच की पारदर्शिता और जवाबदेही महत्वपूर्ण है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्वास्थ्य विभाग बखरी के अस्पताल के रिकॉर्ड, ऑपरेशन से संबंधित दस्तावेजों और पटना में हुए दूसरे ऑपरेशन की मेडिकल रिपोर्ट की जांच करेगा? क्या संबंधित चिकित्सकों की भूमिका की विशेषज्ञों से समीक्षा कराई जाएगी? यदि चिकित्सकीय लापरवाही प्रमाणित होती है, तो क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी? इन सवालों का जवाब जांच के निष्कर्षों और प्रशासनिक कार्रवाई से ही मिल सकेगा। मामले में थानाध्यक्ष अरविंद कुमार यादव के अनुसार, प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।