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खतरा: अब व्हाइट फंगस ने दी दस्तक, पटना में मिले 4 मरीज, यह ब्लैक फंगस से ज्यादा घातक

Thu, 20 May 2021 02:22 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कुमार संभव Updated Thu, 20 May 2021 02:22 PM IST
सार

व्हाइट फंगस की चपेट में वे कोरोना मरीज आ रहे हैं, जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, व्हाइट फंगस होने की वजह भी प्रतिरोधक क्षमता की कमी है।

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4 patients found of white fungus infection in Patna Bihar more fatal than black fungus
पटना में मिले व्हाइट फंगस के मामले - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देशभर में ब्लैक फंगस यानी म्यूकर माइकोसिस के मामले लगातार सामने आने से खौफ बढ़ रहा है। इस बीच बिहार की राजधानी पटना में व्हाइट फंगस के 4 मामले मिले हैं। बताया जा रहा है कि यह ब्लैक फंगस से भी ज्यादा घातक है और फेफड़ों के संक्रमण का मुख्य कारण है। साथ ही, यह फंगस इंसान के त्वचा, नाखून, मुंह के अंदरूनी हिस्से, आमाशय, आंत, किडनी, गुप्तांग और दिमाग पर भी बेहद बुरा असर डालता है। 

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ऐसे हुई व्हाइट फंगस की पहचान

जानकारी के मुताबिक, पटना में अब तक व्हाइट फंगस के 4 मरीज मिल चुके हैं। पटना मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के हेड डॉ. एसएन सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन चारों मरीजों में कोरोना जैसे लक्षण थे। इन मरीजों कोरोना के तीनों टेस्ट रैपिड एंटीजन, रैपिड एंटीबॉडी और आरटी-पीसीआर किए गए, लेकिन तीनों ही रिपोर्ट निगेटिव आईं। वहीं, कोरोना संबंधी दवाओं का भी उन पर कोई असर नहीं हो रहा था। ऐसे में वृहद जांच की गई, जिसमें व्हाइट फंगस होने की जानकारी मिली। डॉ. सिंह ने बताया कि एंटी फंगल दवाएं देने के बाद मरीज ठीक हो गए।

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बेहद मुश्किल है कोरोना और व्हाइट फंगस पहचानना

बता दें कि जब मरीज का सीटी स्कैन किया जाता है तो फेफड़ों में संक्रमण के लक्षण कोरोना जैसे ही नजर आते हैं। ऐसे में अंतर करना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे मरीजों का रैपिड एंटीजन और आरटी-पीसीआर टेस्ट निगेटिव आता है। डॉक्टर ने बताया कि अगर सीटी स्कैन में कोरोना जैसे लक्षण दिख रहे हैं बलगम का कल्चर कराने से व्हाइट फंगस की पहचान की जा सकती है। 

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इन मरीजों को बना रहा निशाना

गौरतलब है कि व्हाइट फंगस की चपेट में वे कोरोना मरीज आ रहे हैं, जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। ऐसे में व्हाइट फंगस उनके फेफड़ों को संक्रमित कर सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, व्हाइट फंगस होने की वजह भी प्रतिरोधक क्षमता की कमी है। इसके अलावा डायबिटीज, एंटीबायोटिक का सेवन या काफी समय तक स्टेरॉयड लेने से यह फंगस मरीजों को अपनी चपेट में ले रहा है। कैंसर के मरीजों को भी इस फंगस से सावधान रहने की जरूरत है। इसके अलावा नवजात में यह बीमारी डायपर कैंडिडोसिस के रूप में होती है, जिसमें क्रीम कलर के सफेद धब्बे दिखते हैं। छोटे बच्चों में यह ओरल थ्रस्ट करता है। महिलाओं में यह ल्यूकोरिया का मुख्य कारण है।

व्हाइट फंगस से ऐसे करें बचाव

डॉक्टरों ने बताया कि व्हाइट फंगस से बेहद आसानी से बचा जा सकता है। ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों के उपकरण विशेषकर ट्यूब आदि जीवाणु मुक्त होने चाहिए। ऑक्सीजन सिलेंडर ह्यूमिडिफायर के लिए स्ट्रेलाइज वॉटर का इस्तेमाल करना चाहिए। इस फंगस से मरीजों को बचाने के लिए सुनिश्चित करना होगा कि बीमार व्यक्ति जो ऑक्सीजन ले रहा है, वह विषाणुमुक्त हो। 

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