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पटना: सरकार ने 1190 स्कूलों को बंद करने का दिया नोटिस
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 03 Feb 2017 04:04 PM IST
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पटना के शिक्षा अधिकारी ने 1190 प्राइवेट स्कूलों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में स्कूल अधिकारियों से यह पूछा गया है कि क्यों वे शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के नामांकन देने में असफल है। शिक्षा अधिकारी ने 10 फरवरी तक इन स्कूलों से जवाब दाखिल करने को कहा है।
आरटीई के दायरे में कक्षा एक से आठ तक के स्कूल आते हैं। इसमें 6 से 14 साल के बच्चो के लिए शिक्षा मुफ्त और अनिवार्य है, साथ ही प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटे गरीब बच्चों के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है।
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आरटीई के दायरे में कक्षा एक से आठ तक के स्कूल आते हैं। इसमें 6 से 14 साल के बच्चो के लिए शिक्षा मुफ्त और अनिवार्य है, साथ ही प्राइवेट स्कूलों में 25% सीटे गरीब बच्चों के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है।
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प्राथमिक शिक्षा की उप निदेशक पुष्पा झा ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के नामांकन करने के लिए किसी भी तरह की स्क्रीनिंग करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
उन्हे प्रवेश लेने के लिए सिर्फ परिवार की वार्षिक आय दिखानी है। एकमात्र शर्त यह रखी गई है कि स्कूल बच्चों के निवास स्थान के 3 किमी के दायरे में होना चाहिए।
हालांकि कुल मिलाकर 1190 स्कूलों में मंगलवार को स्पष्टीकरण के लिए कहा गया है जिनमें डीएवी, लीड्स एशियन स्कूल, ज्ञान निकेतन, ओपन माइंड बिड़ला स्कूल और रोज बड स्कूल शामिल हैं।
उन्हे प्रवेश लेने के लिए सिर्फ परिवार की वार्षिक आय दिखानी है। एकमात्र शर्त यह रखी गई है कि स्कूल बच्चों के निवास स्थान के 3 किमी के दायरे में होना चाहिए।
हालांकि कुल मिलाकर 1190 स्कूलों में मंगलवार को स्पष्टीकरण के लिए कहा गया है जिनमें डीएवी, लीड्स एशियन स्कूल, ज्ञान निकेतन, ओपन माइंड बिड़ला स्कूल और रोज बड स्कूल शामिल हैं।
इन स्कूलों के अधिकारियों को अपना स्पष्टीकरण देने के लिए एक महीने की समय सीमा दी गई है। जिससे नए सत्र की शुरुआत से पहले वे गरीब बच्चों को प्रवेश से इनकार ना कर सकें ।
अधिकारी ने यह भी कहा कि बहुत से माता-पिता को इस सुविधा के बारे में पता नहीं है कि सरकार हर बच्चे की शिक्षा के लिए 4000 रुपये सालाना देती है।
विभाग ऐसे बच्चों के प्रवेश में मार्गदर्शन करने के लिए भी तैयार है।
अधिकारी ने यह भी कहा कि बहुत से माता-पिता को इस सुविधा के बारे में पता नहीं है कि सरकार हर बच्चे की शिक्षा के लिए 4000 रुपये सालाना देती है।
विभाग ऐसे बच्चों के प्रवेश में मार्गदर्शन करने के लिए भी तैयार है।