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Bihar News: मोतिहारी सदर अस्पताल में बिजली कटते ही टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज, जेनरेटर नदारद

Fri, 27 Jun 2025 04:26 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मोतिहारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मोतिहारी Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Fri, 27 Jun 2025 04:26 PM IST
सार

मोतिहारी के सदर अस्पताल से लापरवाही की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां बिजली कटने के बाद जेनरेटर की व्यवस्था न होने पर डॉक्टर और स्टाफ टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज और काम करते नजर आए। 
 

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Patients treated in torchlight as soon as power cut in Motihari Sadar Hospital, generator missing
मोतिहारी सदर अस्पताल में अंधेरे में इलाज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्य सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पूर्वी चंपारण के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मोतिहारी सदर अस्पताल से लापरवाही की शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जहां बिजली कटते ही डॉक्टर टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करते नजर आए।
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यह नजारा गुरुवार देर शाम का है, जब अचानक बिजली चली गई और अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया। सबसे बड़ी बात यह कि अस्पताल में जेनरेटर की कोई व्यवस्था मौजूद नहीं थी, जिससे पूरे अस्पताल की व्यवस्था ठप पड़ गई। मरीजों को देखने से लेकर फॉर्म भरने तक, स्टाफ और चिकित्सक मोबाइल और टॉर्च की रोशनी पर निर्भर रहे।
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पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी लापरवाही
यह पहली बार नहीं है जब मोतिहारी सदर अस्पताल में इस तरह की तस्वीरें सामने आई हों। इससे पहले भी ऑपरेशन जैसे संवेदनशील कार्य टॉर्च की रोशनी में किए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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प्रशासन ने साधी चुप्पी
इस पूरे मामले को लेकर जब पत्रकारों ने मोतिहारी के सिविल सर्जन डॉ. विनोद कुमार सिंह से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। वहीं अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक ने कुछ भी कहने से साफ इनकार करते हुए कहा कि “इस बारे में सिविल सर्जन ही कुछ बता सकते हैं।”

सरकार के दावों पर सवाल
एक ओर जहां बिहार सरकार और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे लगातार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मोतिहारी सदर अस्पताल जैसी तस्वीरें इन दावों की पोल खोल रही हैं। बुनियादी सुविधा जैसे बिजली और बैकअप जेनरेटर के बिना अस्पताल चलाना न केवल लापरवाही है, बल्कि मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।
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