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बिहार में फिर पनप रहा है अपहरण सिंडिकेट
गुंजन कुमार/नई दिल्ली
Updated Sat, 28 Dec 2013 12:11 AM IST
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कभी अपहरण और फिरौती के लिए कुख्यात बिहार एक बार फिर किडनैपिंग सिंडिकेट की पनाहगाह बनने की ओर बढ़ रहा है।
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इस साल अब तक हुए सात सनसनीखेज अपहरण बिहार को उस जंगल राज की याद दिलाने लगे हैं जिसे नीतीश सरकार बड़ी मशक्कत से काबू में करने का दावा करती है।
इन सातों में सबसे दुस्साहस भरी घटना गुजरात के एक व्यापारी के बेटे काअपहरण है। गुजरात सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की तैयारी में है।
बिहार के पुलिस महानिदेशक अभयानंद ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि उनकी पुलिस ने सभी मामले को सफलतापूर्वक सुलझाया है। यह उनकी बड़ी कामयाबी है। लेकिन अभयानंद यह मानने को तैयार नहीं कि नेतृत्व की ढिलई से हालात बिगड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोक देना पुलिस के बस का नहीं है। बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर अमर उजाला को बताया कि राज्य में पिछले एक साल में अपहरण की घटनाओं में इजाफा हुआ है।
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पुलिस के मुताबिक अंतरराज्यीय किडनैपिंग सिंडिकेट बिहार में फिर जड़ पकड़ने लगा है। पिछले साल भर में अपहरण की सात घटनाएं इसके प्रमाण हैं।
लेकिन पुलिस और राजनीतिक नेतृत्व इस पर कार्रवाई करने के बजाए इसे छुपाने की कोशिश में लगे हैं।
अधिकारी के मुताबिक इस साल मई में अपहरणकर्ताओं ने जमुई के व्यपारी बैकुंठलाल वर्णवाल का अपहरण किया। फिरौती की बात नहीं बनने पर वर्णवाल की हत्या कर दी गई।
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इस मामले में आक्रामक पुलिस कार्रवाई के बजाए जांच का जिम्मा सीआईडी को देकर सरकार ने मामला ठंडा कर दिया।
इसी तरह 22 अगस्त को पटना के छात्र सूरज कुमार का अपहरण किया गया जिसे मुंगेर से छुड़ाया गया। इस मामले की असल कहानी भी अब तक किसी को नहीं मालूम चल पाया है।
इसके बाद चार सितंबर को झारखंड के बोकारो में सत्यम सागर नामक छात्र का अपहरण हुआ जिसे किसी अनजान जगह से छुड़ाया गया।
नवंबर और इस महीने में भी अभिनव कुमार और शैलेश कुमार के अपहरण की भी ऐसी ही मिलती-जुलती कहानी है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक सभी मामलों में शिकार को फिरौती की मोटी रकम देकर छुड़ाया गया है। सूत्रों के मुताबिक दो दिन पहले क्रिसमस के दिन शिवहर के व्यापारी सुशील कुमार को बीच बाजार से बंदूक की नोंक पर उठा लिया गया है।