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Bihar News: मिड-डे मील बना खतरा! अंडा खाने के बाद 8 बच्चे बीमार, जांच में जुटा प्रशासन
Fri, 12 Dec 2025 09:33 PM IST
तिरहुत ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,पश्चिमी चंपारण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,पश्चिमी चंपारण
Published by: तिरहुत ब्यूरो
Updated Fri, 12 Dec 2025 09:33 PM IST
सार
पश्चिमी चंपारण के मझौलिया प्रखंड स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय दुबौलिया में मिड-डे मील खाने के बाद आठ बच्चे अचानक बीमार पड़ गए। अंडा खाने के कुछ समय बाद बच्चों को तेज पेट दर्द और उल्टी होने लगी, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी मच गई।
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बीमार हुए बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पश्चिमी चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय दुबौलिया में शुक्रवार को मिड-डे मील खाने के बाद आठ बच्चे अचानक बीमार पड़ गए। दोपहर के भोजन में अंडा खाने के कुछ ही समय बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूत्रों के अनुसार, कई बच्चों ने अचानक तेज पेट दर्द और उल्टी की शिकायत की। शुरुआत में एक-दो बच्चों को असहजता हुई, लेकिन थोड़ी ही देर में संख्या बढ़कर आठ हो गई। छोटे बच्चों को दर्द से तड़पते देख शिक्षक भी घबरा गए।
बच्चों की हालत बिगड़ते ही स्कूल प्रशासन ने तुरंत मझौलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को फोन किया। सूचना मिलते ही एंबुलेंस और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और बच्चों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में तैनात डॉक्टर प्रगति ने बताया कि प्रारंभिक जांच में फूड प्वाइजनिंग की आशंका है। बच्चों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। उन्हें आवश्यक दवाइयाँ देकर निगरानी में रखा गया है। अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रारंभिक लक्षण बताते हैं कि भोजन में किसी तरह की गड़बड़ी, संक्रमण या अंडे के खराब होने की संभावना है।
मेडिकल टीम इमरजेंसी वार्ड में लगातार बच्चों पर नजर रख रही है। कुछ बच्चों को सलाइन और एंटी-इमेटिक दवाएं दी गई हैं। घटना की खबर फैलते ही अभिभावक भी अस्पताल पहुंचने लगे। अपने बच्चों को दर्द में तड़पता देख कई माता-पिता भावुक हो उठे। अभिभावकों का कहना है कि समय पर उपचार न मिलता तो बड़ा हादसा हो सकता था। स्कूल में भी दहशत का माहौल है।
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ये भी पढ़ें- Bihar News: पटना में 25 जगह बनेंगे वेंडिंग जोन, मंत्री नितिन नवीन बोले- राजधानी को स्मार्ट बनना प्राथमिकता
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। बीईओ और प्रखंड प्रशासन की टीम स्कूल पहुंची और मिड-डे मील की व्यवस्था, अंडों की सप्लाई और भोजन बनाने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि भोजन के सैंपल सुरक्षित रखे जाएंगे और लैब में जांच के लिए भेजे जाएंगे। रसोई में मौजूद सामग्री, बर्तन और पानी की भी जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें मिलती रही हैं। कई बार भोजन देर से बनता है या सामग्री खराब पाई जाती है। घटना के बाद गांव में नाराजगी भी देखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सभी बच्चों की हालत अब सामान्य है। उन्हें रात तक निगरानी में रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर अगले 24 घंटे तक भी रखा जा सकता है। डॉक्टरों ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं।
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बच्चों की हालत बिगड़ते ही स्कूल प्रशासन ने तुरंत मझौलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को फोन किया। सूचना मिलते ही एंबुलेंस और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और बच्चों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में तैनात डॉक्टर प्रगति ने बताया कि प्रारंभिक जांच में फूड प्वाइजनिंग की आशंका है। बच्चों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। उन्हें आवश्यक दवाइयाँ देकर निगरानी में रखा गया है। अस्पताल में भर्ती सभी बच्चों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रारंभिक लक्षण बताते हैं कि भोजन में किसी तरह की गड़बड़ी, संक्रमण या अंडे के खराब होने की संभावना है।
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मेडिकल टीम इमरजेंसी वार्ड में लगातार बच्चों पर नजर रख रही है। कुछ बच्चों को सलाइन और एंटी-इमेटिक दवाएं दी गई हैं। घटना की खबर फैलते ही अभिभावक भी अस्पताल पहुंचने लगे। अपने बच्चों को दर्द में तड़पता देख कई माता-पिता भावुक हो उठे। अभिभावकों का कहना है कि समय पर उपचार न मिलता तो बड़ा हादसा हो सकता था। स्कूल में भी दहशत का माहौल है।
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घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। बीईओ और प्रखंड प्रशासन की टीम स्कूल पहुंची और मिड-डे मील की व्यवस्था, अंडों की सप्लाई और भोजन बनाने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि भोजन के सैंपल सुरक्षित रखे जाएंगे और लैब में जांच के लिए भेजे जाएंगे। रसोई में मौजूद सामग्री, बर्तन और पानी की भी जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें मिलती रही हैं। कई बार भोजन देर से बनता है या सामग्री खराब पाई जाती है। घटना के बाद गांव में नाराजगी भी देखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सभी बच्चों की हालत अब सामान्य है। उन्हें रात तक निगरानी में रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर अगले 24 घंटे तक भी रखा जा सकता है। डॉक्टरों ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं।