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Navratri 2024: बिहार का वह अनोखा मंदिर जहां पुरुषों को नहीं मिलती है एंट्री, जानें वजह
Sun, 06 Oct 2024 05:44 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sun, 06 Oct 2024 05:44 PM IST
सार
Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर का यह मंदिर जम्मू के कटरा स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। यह गुफानुमा मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि अपने विशेष वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है।
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श्रीमाता वैष्णो देवी-काली मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक ऐसा मंदिर स्थित है जहां कुछ समय के लिए पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होता है। यह परंपरा माता की विशेष मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है, जिनका पालन अत्यधिक कड़ाई से किया जाता है। यहां तक कि इस दौरान पुरुष पुजारी भी मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकते। यह अनूठा मंदिर शहर के कालीबारी रोड पर स्थित श्रीमाता वैष्णो देवी-काली मंदिर है, जिसे स्थानीय लोग माता वैष्णो देवी का प्रतीक स्वरूप मानते हैं।
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पुरुषों के लिए प्रवेश प्रतिबंधित, विशेष मान्यताओं का पालन
इस मंदिर की एक खास परंपरा यह है कि एक विशेष समय के दौरान पुरुषों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होती। यह मान्यता माता के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है, इसका पालन बड़े धैर्य और आस्था के साथ किया जाता है। मंदिर के नियम इतने सख्त हैं कि यहां पुरुष पुजारी भी उस समय मंदिर में नहीं आ सकते। यह परंपरा माता के लिए विशेष समय पर उनकी गोपनीयता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए है।
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वैष्णो देवी की तर्ज पर बना यह गुफानुमा मंदिर
मुजफ्फरपुर का यह मंदिर जम्मू के कटरा स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। यह गुफानुमा मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि अपने विशेष वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। सफेद गुफा जैसी संरचना के भीतर माता वैष्णो देवी की पिंडी की स्थापना की गई है, जो माता के प्रतीकात्मक दर्शन को दर्शाती है। भक्त जो कटरा नहीं जा सकते, वे यहां आकर माता की आराधना करते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
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मंदिर का निर्माण और इतिहास
मंदिर का निर्माण कई वर्षों पहले मुजफ्फरपुर के विधायक और पूर्व मंत्री रघुनाथ पांडे द्वारा कराया गया था। मंदिर के महासचिव योगेश कुमार टिंकू ने बताया कि यह मंदिर 400 खंभों पर खड़ा है। इसमें महादेव, श्रीराम दरबार और दक्षिणेश्वर काली माता समेत कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर की ऊंचाई और अद्वितीय संरचना इसे और भी खास बनाती हैं। भक्तों को माता के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए एक लंबी चढ़ाई करनी पड़ती है, जो उनकी आस्था की परीक्षा और भक्तिभाव को और प्रगाढ़ करती है।
मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़
नवरात्र और विशेष धार्मिक अवसरों पर इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त माता वैष्णो देवी और काली माता के आशीर्वाद के लिए यहां आते हैं। यह मंदिर मुजफ्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों में एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो चुका है। यहां न केवल आस्थावान भक्त आते हैं, बल्कि पर्यटक भी इस मंदिर की भव्यता और धार्मिक महत्व को देखने के लिए खिंचे चले आते हैं।