फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Muzaffarpur News ›   Muzaffarpur News: Muslim community in Sumera Murgia Chak village waits for Janmashtami, flutes trade

Bihar: वह गांव जहां मुस्लिम समुदाय को रहता है जन्माष्टमी का इंतजार, बांसुरी की गूंज लोगों की खींच लाती है यहां

Fri, 23 Aug 2024 07:52 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Fri, 23 Aug 2024 07:52 PM IST
सार

Muzaffarpur News: स्थानीय लोगों ने कहा कि हमारे लिए भगवान कृष्ण के महा पर्व जन्मोत्सव जन्माष्टमी का बड़ा इंतजार रहता है। लेकिन बीते एक दशक से अब हमारी आजीविका पर असर पड़ रहा है। हम और पूरा परिवार मिलकर बांसुरी बनाने का काम पूरे वर्ष करते हैं। लेकिन जन्माष्टमी पर्व पर हमारा उत्साह और भी बढ़ जाता है। 

विज्ञापन
Muzaffarpur News: Muslim community in Sumera Murgia Chak village waits for Janmashtami, flutes trade
चीनी माल की वजह से बांसुरी के काम को मिल रही कड़ी चुनौती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जन्माष्टमी पर्व हो और बांसुरी न हो तो पर्व इसके बिना अधूरा होता है। वहीं, इन बांसुरी के निर्माण करने वाले लोग अगर दूसरे समुदाय के हो तो इसकी बात कुछ और ही होती है। इससे आपसी प्रेम और सद्भाव का संदेश देश ही नहीं बल्कि विदेश तक फैलता है। हम बात कर रहे हैं मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड के बड़ा सुमेरा मुर्गिया चक गांव की। जहां के दर्जनों मुस्लिम परिवार ऐसे हैं, जो कई पीढ़ियों से बांसुरी बनाने का काम करते हैं। हालांकि आधुनिकीकरण की चकाचौंध में अब यह काम कम होता जा रहा है।

विज्ञापन


विज्ञापन

 
मुस्लिम समुदाय पीढ़ी दर पीढ़ी से बना रहा बांसुरी
मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड के सुमेरा गांव के मुर्गिया चक गांव निवासी दर्जनों परिवारों की आजीविका का साधन बांसुरी है। स्थानीय लोग कहते हैं कि हमारे लिए भगवान कृष्ण के महा पर्व जन्मोत्सव जन्माष्टमी का बड़ा इंतजार रहता है। लेकिन बीते एक दशक से अब हमारी आजीविका पर असर पड़ रहा है। हम और पूरा परिवार मिलकर बांसुरी बनाने का काम पूरे वर्ष करते हैं। लेकिन जन्माष्टमी पर्व पर हमारा उत्साह और भी बढ़ जाता है, क्योंकि बांसुरी भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। इस दिन के लिए मांग पूरे साल भर की भरपाई कर देती है।
विज्ञापन
विज्ञापन



 
कभी पड़ोसी देशों से भी आती थी बड़ी मांग  
स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग कहते हैं कि दो तीन दशक पूर्व तो हमारे यहां की बनाई गई बांसुरी की बांग्लादेश, नेपाल और भूटान तक मांग होती थी। इसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती थी। अब यह कम हो गई है। उन्होंने बताया कि यहां कई लोग कई पीढ़ियों से बांसुरी बनाने का काम करते हैं। यही नहीं बल्कि यहां बनी हुई बांसुरी की बिक्री बांग्लादेश, नेपाल और भूटान तक हुआ करती थी। इसके कारण बहुत ही अच्छी आय होती थी। लेकिन, अब इनका समय बदल गया है। अब बच्चे और बड़े भी इन बांसुरी की मांग नहीं करते हैं, क्योंकि अब तकनीक ने इनकी जगह ले ली और चीनी सामग्री से अब बहुत चुनौती मिल रही है।
 
पूर्वजों से ली गई सीख का आज भी कर रहे निर्वहन
कुढ़नी प्रखंड के बड़ा सुमेरा मुर्गिया चक गांव में सुरीली बांसुरी का  निर्माण करने वाले शख्स नूर मोहम्मद ने बताया कि उन्होंने खुद इस काम को अपने पूर्वजों से सीखा है। जब उनकी उम्र महज 10 साल की थी, तब से बांसुरी बनाने के काम में लगे हुए हैं और अब अपनी नई पीढ़ी को सिखा रहे हैं। वहीं, अब नई पीढ़ी इसको जानकर भी काम करना नहीं चाहती है, क्योंकि अब पहले वाली बात नहीं है। इसलिए बच्चों को अब पढ़ाई-लिखाई के साथ अन्य दूसरे रोजगार में लगाए हुए हैं, ताकि परिवार का भरण पोषण कर सके।



 
नरकट की खेती के बाद बांसुरी का निर्माण
बांसुरी के निर्माण के लिए बड़ी मान्यता है कि द्वापर युग में कृष्ण के हाथों में रहने वाली बांसुरी नरकट की होती थी। नरकट से कलम के साथ-साथ बांसुरी का निर्माण भी किया जाता है। नूर मोहम्मद ने बताया कि गांठ रहित इस लकड़ी से बांसुरी बनाना आसान होता है। बांसुरी के निर्माण में नरकट की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं अब नरकट के पौधे में कमी आई है। सस्ते के कारण इसके बदले अब चीनी माल देखने को मिलता है। कुढ़नी प्रखंड के इस गांव में कारीगर अब भी नरकट की खेती करने के बाद बांसुरी का पारंपरिक तरीके से निर्माण करते हैं। कारीगर बांसुरी निर्माण के लिए दूसरे जिले से भी नरकट को खरीदकर लाते हैं।

कारीगर मोहम्मद रिजवान ने बताया कि वह एक रुपए में नरकट को खरीदकर लेकर आते हैं और एक बांसुरी को बनाने में करीब पांच रुपये तक का खर्च आता है। लेकिन निर्माण के बाद भी अब इसकी मांग बेहद कम है। फिर भी जन्माष्टमी पर्व पर सबसे ज्यादा बिक्री हो जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed