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बिहार: दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल जांच में देरी, एससी-एसटी कोर्ट ने थानाध्यक्ष और आईओ को भेजा शो-कॉज नोटिस

Thu, 24 Sep 2026 05:57 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Thu, 24 Sep 2026 05:57 PM IST
सार

मुजफ्फरपुर के साहेबगंज थाना क्षेत्र में दुष्कर्म पीड़िता की प्राथमिकी दर्ज होने के चार दिन बाद मेडिकल जांच कराए जाने पर विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने नाराजगी जताई। न्यायाधीश अजय कुमार मल्ल ने थानाध्यक्ष और आईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

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Muzaffarpur Bihar news : special sc st court show cause notice to sho and case io for lack of abuse case
लापरवाही मामले में कोर्ट ने लौटा शो कॉज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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मुजफ्फरपुर की विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल जांच में गंभीर लापरवाही बरतने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। मामला जिले के साहेबगंज थाना क्षेत्र का है। दुष्कर्म की प्राथमिकी दर्ज होने के चार दिन बाद पीड़िता की मेडिकल जांच कराए जाने पर अदालत ने साहेबगंज थानाध्यक्ष और मामले के जांच अधिकारी (आईओ) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

विशेष एससी-एसटी कोर्ट के न्यायाधीश अजय कुमार मल्ल ने गुरुवार को साहेबगंज थाना पुलिस की इस लापरवाही पर नाराजगी जताई। अदालत ने दोनों अधिकारियों से पूछा है कि दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में पीड़िता की मेडिकल जांच कराने में चार दिन की देरी क्यों हुई और यह देरी किसके निर्देश पर हुई।

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अदालत में प्रस्तुत मामले के अनुसार, पीड़िता ने 19 सितंबर को साहेबगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में मुख्य आरोपी और उसकी मां को नामजद अभियुक्त बनाया गया था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा। जब भी वह आरोपी पर शादी के लिए दबाव बनाती थी, वह टालमटोल करता रहा।

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पीड़िता के परिजनों ने 19 सितंबर को इस मामले को लेकर पंचायत भी बुलाई थी। पंचायत के दौरान आरोपी ने जाति का हवाला देते हुए पीड़िता से शादी करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाते हुए साहेबगंज थाने में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।

दुष्कर्म जैसे मामलों में चिकित्सीय साक्ष्य जुटाने के लिए पीड़िता की मेडिकल जांच जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे में प्राथमिकी दर्ज होने के चार दिन बाद मेडिकल जांच कराए जाने को अदालत ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इसे जांच प्रक्रिया में अनुचित देरी मानते हुए थानाध्यक्ष और केस के आईओ से स्पष्टीकरण मांगा है।

विशेष एससी-एसटी कोर्ट के न्यायाधीश अजय कुमार मल्ल ने पूछा कि इतनी गंभीर कानूनी प्रक्रिया में देरी क्यों हुई और किसके निर्देश पर पीड़िता की मेडिकल जांच चार दिन बाद कराई गई। अदालत ने यह भी पूछा है कि इस लापरवाही के लिए दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

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