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Bihar: बिहार के नाम एक और उपलब्धि! स्नेक डिटेक्टर बैरियर को मिली मान्यता, घर-गोदाम होंगे सांप-मुक्त

Mon, 05 Jan 2026 11:36 AM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Mon, 05 Jan 2026 11:36 AM IST
सार

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों प्रो. मनेंद्र कुमार और डॉ. ब्रज किशोर प्रसाद सिंह द्वारा विकसित स्नेक डिटेक्टर बैरियर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

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Muzaffarpur Bihar news : snake detector device made by brabu university professor for approve
प्रो. मनेंद्र कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार ने एक बार फिर विज्ञान के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों द्वारा विकसित स्नेक डिटेक्टर बैरियर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। यह आधुनिक उपकरण न केवल लोगों को सांपों के खतरे से सुरक्षित रखने में कारगर साबित होगा, बल्कि सांपों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएगा। खास बात यह है कि मात्र ₹40–₹50 प्रति माह के मामूली खर्च में घर, गोदाम और आसपास के क्षेत्रों को सांपों की पहुंच से प्रभावी रूप से सुरक्षित रखा जा सकता है।
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बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रो. मनेंद्र कुमार और पीजी जूलॉजी विभाग के डॉ. ब्रज किशोर प्रसाद सिंह ने मिलकर इस स्नेक डिटेक्टर बैरियर को विकसित किया है। इस उपकरण के डिजाइन को यूके इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज ऑफिस से पेटेंट मिल चुका है, जिससे इस नवाचार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी प्राप्त हो गई है।
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यह स्नेक डिटेक्टर बैरियर जंग-रोधी माइल्ड स्टील से बने डुअल लेयर रिपेलेंट स्टेशन पर आधारित है। इसका हर स्टेशन एक सेल्फ केयर यूनिट की तरह काम करता है। स्टेशन के ऊपरी हिस्से में लगभग 300 ग्राम कंकड़ या रेत, 20 एमएल कार्बोलिक एसिड, लौंग का तेल और सिट्रोनेला ऑयल डाला जाता है। इन पदार्थों के आपसी रासायनिक प्रभाव से एक तीखी गंध निकलती है, जो स्टेशन में बने दो-तीन छोटे छेदों से धीरे-धीरे बाहर फैलती है। इस गंध के कारण तय सीमा के भीतर सांप नहीं आ पाते।
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जब गंध कम होने लगती है, तो सिस्टम में लगी एलईडी लाइट और वायरलेस सिग्नल के जरिए अलर्ट मिल जाता है। ठंड के मौसम में गंध को बेहतर तरीके से फैलाने के लिए इसमें सोलर हीट प्लेट भी लगाई गई है। इस स्टेशन को कंक्रीट पर बोल्ट से या स्टैंड-माउंटेड फ्रेम के जरिए जमीन में मजबूती से लगाया जा सकता है।

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इस उपकरण की कुल कीमत लगभग ₹1500 है। एक बार मिश्रण भरने के बाद 15 से 30 दिन तक यह काम करता है। इसके बाद रिफिलिंग पर सिर्फ ₹40–₹50 का खर्च आता है। प्राकृतिक रसायनों से बना होने के कारण यह उपकरण पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ है और दूर-दराज ग्रामीण इलाकों में भी आसानी से लगाया जा सकता है।


अपने आविष्कार के बारे में प्रो. मनेंद्र कुमार बताते हैं कि भारत में सांपों की करीब 300 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से केवल 30 प्रतिशत ही जहरीली होती हैं। इसके बावजूद हर साल देश में लगभग 60 हजार लोगों की मौत सर्पदंश से हो जाती है, जो दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों का आधे से ज्यादा है। वहीं, 70 प्रतिशत सांप जहरीले नहीं होते, लेकिन डर के कारण लोग उन्हें भी मार देते हैं। इससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए इस स्नेक डिटेक्टर बैरियर पर लंबे समय तक शोध किया गया।

 

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