मुजफ्फरपुर में गर्मी का असर अब प्रसिद्ध शाही लीची पर दिखने लगा है। लगातार बढ़ते तापमान और बारिश की कमी की वजह से कई लीची के फल खराब हो रहे हैं और कुछ फल फट भी रहे हैं। बारिश न होने के कारण लीची की अच्छी पैदावार नहीं हो पा रही है, जिससे किसान परेशान हैं और बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
जिले में करीब बारह हजार एकड़ में लीची की खेती होती है। लेकिन इस बार मौसम साथ नहीं दे रहा है। बारिश नहीं होने और गर्मी ज़्यादा बढ़ने की वजह से लीची खराब हो रही है। पेड़ों पर लगे कई फल झुलसने लगे हैं, जिससे किसान बहुत परेशान हैं। मौसम सही नहीं होने के कारण लीची फटने भी लगी है और तेज गर्मी से उसके छिलके सूखने लगे हैं। अगर अगले सात दिनों तक ऐसा ही मौसम रहा तो इस बार लीची की पैदावार कम होगी और बाजार में लीची कम दिखाई देगी।
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मुसहरी प्रखंड के लीची किसान संजीव कुमार ने बताया कि वह कई सालों से लीची की खेती कर रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मौसम बदल रहा है और समय पर बारिश नहीं होने की वजह से काफी परेशानी हो रही है। किसान खुद पानी डालकर किसी तरह लीची के पेड़ बचा रहे हैं, लेकिन ये बहुत ही कम मदद कर पा रहा है। संजीव कुमार ने कहा कि जब लीची लाल होने लगी, तो लगा कि अब जल्द ही बाजार में बेच पाएंगे, लेकिन फिर से मौसम ने साथ नहीं दिया। भीषण गर्मी और बारिश की कमी से पेड़ पर लगे फल झड़ने लगे हैं, फटने लगे हैं और अब लीची का गूदा और छिलका भी सूखने लगा है। इससे किसान बहुत परेशान हैं।
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मौसम में बदलाव को लेकर राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के फल वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि इस बार लीची के फटने की समस्या देखी जा रही है। इसका कारण मौसम में बदलाव है। उन्होंने कहा कि जब मिट्टी में नमी कम हो जाती है और सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे बोरॉन की कमी हो जाती है, तब तेज धूप का असर फलों पर पड़ता है और फल फटने लगते हैं। डॉ. सुनील ने बताया कि इसका आसान उपाय यह है कि फल लगने के 15 से 20 दिन बाद 0.4% बोरॉन या बोरेक्स को पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसके अलावा टीसू बैग का भी इस्तेमाल करें, जिससे फलों के गुच्छों को ढक दिया जाए ताकि तेज धूप सीधे उन पर न पड़े। इससे फल सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने बताया कि कई किसान इस उपाय को अपनाकर अच्छा लाभ पा रहे हैं।