{"_id":"663dd76eb07a633331012feb","slug":"lok-sabha-2024-satta-ka-sangram-in-muzaffarpur-discussion-with-youth-muzaffarpur-lok-sabha-seat-2024-05-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Satta Ka Sangram: मुजफ्फरपुर में युवा बोले- सड़क, स्वास्थ्य-रोजगार मतदान के मुख्य मुद्दे; काम हुआ पर टिका नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Satta Ka Sangram: मुजफ्फरपुर में युवा बोले- सड़क, स्वास्थ्य-रोजगार मतदान के मुख्य मुद्दे; काम हुआ पर टिका नहीं
Fri, 10 May 2024 01:44 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Fri, 10 May 2024 01:44 PM IST
सार
Lok Sabha 2024: अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ शुक्रवार को मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र पहुंचा। यहां अमर उजाला ने सुबह चाय पर चर्चा की। वहीं, मतदाताओं के मुद्दों पर युवाओं से चर्चा की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर...।
विज्ञापन
मुजफ्फरपुर में युवाओं से चर्चा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' शुक्रवार को बिहार के मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में पहुंचा। यहां सुबह चाय पर चर्चा में आम मतदाताओं के मुद्दे जाने गए। वहीं, अब युवाओं से चर्चा में मतदाता अपने मुद्दों और समस्याओं पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं।
विज्ञापन
'बीते दस साल में कोई काम नहीं हुआ'
मुजफ्फरपुर में गोला रोड बनारस बैंक रोड पर अमर उजाला से बातचीत करते हुए आदित्य किशोर ने बताया कि सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार पर बीते 10 साल में कोई काम नहीं हुआ। यहां के नेता रोजगार के मुद्दे पर बिल्कुल भी बात नहीं कर रहे हैं। सभी का अपना एजेंडा है और उसी पर चले जा रहे हैं। फेज वन और टू में इतनी सारी फैक्टरियां जो बंद हो चुकी हैं, अगर वही शुरू हो जाएं तो यहां के युवा को बाहर नहीं जाना पड़े। राजनीतिक अजेंडा लोगों का कि किसी तरह जीतना है, चाहे धन से हो, बल से हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
'बंद फैक्टरियों को ही चालू करवा दें'
वहीं, विजेंद्र कुमार ने बताया कि यहां मुद्दों पर बात होती बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही है। यहां मूल मुद्दा तो रोजगार का ही है। हमारे पास बेला इंडस्ट्रियल क्षेत्र में फैक्टरियां बहुत सारी हैं, लेकिन आज की डेट में वे सब बंद पड़ी हैं। उंगलियों पर गिन सकते हैं, उतनी फैक्टरी चालू हैं। बंद पड़ी फैक्टरियों को ही चालू कर दिया जाए तो बहुत अच्छा हो जाएगा। यहां सड़कों की हालत बहुत खराब है। सड़कें बनती तो हैं लेकिन भूल-चूक सुधारने के चलते फिर तोड़ दिया जाता है। पिछले एक साल से देख रहे हैं कि एक रोड कम से कम चार-पांच बार तोड़ा जा चुका है। प्रणालीगत काम नहीं हो रहा है। यहां नालियों की सफाई भी सही ढंग से नहीं होती है। अगर आप किसी भी रोड से जाएं तो कीचड़ रोड पर ही मिलेगा।
'यहां लोग नेता नहीं बहनोई चुनते हैं'
सिद्धार्थ आनंद ने बताया कि यहां लोग नेता कम बहनोई ज्यादा चुनते हैं। यहां कौन क्या विकास करेगा इसकी बात नहीं है। यहां है कि नेता हमारी जाति का होना चाहिए। यहां टिकट जाति के आधार पर बंटता है। वोट जाति के आधार पर पड़ता है। उसी का परिणाम आज सब देख रहे हैं। यह व्यवस्था (चुनाव में जाति की प्रबलता) अगले बीस-पच्चीस वर्षों में बदलती नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि यहां हम चोर और डकैत में से चोर को चुनते हैं। दो चोर में से जो कम चोरी करेगा, उस प्रकार से चुनाव होता है यहां पर।