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रेलवे ट्रैक पर आतंकी नजर! बिहार में IP कैमरा लगा कर्नाटक से ट्रैकिंग; NGO के नाम पर क्या देख रही थी तीसरी आंख?

Sat, 09 May 2026 11:24 AM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाजीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाजीपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Sat, 09 May 2026 11:24 AM IST
सार

Bihar: वैशाली के सराय स्टेशन के पास रेलवे सिग्नल टावर पर लगा संदिग्ध आईपी कैमरा आतंकी नेटवर्क से जुड़ा होने की आशंका ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कैमरे को कर्नाटक से मोबाइल के जरिए ऑपरेट किया जा रहा था और इसका लिंक पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है। एटीएस, एसटीएफ और जीआरपी मामले की जांच में जुटी हैं।

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Bihar Vaishali Terrorist Camera on the Hajipur Muzaffarpur Railway Section vaishali News hajipur news
खुफिया कैमरा रख रहा पैनी नजर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रेलखंड के सराय स्टेशन के आगे समपार फाटक संख्या-43 सी स्पेशल के पास लगे सिग्नल टावर पर इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) कैमरा लगाकर आतंकी नेटवर्क द्वारा रेलवे ट्रैक और सड़क की निगरानी किए जाने का मामला सामने आया है। सोलर संचालित इस कैमरे को इंटरनेट के जरिए चलाया जा रहा था। गुमटीमैन से मिली सूचना के बाद कैमरे की जांच में सनसनीखेज जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि कैमरे में आतंकी यासीन भटकल की तस्वीर भी मिली है।

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मुख्यालय को दी गई सूचना
आईपी एड्रेस की जांच में कर्नाटक के तटीय क्षेत्र से पाकिस्तान कनेक्शन वाले आतंकी नेटवर्क से इसकी निगरानी होने की बात सामने आई है। सराय स्टेशन के स्टेशन मास्टर मनोज कुमार के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर मुख्यालय को सूचना दी गई। शुक्रवार देर शाम एटीएस की तीन सदस्यीय टीम और एसटीएफ मौके पर जांच के लिए पहुंची। पूर्व मध्य रेलवे के आरपीएफ आईजी अमरेश कुमार और रेल एसपी बीणा कुमारी को भी पूरे मामले से अवगत कराया गया है।
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NGO कर्मी बनकर पहुंचा संदिग्ध युवक
एक दिन पहले हरियाणवी बोलने वाला एक संदिग्ध युवक समपार फाटक पर पहुंचा और खुद को एक एनजीओ से जुड़ा बताते हुए सिग्नल टावर पर कैमरा फिट कर वहां से निकल गया। गुमटीमैन को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उसने स्टेशन मास्टर को इसकी जानकारी दी। स्टेशन मास्टर ने तुरंत आरपीएफ को सूचना दी। आरपीएफ ने मामला जीआरपी हाजीपुर और मुजफ्फरपुर को भेज दिया।
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जांच में जुटीं कई एजेंसियां
जीआरपी के एसआई मौके पर पहुंचे और कैमरा उतरवाकर गुमटीमैन को सौंप दिया। बाद में रेल डीएसपी सोनपुर सहकार खान के नेतृत्व में जीआरपी टीम ने गहन जांच शुरू की, जिसके बाद मामला गंभीर रूप में सामने आया। इसके बाद कैमरे को मुजफ्फरपुर जीआरपी को सौंप दिया गया। हाजीपुर थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक टीम जांच में जुटी है। वहीं मुजफ्फरपुर जीआरपी के एसआई के नेतृत्व में दूसरी टीम भी अलग-अलग बिंदुओं पर जांच कर रही है। मामले की तकनीकी जांच के लिए रेलवे के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है।

अंधेरे में भी कर रहा था साफ रिकॉर्डिंग
यह कैमरा आईपी तकनीक पर आधारित है और रात के अंधेरे में भी साफ तस्वीर रिकॉर्ड कर रहा था। कैमरे में 4G सिम लगा था। पुलिस ने कैमरे से करीब एक घंटे की रिकॉर्डिंग भी निकाली है। कैमरा मूवेबल था और कर्नाटक में बैठा व्यक्ति इसे मोबाइल से ऑपरेट कर रहा था। कैमरे के जरिए रेलवे ट्रैक के साथ-साथ सड़क मार्ग की भी निगरानी की जा रही थी।


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आतंकी साजिश की आशंका गहराई
प्रारंभिक जांच में कैमरे का कनेक्शन पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन से जुड़े लोगों के नाम पर होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि रेलवे ट्रैक, किसी वीआईपी मूवमेंट, हत्या या बड़े आतंकी हमले की रेकी के लिए यह कैमरा लगाया गया हो सकता है। आसपास लगे अन्य कैमरों और फुटेज को भी खंगाला जा रहा है, ताकि कैमरा लगाने वाले युवक की पहचान की जा सके।

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