Bihar News: यूनेस्को हेरिटेज में शामिल एलएस कॉलेज का आज 125वां स्थापना दिवस, डिप्टी सीएम करेंगे शिरकत
LS College Foundation Day: एलएस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने बताया कि कॉलेज पहले बीबी कॉलेजियट स्कूल में चलता था। उसके बाद वहां से हटकर आठ कमरों के कच्चे मकान में शुरू हुआ था। उस मकान में अभी कॉलेज का कार्यालय चलता है। वर्तमान में कॉलेज में अभी दो सौ कमरे हैं।
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विश्व विरासत यूनेस्को हेरिटेज में शामिल हो चुका मुजफ्फरपुर का चर्चित एलएस कॉलेज आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। इसे लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है। स्थापना दिवस के 125वें समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा शिरकत करेंगे। गौरतलब है कि वर्ष 1899 से शुरू हुआ यह कॉलेज ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि देश के कई महान विभूतियों के शिक्षण संस्थान के लिए विख्यात रह चुका है। यह कॉलेज अपनी स्थापना के समय दो सौ विद्यार्थियों से शुरू हुआ था। वर्तमान में इस कॉलेज में 10 हजार विद्यार्थियों का दाखिला है। इस वर्ष की बात करें तो आज तीन जुलाई को कॉलेज अपने स्थापना के 125वें वर्ष में पहुंच गया है। कॉलेज में स्थापना दिवस मनाने की जोर-शोर से तैयारी है।
वहीं, कार्यक्रम से एक दिन पहले बारिश के बाद भी छात्र और शिक्षक-प्राचार्य भी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे रहे। एलएस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने बताया कि कॉलेज पहले बीबी कॉलेजियट स्कूल में चलता था। उसके बाद वहां से हटकर आठ कमरों के कच्चे मकान में शुरू हुआ था। उस मकान में अभी कॉलेज का कार्यालय चलता है। वर्तमान में कॉलेज में अभी दो सौ कमरे हैं। इस कॉलेज के पहले प्राचार्य निशिकांत चटर्जी थे। वह वर्ष 1899 से 1900 तक प्राचार्य रहे।
उन्होंने बताया कि कॉलेज शुरुआत के समय में ही कोलकाता विवि के तहत आता था। उसके बाद यह पटना विवि में चला गया और अब यह वर्ष 1952 से बिहार विवि का अंग है।
प्राचार्य ने बताया कि एलएस कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्रों में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रघुवंश प्रसाद सिंह, बिहार के पूर्व डीजीपी डीपी ओझा, तमिलनाडु के पूर्व मुख्य सचिव मोहन प्यारे और विधान परिषद सदस्य रामचंद्र पूर्वे शामिल हैं। यही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र एलएस कॉलेज में शिक्षक रहे थे। यहां तक कि भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, महान कवि रामधारी सिंह दिनकर और स्वतंत्रता सेनानी जेबी कृपलानी भी बतौर शिक्षक रहकर अपना योगदान दे चुके हैं।