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Bihar News: मुजफ्फरपुर में बिजली विभाग का एक और कारनामा; उपभोक्ता को भेज दिया ₹52 लाख का बिल, फिर काटी बिजली
Tue, 02 Jul 2024 01:20 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Tue, 02 Jul 2024 01:20 PM IST
सार
Muzaffarpur News: उपभोक्ता हरेश ने बताया कि 27 तारीख को जब हम शहर में अपना काम कर रहे थे, तब बेटे का फोन आया कि बिजली काट दी गई है। उसके बाद हमने शहर से ही मीटर रिचार्ज कर दिया पर बिजली चालू नहीं हुई। घर जाकर देखा तो 52 लाख से ज्यादा का बिल आया।
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बिजली के स्मार्ट मीटर से आया गलत बिल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुजफ्फरपुर में 34 लाख के बाद अब फिर से एक उपभोक्ता को 52 लाख रुपये का बिजली बिल भेजा गया है। स्मार्ट मीटर से बिजली उपभोक्ता परेशान हैं। अब किसी को 30 लाख तो किसी को 52 लाख रुपये का बिजली बिल पहुंच रहा है। वहीं, अचानक बिजली कटने के बाद जानकारी मिल रही है। जबकि अधिकारी धैर्य रखने और सिस्टम में सुधार की बात कर रहे हैं।
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बिजली विभाग ने भले ही बिहार में प्री पेड मीटर हर घर में लगाने का लक्ष्य बनाया है, पर ये स्मार्ट मीटर बिजली उपभोक्ताओं के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। उपभोक्ता डिफरमेंट चार्ज काटने और गलत बिजली बिल से परेशान हैं। ताजा मामला मुजफ्फरपुर जिले के मनियारी थाना क्षेत्र का है, जहां के हरिशंकर मनियारी के हरेश कुमार जिनकी मीटर सं 120 1046766 है उन्हें ₹52,43,327 यानी की बावन लाख तैंतालीस हजार तीन सौ सत्ताईस रुपये का बिजली बिल आया है। यही नहीं हरेश के घर 27 जून से बिजली काट दी गई है और वे विभाग के चक्कर लगाकर परेशान हैं।
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इसको लेकर हरेश ने बताया कि 27 तारीख को जब हम शहर में अपना काम कर रहे थे, तब बेटे का फोन आया कि बिजली काट दी गई है। उसके बाद हमने शहर से ही मीटर रिचार्ज कर दिया पर बिजली चालू नहीं हुई है। जब शाम को घर आने पर बिल डाउनलोड किया तब पता चला कि 52 लाख का बिजली बिल बना हुआ है। यही नहीं बिल देखने के बाद हरेश ढोली जाकर संबंधित अधिकारी को आवेदन देकर बिल सुधार की गुहार लगा चुके हैं, पर अब तक उनके बिल में सुधार नहीं हुआ है।
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इस पूरे मामले पर बिजली विभाग के अकॉउंट डिपार्टमेंट के इंजीनियर ने बताया कि दरअसल स्मार्ट मीटर लगने के समय पुराने मीटर की रीडिंग नए मीटर में डाल दी जाती है। उदयपुर की कंपनी इसके आधार पर आगे का काम करती है। जब हम लोगों को लगता है कि बिल गलत बन गया है तब हम लोग इसका सुधार कर देते हैं। हमने उदयपुर की सिक्योर कंपनी के बिहार हेड को ही लेटर के माध्यम से भी कहा है कि इस तरह के एब्नार्मल बिल की जानकारी तत्काल विभाग को दी जाए। ताकि हम उसका निदान कर सकें और हम लोग एक सिस्टम डेवलप कर रहे हैं, जिसके तहत हर संदेहास्पद बिल पहले विभाग को मिलेगा। फिर वह बिल बनाया जाएगा।