Bihar News: बिहार विधानसभा चुनावी परिणाम अब अदालत के सामने, जानिए कौन सी सीट बनी विवाद का केंद्र
पश्चिम चंपारण की चनपटिया विधानसभा सीट का हालिया चुनाव अब सियासी बहस से निकलकर न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। क्षेत्र के पूर्व विधायक उमाकांत सिंह ने पटना हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल कर वर्तमान विधायक अभिषेक रंजन की जीत को चुनौती दी है।
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पश्चिम चंपारण जिले की चनपटिया विधानसभा सीट का हालिया चुनाव अब सियासी गलियारों से निकलकर अदालत के कठघरे में पहुंच गया है। क्षेत्र के पूर्व विधायक उमाकांत सिंह ने विधानसभा चुनाव के नतीजों को पटना हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए वर्तमान विधायक अभिषेक रंजन के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की है। इस घटनाक्रम के बाद चनपटिया की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
पश्चिम चंपारण की चनपटिया विधानसभा सीट पर हुए चुनाव को लेकर दायर इस याचिका में पूर्व विधायक उमाकांत सिंह ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पटना हाई कोर्ट की प्रधान पीठ में याचिका दाखिल कर वर्तमान विधायक अभिषेक रंजन को मुख्य प्रतिवादी बनाया है। वहीं, सहायक प्रतिवादी के रूप में चनपटिया विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर और पश्चिम चंपारण के पूर्व डीडीसी सुमित कुमार को भी नामजद किया गया है।
पूर्व विधायक उमाकांत सिंह की ओर से यह चुनाव याचिका 17 दिसंबर 2025 को दाखिल की गई, जिसे हाई कोर्ट ने स्वीकार कर दर्ज कर लिया है। याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 80, 80A और 81 के तहत चुनाव प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई है। इसमें चुनाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, जिन पर अब न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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हाई कोर्ट की ई-कोर्ट्स वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिका दाखिल होने के बाद प्रारंभिक स्तर पर सभी औपचारिक आपत्तियों का निपटारा कर दिया गया है। 17 दिसंबर को हुई स्क्रूटनी के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि याचिका से संबंधित सभी आवश्यक औपचारिकताओं का विधिवत पालन किया गया है। हालांकि, मामले की पहली सुनवाई की तिथि और अगली तारीख फिलहाल तय नहीं हो सकी है। वर्तमान में यह मामला न्यायिक खंड के अंतर्गत पूर्ण पीठ में सूचीबद्ध है।
पूर्व विधायक द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाने के बाद चनपटिया विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी साफ नजर आने लगी है। समर्थकों के बीच जहां उम्मीद और बेचैनी का माहौल है, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को क्षेत्र की राजनीति के लिए एक अहम मोड़ मान रहे हैं। गांव-चौपाल से लेकर राजनीतिक बैठकों तक, हाई कोर्ट के संभावित रुख को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
गौरतलब है कि चुनाव याचिकाओं में आमतौर पर मतदान प्रक्रिया, मतगणना, नामांकन या चुनाव आचरण से जुड़े मुद्दों को आधार बनाया जाता है। हालांकि, उमाकांत सिंह की याचिका में लगाए गए आरोपों और तथ्यों की वास्तविक स्थिति अदालत की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल चनपटिया की नजरें पटना हाई कोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस चुनावी विवाद को नई दिशा देती है या जनादेश को यथावत रखती है। आने वाले दिनों में होने वाला फैसला इस सीट की राजनीति की दिशा तय करेगा।