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देख लो सरकार: बिहार की ये सड़क एक महीने में ही बताशे की तरह बिखर गई, नगर परिषद में खूब हो रही कमीशनखोरी

Mon, 06 Jan 2025 03:14 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, शेखपुरा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, शेखपुरा Published by: अरविंद कुमार Updated Mon, 06 Jan 2025 03:14 PM IST
सार

बिहार के शेखपुरा जिले में एक सड़क इतनी खराब हुई कि मानो बताशे की तरह बिखर गई हो। इतना ही नहीं नगर परिषद में कमीनशनखोरी भी जबरदस्त तरीके से हावी है।

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This road of Bihar fell apart like batasa in just a month there is lot of corruption Sheikhpura Nagar Parishad
खराब हुई सड़क - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं कि न खाएंगे न खिलाएंगे। लेकिन शेखपुरा नगर परिषद में कमीशनखोरी का जो आलम है, उससे यही लग रहा है कि भले ही मुख्यमंत्री न खाएं और न खिलाएं, लेकिन खाने वालों को मानो छूट जरूर दे रखे हैं, जिसका आलम शेखपुरा नगर परिषद में देखने को मिल रहा है। बता दें कि नगर परिषद शेखपुरा के विकास कार्यों में कमीशनखोरी 30 से 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि वहां के वार्ड पार्षद का ही आरोप है।

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वार्ड पार्षद आनंदी यादव, शिव कुमार और मुरारी कुमार आदि कहते हैं कि नगर परिषद के चेयरमैन रश्मि कुमारी के पति विजय मास्टर और कार्यपालक पदाधिकारी विनय कुमार के द्वारा दोनों हाथ से लूटखसोट कर रहे हैं। मनमाने तरीकों से अपने चहेते ठेकेदारों से काम कराकर मनमाना नाजायज रिश्वत लिया जा रहा है, जिससे कार्य की गुणवत्ता पर काफी बुरा असर पड़ रहा है।
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उदाहरण के तौर पर बंगाली मोहल्ले में नवनिर्मित सड़क, जो एक महीने में ही बतासे की तरह बिखर गई। कमोवेश सभी योजनाओं में यही हाल है। बंगाली मोहल्ले में घटिया निर्माण की जांच के लिए जिलाधिकारी से भी किया गया था। लेकिन वहां भी खानापूर्ति कर दिया गया था। लिहाजा लोग यही कह रहे हैं कि जिला प्रशासन और नगर प्रशासन दोनों मिले हुए हैं और भ्रष्टाचार में जुटे हुए हैं। राशि का बंदरबाट करने के लिए पथ निर्माण के सड़कों में भी अतिक्रमण कर पूर्व से लगे पेवर ब्लॉक को फिर से लगाकर राशि निकाल ली जा रही है। चांदनी चौक के समीप बाबा भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा, दल्लू चौक पर पटेल की प्रतिमा सहित आदि प्रतिमा में भी मरम्मती के नाम पर राशि निकालने की तैयारी की जा रही है।
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पूरे शहर में नल जल का बुरा हाल है। कहीं नल टूटे हैं तो कहीं पाइप टूटे हुए हैं। पानी की आपूर्ति भी अनियमित है। शहर में मच्छर भगाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है और लाखों रुपये का मशीन धूल फांक रहा है। साफ-सफाई का भी बुरा हाल है। सब्जी मंडी और टेंपो स्टैंड से लाखों की कमाई की जा रही है। लेकिन सड़क से अतिक्रमण और जाम हटाने की जरूरत नगर परिषद नहीं समझती। जहां-तहां सड़क किनारे नाजायज तरीके से दुकानों का भी निर्माण किया जा रहा है, जिससे सड़क की चौड़ाई सिमट गई है और आने वाले वर्षों में जिले को भयंकर जाम का सामना करना पड़ेगा। पथ निर्माण तथा स्वास्थ्य विभाग इस पर आपत्ति भी दर्ज किया था। लेकिन चांदी के सिक्कों के आगे सब नतमस्तक हो गए और जिलावासियों को अंधकार में डूबने को छोड़ दिया है।

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