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Bihar News: ट्रेन की चपेट में आने से गंभीर घायल हुआ शख्स; लोग तमाशबीन बने रहे, पर तीन बच्चों ने ऐसे बचाई जान
Sat, 22 Jun 2024 05:08 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sat, 22 Jun 2024 05:08 PM IST
सार
Begusarai News: घायल व्यक्ति की पत्नी ने बच्चों की तारीफ करते हुए कहा कि अगर इन बच्चों ने साहस और मानवता नहीं दिखाई होती तो आज उसके पति की जान नहीं बच पाती। घायल के लिए भगवान के रूप में सामने आए सोनू, जियाउल और शिवा आपस में दोस्त हैं। उनकी उम्र सात साल से नौ साल के बीच है।
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सोनू, जियाउल और शिवा ने बचाई घायल व्यक्ति की जान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार के बेगूसराय में तीन बच्चों ने जांबाजी और साहस दिखाते हुए न सिर्फ एक व्यक्ति की जान बचाई, बल्कि कंधे पर लादकर घायल को घर पहुंचाया। उसके बाद उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल में भी भर्ती कराया। बच्चों के इस साहस ने न सिर्फ मानवता की मिसाल पेश की, बल्कि समाज के सामने एक उदाहरण भी पेश किया है।
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जानकारी के मुताबिक, तीन बच्चों ने यह कारनामा तब कर दिखाया जब एक व्यक्ति ट्रेन की टक्कर लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद सभी लोग तमाशबीन बने रहे, जबकि ये तीन बच्चे अपना फर्ज निभाते हुए घायल को कंधे पर लादकर उसके घर ले गए। उसके बाद वे घायल को ई-रिक्शे पर लादकर इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया। यह घटना लोहिया नगर रेलवे गुमटी के पास की है।
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घटना को लेकर बताया जा रहा है कि लोहियानगर मोहल्ले में किराए के मकान में रहने वाले संतोष चौधरी का बेटा चंदन चौधरी घर से सब्जी लेने के लिए निकला था। रेल पटरी के पास से गुजरने के दौरान वह किसी तरह ट्रेन की चपेट में आ गया और बुरी तरह घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद सभी लोग घायल को अस्पताल ले जाने के बजाय तमाशा देखते रहे। इसी बीच घर से खाना खाकर बाहर निकले तीन बच्चे भीड़ देखकर मौके पर पहुंचे। उनमें से दो बच्चों ने घायल को जैसे-तैसे कंधे पर लादकर उसको घर तक पहुंचाया। फिर बाद में घर वालों के सहयोग से ई-रिक्शा ठीक कर उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे।
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घायल व्यक्ति की पत्नी ने बच्चों की तारीफ करते हुए कहा कि अगर इन बच्चों ने साहस और मानवता नहीं दिखाई होती तो आज उसके पति की जान नहीं बच पाती। घायल के लिए भगवान के रूप में सामने आए सोनू, जियाउल और शिवा आपस में दोस्त हैं। उनकी उम्र सात साल से नौ साल के बीच है।
बच्चों ने बताया कि उन्होंने मोबाइल पर कहीं देखा था कि दूसरों की मदद करना इंसान का फर्ज होता है। इसी से प्रेरित होकर उन लोगों ने घायल की जान बचाई। ऐसा कर वे काफी खुश हैं, अगर वे लोग मौके पर नहीं पहुंचते तो घायल की जान जा सकती थी। फिलहाल बच्चों के इस साहस से न सिर्फ घायल व्यक्ति का परिवार खुश है, बल्कि घटना को जानने वाले लोग भी बच्चों के इस कारनामे पर उनकी प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं।