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Bihar : पार्थिव शरीर को श्रद्धा के साथ मिलेगा सदगति, राजधानी पटना में बना आधुनिक सुविधाओं वाला शवदाहगृह

Tue, 23 Jun 2026 08:37 PM IST
Krishan Ballabh Narayan न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Krishan Ballabh Narayan Updated Tue, 23 Jun 2026 08:37 PM IST
सार

Bihar : मानव जीवन की अंतिम यात्रा को सदगति और पूर्ण गरिमा प्रदान करने के लिए बिहार सरकार के सहयोग से राजधानी पटना में आधुनिक सुविधाओं वाला शवदाहगृह बनाया है। यह आधुनिक सुविधाओं से लैस पहला शवदाह गृह है।

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श्मशान घाट पटना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हर किसी की अंतिम यात्रा को सदगति प्रदान करने यानी मृत्यु के बाद मनुष्य के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार सुविधापूर्ण और गरिमा के साथ करने को लेकर बिहार सरकार के स्तर से खास पहल शुरू की गई है। पटना में मौजूद बांसघाट स्थित शमशान घाट में कई तरह की आधुनिक सुविधाओं को ईशा फउंडेशन के स्तर से विकसित किया गया है। यहां आने वाले लोगों को अंतिम संस्कार करने से लेकर पंडित, नाई, डोम राजा समेत अन्य सभी तरह के विधि-विधानों में अब एक निर्धारित राशि ही खर्च करनी पड़ेगी। इसके लिए बांसघाट पर ईशा फाउंडेशन की तरफ से पूरी तरह से प्रशिक्षित स्वयं सेवकों की तैनाती भी की गई है, जो मृतकों के शोक-संतप्त परिजनों को सांत्वना देकर फिर से जीवन के प्रति आस पैदा कराने से लेकर अन्य सभी स्तर पर मदद प्रदान करेंगे। ये स्वयं सेवक मूल रूप तमिलनाडु के रहने वाले हैं। कई लोग तो इंजीनियर की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर ईशा फाउंडेशन से जुड़कर यहां लोगों की सेवा कर रहे हैं।

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आधुनिक श्मशान घाट का शवदाह गृह - फोटो : अमर उजाला

बांस घाट में बनेगा काल भैरव मंडपम
पटना का बांस घाट शमशान घाट 4.50 एकड़ में फैला हुआ एशिया का सबसे बड़ा शमशान घाट है। साथ ही यह पूर्वी भारत का आधुनिक सुविधाओं से लैस पहला शवदाह गृह भी है। यहां एक 8 फीट ऊंची काल भैरव की मूर्ति स्थापित होने वाली है और एक काल भैरव मंडपम बनेगा। इस स्थान का उपयोग पार्थिव शरीर को रखकर अंतिम संस्कार से पूर्व सभी क्रिया क्रमों को संपन्न किया जाएगा। यहां एक साथ 18 मृत शरीरों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। मृतक के परिजनों को बैठने के लिए दो एसी हॉल बनाए गए हैं। पीने का स्वच्छ पानी से लेकर शौचालय समेत अन्य सभी जरूरी सुविधाएं बहाल की गई हैं। गंगा जल से भरे हुए दो तालाब बनाए गए हैं, क्योंकि गंगाजी घाट से करीब 3 से 4 किमी दूर हो गई हैं। एक तालाब नहाने और दूसरा अस्थि विसर्जन के लिए उपयोग में आता है। 

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शवदाह गृह में लगा यंत्र - फोटो : अमर उजाला

15 दिनों में गैस से चलने वाले फर्नेंस होगा शुरू
बांस घाट में शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए लकड़ी आधारित 6, बिजली से चलने वाले 4 फर्नेंस और 8 खुले स्थल मौजूद हैं। आगामी 15 दिनों में अंतिम संस्कार के लिए गैस से चलने वाले खास तरह के फर्नेंस तैयार हो जाएंगे, जहां आसानी से शवदाह किया जा सकता है। यह दूसरे अन्य सभी माध्यमों से कम लागत वाला है और इससे प्रदूषण भी कम होता है। वर्तमान में यहां शवदाह में आने वाला खर्च 3500 रुपये के अलावा 500 रुपये डोम राजा का, 250 रुपये पंडितजी और 150 रुपये नाई का शुल्क लगता है। वहीं, लकड़ी से अंतिम संस्कार कराने की स्थिति में लड़की की कीमत अलग से शामिल होती है।  

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शवदाह गृह में लगा मशीन - फोटो : अमर उजाला

दीघा घाट में भी बनेगा आधुनिक शवदाह गृह
राजधानी में एक अन्य स्थान दीघा घाट पर मौजूद शमशान घाट को नए तरीके से आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। यह शवदाह गृह एलपीजी गैस आधारित होगा। इसे भी ईशा फाउंडेशन ही विकसित करने जा रहा है। पटना में दो स्थानों के अलावा बेगूसराय के सिमरिया घाट, भागलपुर, गया, सहरसा और छपरा में मौजूद शवदाह गृहों को आधुनिक तरीके से विकसित करने की योजना है। 2025 में राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में ईशा फाउंडेशन को छह शहरों के शमशान घाटों को ईशा फाउंडेशन से विकसित कराने का निर्णय लिया था। इसे लेकर जून 2025 में सरकार के साथ ईशा फाउंडेशन की सामाजिक एवं पर्यावरण कल्याण के लिए काम करने वाली इकाई ईशा ऑउटरिच का एक समझौता भी हुआ। इस समझौते के बाद शमशान घाटों की तस्वीर बदलकर सुविधायुक्त बनाने की कवायद शुरू की गई।

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मशीन - फोटो : अमर उजाला

ईशा फाउंडेशन की सेवा एक नजर में
ईशा फाउंडेशन की शमशानघाट सेवा का कार्यक्रम पिछले 15 वर्षों से चल रहा है। अकेले तमिलनाडु में 33 से अधिक शवदाह गृहों का संचालन संस्थान कर रही है। इस समयावधि में सवा लाख से अधिक मृत शरीर का अंतिम संस्कार इन आधुनिक तरीके से संचालित शवदाह गृहों में किया जा चुका है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले लोगों के लिए अंतिम संस्कार की सेवा पूरी तरह से मुफ्त रखी गई है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में बिहार में भी यह सुविधा गरीबों को मुफ्त मिलेगी।    

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आधुनिक श्मशान घाट - फोटो : अमर उजाला

पहली बार बिहार दौरे पर आ रहे सदगुरु   
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरु पहली बार बिहार दौरे पर आ रहे हैं। उनका प्रस्तावित तीन दिवसीय दौरा 26 जून से शुरू होकर 28 जून को समाप्त होने जा रहा है। 26 जून को सदगुरु सूबे के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी से विशेष तौर पर मुलाकात करेंगे। साथ ही राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी उनका संवाद होगा। 27 जून को पटना में गांधी मैदान के पास मौजूद बापू सभागार में सभी स्तर के लोगों से सीधा संवाद करेंगे और उनका सतसंग होगा। 28 जून को कुछ अन्य आयोजनों में शामिल होने के बाद वे वापस तमिलनाडु लौट जाएंगे। इस मामले में फाउंडेशन की उच्च पदाधिकारी मां गुरुदासी ने बताया कि सदगुरु का पहली बार बिहार भ्रमण अपने आप में एक बड़ी घटना है। पटना समेत अन्य शहरों में इस संस्थान की तरफ से शमशान घाटों का आधुनिक तरीके से प्रबंधन करने का उदेश्य मृत शरीर का अंतिम संस्कार सनातक पद्धति से गरिमापूर्ण तरीके से करना है।

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