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Manjhi controversy: मांझी बोले- दलितों को अछूत मानते हैं ब्राह्मण, भाजपा ने बयान को बताया हिंदुओं का अपमान
Sat, 05 Nov 2022 03:20 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 05 Nov 2022 03:20 PM IST
सार
बिहार में नीतीश कुमार नीत सत्तारूढ़ महागठबंधन के घटक हिंदुस्तानी अवाम मोर्चे के प्रमुख मांझी ने राज्य की मोकामा और गोपालगंज विधानसभा सीटों के उपचुनावों में राजद की आसान जीत की भविष्यवाणी भी की। इन सीटों के नतीजे रविवार को आएंगे।
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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बयान से बिहार में नया विवाद खड़ा हो गया है। मांझी ने शनिवार को कहा कि हिंदू समाज दलितों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार करता है। खासकर ब्राह्मण वर्ग उन्हें अछूत मानता है। मांझी के बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति प्रकट की और कहा कि उन्होंने हिंदुओं की भावना का अपमान किया है।
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बिहार में नीतीश कुमार नीत सत्तारूढ़ महागठबंधन के घटक हिंदुस्तानी अवाम मोर्चे के प्रमुख मांझी ने राज्य की मोकामा और गोपालगंज विधानसभा सीटों के उपचुनावों में राजद की आसान जीत की भविष्यवाणी भी की। इन सीटों के नतीजे रविवार को आएंगे।
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मुसहर जाति का प्रतिनिधित्व करने वाले मांझी महादलित समाज के हैं। उन्होंने जिस भी राजनीतिक ताकत से गठबंधन किया, उसने उसका शोषण किया। मांझी ने दावा किया उक्त दोनों सीटों के दलितों ने सात दलों के सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट दिया है। इस साल की शुरुआत में नीतीश कुमार द्वारा भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद महागठबंधन ने राज्य में सरकार बनाई है। मांझी की पार्टी भी उसमें शामिल है।
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पत्रकारों ने मांझी से पूछा था कि क्या भाजपा ने हिंदुत्व कार्ड खेलकर दलित वोटों में सेंध मारी है? पूर्व सीएम मांझी ने झुंझलाहट के साथ कहा, 'मैं दलितों से कहता रहता हूं कि आप हिंदुओं के बारे में सोचते हो, लेकिन पिछले 75 वर्षों से आपके साथ गुलाम जैसा व्यवहार किया जाता है। ब्राह्मण व पुजारी आपके कार्यक्रम करने के लिए अनिच्छुक रहते हैं और जब वे करते भी हैं, तब भी वे आपके द्वारा दिए गए भोजन को स्वीकार करने को तैयार नहीं होते। हालांकि, बहुत से ब्राह्मण ऐसे हैं जो पीते हैं और मांस खाते हैं। मांझी पहले भी कई बार विवादित टिप्पणी कर चुके हैं।
भाजपा बोलीं- क्या मांझी टोपी पहनना पसंद करेंगे?
उधर, विपक्षी दल भाजपा ने मांझी की टिप्पणी का कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने कहा कि उन्हें हिंदुओं की भावनाएं आहत करने वाले बयान नहीं देना चाहिए। यदि वे खुद को हिंदू नहीं मानते हैं तो उन्हें बताना चाहिए कि उनका धर्म क्या है? यदि तिलक से उन्हें परेशानी होती है तो क्या वे टोपी पहनना पसंद करेंगे?
मांझी के संन्यास का वक्त आया
भाजपा प्रवक्ता रामसागर सिंह ने कहा कि पूर्व सीएम मांझी सठिया गए हैं। उनके संन्यास का वक्त आ गया है। उन्हें जो धर्म अच्छा लगता है, उसे अपना लें। हिंदू धर्म छोड़ दें। आपको राम अच्छे नहीं लगते, कृष्ण अच्छे नहीं लगते। अगर हिंदू धर्म में हैं तो राम की पूजा तो करनी ही पड़ेगी।
न्यायपालिका में दलितों को आरक्षण दिलाएं
मांझी की पार्टी के मुख्य प्रवक्ता दानिश रिजवान ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि वह दलितों के हित में अपनी राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करे। न्यायपालिका और शीर्ष सरकारी पदों पर दलितों के लिए आरक्षण सुनिश्चित करे।
मांझी ने पहले भी दिए थे विवादित बयान
- मांझी ने इससे पूर्व अंबेडकर जयंती के एक कार्यक्रम में कहा था कि राम भगवान नहीं थे, वह तो तुलसीदास और वाल्मीकि रामायण के पात्र थे। रामायण में बहुत सी अच्छी बातें लिखी हैं, इसलिए हम उसे मानते हैं, पर राम को नहीं जानते।
- पूजा-पाठ करने से कोई बड़ा नहीं होता है। अनुसूचित जाति के लोगों को पूजा-पाठ करना बंद कर देना चाहिए।
- जो ब्राह्मण मांस खाते हैं और शराब पीते हैं, झूठ बोलते हैं, उनसे दूर रहना चाहिए। उनसे पूजा-पाठ नहीं कराना चाहिए।
- शबरी के जूठे बेर को राम ने खाया था, आज हम लोगों के यहां कोई खाना खाकर दिखाए। सवर्ण और उच्च जाति के लोग भारत के मूल निवासी नहीं हैं, वह बाहरी हैं।